पीएम मोदी के लिए नेशन फर्स्ट हमेशा रहा है, वह देश को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को बखूबी पहचानते हैं और समय समय पर देश के लोगों को उनसे सावधान रहने को कहते रहते हैं ताकि देश के नुकसान पहुंचाने वाले देश को नुकसान न पहुंचा सकें।१५ अगस्त के भाषण में उन्होंने हथियारी नक्सलियों के देश से समाप्त हो जाने का जिक्र करते हुए देश को आगाह किया था कि हथियारी नक्सली तो समाप्त हो गए हैं लेकिन दिमागी नक्सली देश में है और वह देश के लिए उससे भी बड़ा खतरा है क्योंकि हथियारी नक्सली को जन्म देने वाले यहीं हैं।यही दिमागी नक्सली खुद तो हथियार नहीं उठाते है, खुद देश में सामने आकर अराजकता नहीं फैलाते हैं,खुद देश को सामने आकर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं लेकिन युवाओं के दिमाग में देश विरोधी विचार यही डालते हैं उनको गलत रास्ते पर ले जाते हैं।इससे देश को नुकसान पहुंचता है,देश का विकास प्रभावित होता है।देश के युवाओं की जो ऊर्जा देश के विकास के काम में आनी चाहिए, वह देश को नुकसान पहुंचाने में नष्ट होती है।
पीएम का दिमागी नक्सली का तीर बिलकुल ठीक निशाने पर लगा है और जो लोग भी नक्सलियों के समर्थक रहे हैं,जो नक्सलियों का क्रांतिकारी बताते रहे हैं, जो नक्सलियों की हर तरह से मदद करते रहे हैं। जब पीएम मोदी ने देश के लोगों को दिमागी नक्सलियों से सावधान रहने को कहा है। पीएम मोदी ने किसी का नाम नहीं लिया कि कौन दिमागी नक्सली है लेकिन देश के लोग जानते हैं कि कौन लोग दिमागी नक्सली हैं और वह अपने समय में क्या कुछ करते रहे हैं। जनता जानती है कि ऐसे लोग सत्ता के साए में कैसे खेल खेलते रहे हैं, सत्ता के संरक्षण मे ऐसे लोग देश के अहम संस्थानों में जगह बनाने में सफल रहे हैं।यह खुद को बुध्दिजीवी कहते हैं,इनके विचार परिवार,समाज व देशविरोधी होते हैं,यह परिवार से लेकर देश में अपने विचारों से अराजकता फैलाने का प्रयास करते हैं।
पीएम मोदी के दिमागी नक्सली की प्रतिक्रिया तो होनी ही थी,नक्सलियों के समर्थकों ने इस पर दो तरह की प्रतिक्रिया आई है। एक तो पीएम चिदंबरम ने कहा है कि हां वह दिमागी नक्सली हैं। इसके बाद पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि वह दिमागी नक्सली हैं।इसके बाद केजरीवाल ने भी कहा है कि वह दिमागी नक्सली हैं।पीएम मोदी ने किसे दिमागी नक्सली कहा है यह देश के लोग जानते हैं और उनका समर्थन व सहयोग कौन लोग करते है यह भी देश के लोग जानते हैं इसलिए विपक्ष की तरफ से यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि सरकार की नजर में सरकार से सवाल पूछने वाले,सरकार का विरोध करने वाले दिमागी नक्सली है।कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम ने कहा है कि यदि सरकार की नजर में सवाल उठाना दिमागी नक्सल है तो मैं दिमागी नक्सली हूं।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि पहले विरोधियों को अर्बन नक्सल और अब दिमागी नक्सली कहना सरकार की हताशा का प्रतीक है।कांग्रेस के नेता आज खुद को दिमागी नक्सली कहते वक्त यह भूल रहे हैं कि मनमोहन सरकार के समय कहा गया था कि नक्सली देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं,पीएम मोदी भी तो वही कह रहे हैं कि दिमागी नक्सली आज देश के लिए खतरा है तो कांग्रेस नेता उसे मान नहीं रहे हैं और जनता में भ्रम फैला रहे हैं।
सरकार ने सवाल पूछने वाली जनता और युवाओं के लिए दिमागी नक्सली का प्रयोग नहीं किया है लेकिन विपक्ष भ्रम फैलाने के लिए इसे जनता व युवाओं सेे जोड़कर दिमागी नक्सलियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। वह भ्रम फैला रहा है कि जनता व युवा सरकार से सवाल न पूछ सकें, इसलिए ऐसा कहा है,सवाल पूछने वाले दिमागी नक्सली हैं।देश की जनता और जिन इलाकों में नक्सलियों का आतंक रहा है वहां के लोग दिमागी नक्सलियों को अच्छे से पहचानते हैं कि कैसे वह नक्सलियों के समर्थन में कभी मानवाधिकार,कभी एनजीओ,कभी सेमिनार में तो कभी लेख के जरिए कैसे उनको क्रांतिकारी बताया करते थे।इसलिए विपक्ष कितना भी भ्रम फैलाए देश की जनता समझदार है, पीएम मोदी ने क्या कहा है,समझती है और क्या करना है,यह वह जानती है।
कांग्रेस नेता एक तरह से भ्रम फैला रहे हैं तो आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल दूसरी तरह से भ्रम फैलाने के लिये कहा है कि व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार से सवाल करेगा और पूरे भारत में बेहतर सुविधाओं की मांग करेगा, उसे 'दिमागी नक्सल' कहा जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के अनुसार, 'दिमागी नक्सल' वह व्यक्ति है जो सवाल उठाता है और शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना चाहता है। उनके अनुसार, जो लोग अस्पताल और सड़कों जैसी अच्छी सुविधाएं चाहते हैं, वे 'दिमागी नक्सल' हैं।जनता सच जानती है,मोदी ने जो कहा है उसे सच मानती है इसलिए आने वाले दिनों में भी वह दिमागी नक्सलियों और उनकी मदद करने वालों को सत्ता में नहीं आने देगी। चाहे वह खुद को कितना भी विकसित भारत का समर्थक बताएं।
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