गले पड़ना व गले मिलना में बहुत अंतर होता है

Posted On:- 2026-08-16




सुनील दास

कोई भी देश हो,कोई भी समाज हो या कोई भी परिवार हो,वहां गले मिलने की परंपरा होती है,रिवाज होता है और इसके पीछे प्यार होता है,सम्मान होता है,निकट होने का भाव होता है, अपनेपन का एहसास होता है। जब भी कोई अपना सामने आता है तो आदमी उससे गले मिलता है और प्यार,सम्मान,अपनेपन का एहसास कराता है, इससे पता चलता है कि दोनों एक दूसरे के प्रति समान प्यार,सम्मान और अपनेपन का भाव रखते हैं।जब यह भाव नहीं होता है तो आदमी गले मिलने की जगह, हैलाे, नमस्ते आदि कहते हुए मिलता है।इसमें सम्मान का भाव होता है,जानने का भाव होता है लेकिन प्यार,निकटता का भाव नहीं होता है।जहां तक गले पड़ने की बात है तो इसमें एक व्यक्ति दिखावा करता है कि वह सामने वाले से बहुत प्यार करता है,अपना समझता है, करीबी समझता है लेकिन दूसरे व्यक्ति में ऐसा कोई भाव नहीं होता है।जब दो देश के पीएम मिलते हैं तो वह गले मिलते हैं तो इसमें दोनों एक दूसरे देश के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे होते हैं,दोनों देशों के निकट होने का एहसास दुनियां को करा रहे होते हैं।मित्र होने व खास होने का एहसास करा रहे होते हैं।
पीएम मोदी की विदेश नीति में गले लगना एक ऐसा हिस्सा है,जिससे वह दुनिया के जितने देश गए हैं, वहां उन्होंने अच्छे संबंध बनाए हैं और देश हित में जितने संबंध जरूरी होते हैं, वह भी बनाए हैं।उनके लिए व्यक्तिगत संबंध से ज्यादा देशहित हर जगह मायने रखता है।विदेश नीति में उनके लिए नेशन फर्स्ट हमेेशा रहा है।यही वजह है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि पीएम मोदी टफ निगोशियेटर है।चाहे अमरीका हो चाहे अफ्रीका को छोटा सा देश हो,पीएम मोदी उनको अपने व्यवहार से यह यकीन दिलानें में सफल रहते हैं कि उनके जो संबंध है, उससे दोनों देशों को फायदा होगा।यही वजह है कि उनको विश्व ३० से ज्यादा देशों ने अपना सबसे बड़ा सम्मान दिया है।ऐसा सम्मान कोई देश उस आदमी को ही देता है जिस पर भरोसा होता है कि यह आदमी हमारे भले के लिए काम करेगा।यह आदमी दुनिया के भले के लिए काम करता है।पीएम मोदी के अच्छे व्यवहार, अच्छे संबंध,विश्व शांति की भावना,पूरे विश्व को परिवार समझने की भावना के कारण ही दुनिया के किसी भी देश के पीएम से ज्यादा सम्मान मिले हैं। इससे देश के कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं का खीझना स्वाभाविक है क्योंकि उनको देश के किसी सम्मान के लायक नहीं समझा जाता है और पीएम मोदी को दुनिया के देशों से आए दिन सबसे बड़ा सम्मान मिलता रहता है।
चाहे देश हो या विदेश हो पीएम मोदी का राजनीतिक कद देश के तमाम नेताओं सहित विश्व के कई बड़े नेताओं से भी ऊंचा है।जब भी विश्व के नेताओं की रेटिंग सामने आती है तो साफ हो जाता है कि पीएम मोदी व विश्व के तमाम बड़े नेताओं के बीच बहुत अंतर है। इससे भी देश के  विपक्ष के नेताओं में खीझ पैदा होती है कि उनकी गिनती देश के बड़े नेताओं में नहीं होती है। देश में उन्हें राष्ट्रीय नेता तक नहीं माना जाता है और पीएम मोदी वैश्विक नेता माने जाते हैं।वह राष्ट्रीय नेता नहीं बन पाते हैं, अपना कद ऊंचा नहीं कर पाते हैं तो वह पीएम मोदी के कद को उनकी आलोचना करके, उनके व्यवहार का मजाक बनाकर कम करने की कोशिश करते हैं इससे मोदी का कद तो कम नहीं होता है लेकिन देश के लोगों को पता चल जाता है कि विपक्ष के नेता पीएम मोदी के क्याें जलते हैं।
हाल ही में राहुल गांंधी ने रचनात्मक कांग्रेस के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी व अमित शाह का खूब मजाक उड़ाया, इससे वहां मौजूद लोगों ने तालियां तो बजाई लेकिन पूरे देश मे राहुल गांधी व संदीप दीक्षित की कटु आलोचना भी हुई है कि माना गया कि इतने बडे राजनीतिक परिवार के होनेे के बाद दोनों में अच्छे संस्कार नहीं है, उनकी भाषा,उनके हावभाव अश्लील माने गए। उन्होंने जो कुछ किया उसे महिलाओं का अपमान समझा गया। राहुल गांधी को कोई समझाता नहीं है कोई बताता नहीं है कि वह बड़े परिवार के सदस्य है, उनके पुरखों का देश में बड़ा सम्मान है,परिवार की भाषा,व्यवहार गरिमापूर्ण रहा है,नेहरु परिवार के राहुल गांधी जब पीएम मोदी के विदेश नीति की गले मिलने को लेकर हंसी उड़ाते हैं तो वह भूल जाते हैं कि कांग्रेस के पीएम भी इसी तरह विदेश जाने पर या विदेशी मेहमानों के आने पर गले मिलते थे. यह परंपरा है,इसका मजाक उड़ाने का मतलब तो हुआ कि राहुल गांधी ने कांग्रेस के पीएम का भी मजाक उड़ाया है।
राहुल गांधी को कुछ भी करना चाहिए, कहना चाहिए तो बहुत समझकर करना चाहिए क्योंकि एक तो वह नेहरू खानदान से आते है,उनके नाम में गांधी लगा है,वह देश के नेताप्रतिपक्ष है, वह किसी साधारण परिवार के नेता नहीं है कि देश के पीएम का अपमान करने पर उनकी आलोचना नहीं होगी, उनकी आलोचना तो इसी बात को लेकर होगी कि उनके आचार,व्यवहार में वह गरिमा नहीं है, मर्यादा नहीं है जो नेहरू परिवार का होने के कारण अनिवार्य रूप से होनी चाहिए. राहुल गांंधी को याद न हो लेकिन देश के लोगों को याद है कि राहुल गांधी ने संसद मे आंख मारी थी और जबरन पीएम मोदी के पास जाकर गले लगे थे। ऐसे गले लगने को गले पड़ना कहते हैं। क्योंकि सामने वाला आप के गले नहीं लगना चाहता है और आप गले लगा लेते हैं।पीएम मोदी ऐसा कभी नहीं करते हैं, वह कर ही नही सकते क्योंकि उनको मालूम है कि वह भारत के पीएम हैं और उस पद की गरिमा है,वह उस पद की गरिमा को बढ़ाने का काम करते हैं। 



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