हमारे देश व राज्यों में बलिदानियों की स्मृति को हमेशा बनाए रखने के लिए चौक-चौराहे उनके नाम से रखे जाते हैं,उनकी मूर्ति स्थापित की जाती है,उनकी पुण्यतिथि व जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन कर उनके देश के लिए किए गए योगदान को याद किया जाता है।यह हमारी परंपरा है कि हमारे लिए किसी ने भी किसी तरह का बलिदान किया है तो उसके बलिदान को याद किया जाता है, नमन किया जाता है। ताकि हमारे बाद की आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को जाने और कृतज्ञ रहे इसके लिए स्मारक बनाए जाते हैं, प्रतिमा स्थापित की जाती है।यह एक तरह से राज्य व देश की स्मृति में उनको बनाए रखने का प्रयास होता है।कोई भी मुश्किल काम होता है तो उस काम को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को बलिदान देना पड़ता है,जब काम पूरा हो जाता है तो हर उस आदमी को याद किया जाता है जिसने उस काम को पूरा करने के लिए बलिदान दिया होता है।
बस्तर में शांति,सुरक्षा व विकास दो तीन दशक पहले तक सपना था क्योंकि यहां पर नक्सलियों का सामानांतर साम्राज्य था, जहां उनका शासन चलता था,उस क्षेत्र में उऩका आंतक रहता था,उनके खिलाफ किसी को बोलने की हिम्मत नहीं होती थी।विरोध करने वालों काे मार दिया जाता था।कोई सोचता नहीं था कि कभी बस्तर में शांति,सुरक्षा व विकास का दौर आएगा।राज्य में साय सरकार आने के बाद नक्सलियों का सफाया कर बस्तर में शांति,सुरक्षा व विकास के दौर के सपने को पूरा करने का फैसला किया गया। तारीख तय की गई कि इस तारीख तक बस्तर से नक्सलियों का सफाया कर दिया जाएगा और एक साल के भीतर नक्सलियों का सफाया कर दिया गया।इस दौरान बस्तर में शांति,सुरक्षा व विकास के लिए बड़ी संख्या में आम लोगों,सुरक्षा बल के जवानों ने बलिदान दिया।अब जब बस्तर में शांति हो गई है तो अब वक्त आया है कि बस्तर की शांति,सुरक्षा व विकास के लिए जिन लोगों ने बलिदान दिया है, उनकी याद के हमेशा के लिए बनाए रखने चौक चौराहे उनके नाम पर रखने व १०९ स्मारक बनाने का फैसला साय सरकार ने किया है तो इस फैसले का सभी स्वागत करेंगे।१५ अगस्त को सीएम साय बस्तर संभाग के ५०० से अधिक स्कूलों,चौराहों और सामुदायिक भवनों के नामकरण अमर बलिदानियों के नाम पर करने की घोषणा करेंगे।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बस्तर में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा बलिदानी स्थलों से होकर गुजरेगी तो वहां से मिट्टी एकत्र किया जाएगा और उस मिट्टी का उपयोग राजधानी रायपुर में बनने वाले शहीद स्मारक व संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा।यही नहीं माओवादी हिंसा में प्राण न्याैछावर करने वाले जवानों व आम नागरिकों की याद में राज्य में १०९ स्मारक बनाए जाएंगे,खास बात यह होगी कि इस डिजिटल युग में हर स्मारक पर एक क्यूआर कोड़ होगा और उसे स्कैन करने पर आम लोगों को शहीदों का शौर्यगाथा व घटना की पूरी जानकारी मिल जाएगी।यह तो अच्छी बात है कि बस्तर की शांति,सुरक्षा व विकास के लिए बलिदान देने वालों के लिए साय सरकार चौक चौराहों के नाम बलिदानियों के नाम पर रखने जा रही है,स्मारक बनानेे जा रही है।ऐसे वक्त में इस बात खास ख्याल रखा जाना चाहिए कि ऐसे चौक-चौराहों व स्मारकों की देखरेख में खर्च होने वाला पैसा कौन देगा।उसके लिए पहले से फंड की व्यवस्था की जानी चाहिए क्योंकि उत्साह में तो एक सरकार चौक चौराहों के नाम बलिदानियों के नाम पर रख देती, स्मारक बनवा देती है लेकिन उसके बाद साल भर कोई उनकी तरफ ध्यान नहीं देता है,प्रतिमाएं धुल सनी रहती है,चौक चौराहों का बुरा हाल रहता है।
प्रदेश के कई चौक चौराहों पर महापुरुषों की प्रतिमाएं लगीं है किसी की भी सरकार हो,उनके रखरखाव की और कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता है। बड़ी मुश्किल से साल मे एक या दो बार ही उनकी धुलाई पोछाई होती है।साय सरकार बहुत जगह स्मारक बनवाने जा रही है तो उसे पहले से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बस्तर में शांति,सुरक्षा व विकास के लिए जिन लोगों ने बलिदान दिया है,उनकी पूछपरख तक बाद में न हो और उऩका हाल भी दूसरे स्मारकों,चौक चौराहों की तरह हो जाए। कांग्रेस ने बस्तर में झीरम घाटी के शहीदों का स्मारक बनवाया क्या हुआ,कांग्रेस ही अब उस स्मारक की ठीक से देखभाल नहीं कर पाती है।बाद में कोई दूसरी सरकार आ जाए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि शहीद स्मारकों की देखभाल में कोई कमी न हो। क्योंकि एक सरकार जाती है तो दूसरी सरकार में उसके बनाए स्मारकों की देखरेख बंद हो जाती है यह सोचकर कि इसे हमने तो नहीं बनवाया था।शहीद व बलिदानी किसी राजनीतिक दल के नहीं होते लेकिन अफसोस होता जब हर राजनीतिक के अलग अलग महापुरुष होते हैं और जिस राजनीतिक दल की सरकार होती है वह अपने महापुरुष की जन्मदिन व पुण्यतिथि जोर शोर से मनाती है। कई बार ऐसा भी होता है कि एक राजनीतिक दल के लिए कोई महापुरुष होता है तो वह दूसरे दल के लोगों के लिए महापुरुष नहीं होता है।देश के महापुुरुषों की कदर सभी राजनीतिक दलों के लोगों का करनी चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है।
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