विपक्ष को मोदी याद दिला रहे हैं उसका काम

Posted On:- 2026-11-01




सुनील दास


लोकतंत्र में पक्ष व विपक्ष दोनों को जनता चुनाव में जनादेश देती है।जनता सत्ता जिसको सौंपती है,उसे देशहित व जनहित में काम करने का दायित्व सौंपती है तथा विपक्ष को वह सत्तारूढ़ दल जनहित व देशहित में ठीक से काम कर रहा है या नहीं यह देखने का काम सौंपती है। जब सत्तारूढ़ दल अपना काम ठीक से करता है तो जनता उसे दूसरी बार व तीसरी बार सत्ता भरोसे के साथ सौंपती है कि वह दो बार अच्छा काम करके दिखाया है तो तीसरी बार भी इसी उम्मीद में सत्ता सौंपती है कि वह दो बार अच्छा काम करी है तो तीसरी बार भी अच्छा काम करेगी। वहीं विपक्ष अपना काम दूसरी बार अच्छे से नहीं करता है तो उसे फिर वही काम सौंप दिया गया है कि वह अपना काम तो अच्छे से करके दिखाए।साथ ही यह संदेश भी जनता ने दे दिया है कि अगर विपक्ष अपना काम ठीक से नहीं करता है तो उसे अगली बार भी फिर वही काम अच्छे से करने के लिए सौंपा जाएगा। लोकंतत्र में विपक्ष को काम होता है सरकार का बताना होता है कि आप की यह नीति जनता व देश के लिए ठीक नहीं है।उसका काम होता है सरकारी नीतियों की खामी बताना।
यह काम वह ठीक से नहीं करता है तो जनता उसे सत्ता के लायक नहीं समझती है और उसे फिर से मौका देती है कि वह अपना काम ठीक से करके दिखाए। देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि विपक्ष से ठीक से काम नहीं कर रहा है तो जनता  बार बार विपक्ष में बिठाकर संदेश दे रही है कि आप को सत्ता तब ही सौंपी जाएगी जब आप विपक्ष का काम ठीक से करोगे।यह भी पहली बार हुआ है कि सत्तारूढ़ दल के मुखिया पीएम मोदी को भी कहना पड़ रहा है कि विपक्ष अपना काम ठीक से नहीं कर रहा है।वह अपना काम छोड़कर ऐसा काम कर रहा है जिससे देश को नुकसान हो रहा है।विपक्ष का काम सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना है लेकिन जब सरकार की गलत नीतियों की जगह देश के विकास का अवरोध करता है तो इससे देश को नुकसान होता है,विकास प्रभावित होता है।
देश का विपक्ष विरोध की जगह अवरोध की राजनीति कर रहा है,इसलिए पीएम मोदी को जनता को बताना पड़ रहा है कि आपने जिसे विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, वह अपना काम ठीक से नहीं कर रहा है।वह विरोध की जगह अवरोध की राजनीति कर रहा है।वह यह भी बता रहे हैं कि अवरोध की राजनीति तो देश के कई राज्यों में नक्सली करते रहे हैं और उससे छत्तीसगढ़ सहित कई राज्य विकास के मामले में पिछड गए थे। माना गया था कि जब तक राज्यों से नक्सलियों का सफाया नही हो जाता राज्यों को तेजी से विकास नहीं हो सकता।जनता व पुलिस,सुरक्षा बलों के सहयोग से नक्सलियों का सफाया हो गया है लेकिन अब शहरों में रहने वाले दिमागी नक्सली वही अवरोध की राजनीति कर रहे हैं और राज्य व देश के विकास को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।वह आए दिन देश की राजधानी में ऐसे आयोजन करते हैं जिससे देश का विकास,व्यापार प्रभावित होता है।पीएम मोदी लोगों को आगाह कर रहे है कि दिमागी नक्सली व  देशविरोधी ताकतें भारत के विभाजन की साजिश रच रही हैं,वह आपस मे लोगों को लड़ाकर देश में अराजकता फैलाना चाहती हैं,देश के लोगों को इससे सतर्क रहते हुए इनसे निपटना होगा।देश से माओवादियों का अंत तो हो गया लेकिन दिमागी नक्सली का खतरा टला नहीं है।देश की जनता को इनसे सतर्क रहना होगा,इनसे मुकाबला करना होगा।
नक्सलियों की क्या पहचान थी, नक्सली संविधान को नहीं मानते थे,अदालत को नहीं मानते थे, वह सरकार को नहीं मानते थे,वह जहां भी रहते थे तो अपना कानून चलाते थे, अपनी अदालत लगाते थे, खुद की जज बनकर आम लोगों को सजा देते थे।लोकतंत्र में तो दो ही अदालत होती है, एक जनता की अदालत और एक न्याय की अदालत।जिनका लोकतंत्र में भरोसा होता है, वह चुनाव जरिए जनता की अदालत में जाता है और जनता जो फैसला देती है उसे मानता है,यदि देश में कुछ संविधान के अनुरूप नहीं होता है तो वह अदालत जाता है और अदालत के फैसले के इंतजार करता है।जो लोकतंत्र में यकीन नहीं करते हैं वह अदालत के फैसले का इंतजार नहीं करते हैं और खुद ही माक पार्लियामेंट का आयोजन देश की राजधानी में एक घर में कर फैसला सुनाते हैं कि सीईसी दोषी है।२४ का चुनाव अवैध है।
कांग्रेस व विपक्षी गठबंधन का माक पार्लियामेंट के आयोजन की तुलना तो नक्सलियों के जनअदालत से की जा सकती है जिसमें नक्सली जिसको खुद ही किसी को दोषी मान लेते हैं,उसके लिए नाम को जनअदालत का आयोजन करते थे,उसमें ग्रामीणों को बुलाते थे और वह जिसे दोषी मानते थे,उसे कुछ कहने का मौका दिए बगैर सजा सुना देते है और वह सजा मौत की होती थी।नक्सलियों की जनअदालत ग्रामीणों में आंतक पैदा करने वाली होती थी ताकि उनके खिलाफ कोई कुछ न करे। उनके आतंक के साए में डरकर रहे और वह जो कहते है,करते हैं, उसी ही जनता सही माने।कांग्रेस व विपक्षी गठबंधन की मानसिकता भी यही हो गई है कि वह चाहते हैं कि वह जो कुछ कह रहे हैं,उसे जनता ठीक माने, वह जो कुछ कर रहे है,उसे जनता सही माने।भले ही संविधान व संसद की गरिमा के प्रतिकूल ही क्यों न हो।देश की जनता विवेकवान है, वह हर चुनाव में अपने विवेक से फैसला देती है। पीएम मोदी ने जनता का आगाह किया है तो चुनाव में फिर एक बार जनता कांग्रेस व गठबंधन के आचार विचार पर अपना जरूर देगी।



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