छत्तीसगढ़ में धान की खेती सबसे ज्यादा होती है,धान से ही किसानों को सबसे ज्यादा आय होती है। राज्य के चुनाव में जीत के लिए किसानों को अहम माना जाता है,इसलिए चाहे सत्तारूढ़ दल हो या विपक्ष दोनों को किसानों की चिंता ज्यादा रहती है। वह अपने आचार विचार से बताते.जताते रहते हैं कि वह किसानों के लिए कितने चिंतित हैं।हर साल नवंबर में धान खरीदी होती है और हर साल धान खरीदी की घोषणा होते ही विपक्ष की राजनीति शुरू हो जाती है।कैबिनेट की बैठक के बाद सीएम साय ने घोषणा की है कि इस साल १५ नवंबर से ३१०० रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी की जाएगी।प्रति एकड़ अधिकतम २१ क्विंटल की सीमा तय की गई है।यह भी कहा गया है कि कृषक उन्नति योजना के तहत धान के बदले अन्य फसल लेने पर आदान सहायता अब प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ १५ हजार रुपए दी जाएगी। इस साल २७.५० लाख किसानो से धान खरीदा जाएगा।
धान खरीदी की घोषणा के साथ ही यह भी बताया गया है कि धान खरीदी को सुगम व पारदर्शी बनाने के लिए पिछले साल पंजीकृत व एग्रीस्टेक आईडी वाले सभी किसानों का पंजीयन मान्य होगा,उन्हें दोबारा पंजीयन कराने या समिति में ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता नहीं होगी।धान खरीदी बायोमेट्रिक प्रणाली से होगी।३६० नए केंद्र खुलने के बाद धान खरीदी केंद्रों की कुल संख्या ३१०० हो जाएगी।हर साल सरकार धान खरीदी के दौरान किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए व्यवस्था करती है।लेकिन हर बार प्रशासनिक लापरवाही के कारण कहीं न कहीं किसानों को दिक्कत तो होती ही है।धान खरीदी के लिए हर साल मांग की जाती है कि नए धान खरीदी केंद्र खोले जाएं ताकि किसानों को धान बेचने के लिए दूर न जाना पड़े और किसी तरह की दिक्कत न हो। इसलिए इस साल सरकार ने ३६० नए केंद्र खोलने का फैसला किया है तो इसे किसानों के हित में लिया गया फैसला माना जा सकता है।
भाजपा ने पिछला चुनाव किसानों के हित का वादा करके जीता और कांग्रेस से सत्ता छीनी थी।यानी चुनाव में भाजपा ने जो वादा किया उस पर किसानों ने भरोसा किया और भाजपा को चुनाव जिताया और कांग्रेस पर भरोसा न करके संदेश दिया कि वह भले कहती रहे कि किसान हितैषी है लेकिन किसान ऐसा नहीं मानते हैं।जो सत्ता में रहता है वह किसान हितैषी है, इसका प्रमाण से हर साल किसानों के हित में कुछ न कुछ फैसला करके देना पड़ता है। सरकार जब भी ऐसा करती है तो कांग्रेस नेता उसे किसानों के हितों को विरोध बताने का प्रयास करते हैं, यह बताने का प्रयास करते हैं कि किसानों को जितना पैसा धान का मिलना चाहिए सरकार नहीं दे रही है।धान खरीदी की घोषणा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष का बयान आया है कि धान खरीदी में प्रति क्विंटल की जगह प्रति एकड़ के हिसाब से सहायता देने का साय कैबिनेट का फैसला किसानों के साथ धोखा है।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि किसानों को ३१०० रुपए की बजाय ३३५८ रुपए प्रति क्विंटल एकमुश्त भुगतान किया जाना चाहिए।
दीपक बैज का कहना है कि धान का समर्थन मूल्य हर साल बढ़ने का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।उनका कहना है कि २०२३-२४ में धान पर ९१७ रुपए प्रति क्विंटल आदान सहायता मिलती थी,२४-२५ मे ८०० रुपए मिली,२५-२६ में ७३१ रुपए मिली और २६-२७ में घटकर यह ६५९ रुपए रह गई है।तीन साल कुल २५८ रुपए प्रति क्विंटल कमी हुई है।कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भूल गए हैं कि जब भूपेश सरकार ने २५०० रुपए क्विंटल धान खरीदने का फैसला किया था तो तब हर साल धान का समर्थन मूल्य बढ़ता था लेकिन भूपेश सरकार २५०० में बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य जोड़कर पैसा नहीं देती थी, इस हिसाब से तो पिछली सरकार जैसा करती थी,वैसा ही साय सरकार भी कर रही है और कह रही है कि ३१०० प्रति कि्वंटल धान खरीदने का वादा था वैसा किया जा रहा है।
साय सरकार ने किसानो से जो कहा वैसा किया भी है।कांग्रेस भले ही यह कहती रहे कि साय सरकार किसानों को धान का कम पैसा दे रही है लेकिन किसान जानते हैं कि भूपेश सरकार के समय उनको जितना मिलता था आज उससे ज्यादा मिल रहा है और एकमुश्त मिल रहा है।केंद्र का समर्थन मूल्य २३६९ रुपए है,राज्य सरकार ३१०० रुपए में खऱीदती है तो अंतर की राशि होती है ७३१ रुपए प्रति क्विंटल।साय सरकार प्रति एकड़ २१ क्विंटल खरीदती है तो प्रति एकड़ १५३५१ रुपए होता है।साय सरकार ने अभी यही तो घोषणा की है कि किसानों को क्विंटल की जगह प्रति एक़ड़ भुगतान किया जाएगा। पुरानी व्यवस्था के हिसाब से देखा जाए तो पहले प्रति एकड़ १४ क्विंटल धान खरीदा जाता तो आज के हिसाब से १०२३४ रुपए मिलते जबकि नई व्यवस्था के हिसाब से १५३५१ रुपए मिल रहे हैं।सरकार ने किसानों से कहा है कि यदि वह धान की जगह अन्य फसल लेते हैं तो उनके प्रति एकड़ आदान सहायता १५००० रुपए दी जाएगी यह भी किसानो के लिए फायदे की ही बात है।धान का भी १५हजार रुपए मिलता है और अन्य फसल का भी १५ हजार मिलेगा।
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