डीके शिवकुमार ने स्वीकारा हम चुनाव में हारें हैं.....

Posted On:- 2026-10-28




सुनील दास


लोग कहते हैं कि झूठ की पोल एक दिन जरूर खुलती है।सच सामने आ जाता है। सच को सामने आने में कुछ वक्त लगता है लेकिन जब भी सामने आता है तो देश के लोगों पता चल जाता है कि सच कौन कह रहा था और झूठ कौन कह रहा था।झूठ हमेशा झूठ होता है, चाहे उसे कहने वाला कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो,सच हमेशा सच होता है और एक दिन वह सामने जरूर आता है।कर्नाटक एमएलसी चुनाव का रिजल्ट आने के बाद और कांग्रेस के एक सीट तक नहीं जीतने से राहुल गांधी व कांग्रेस के इस झूठ की पोल खुल गई है कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी कर चुनाव जीत जाती है,देश में अगर मतपत्र से चुनाव कराए जाएं तो कांग्रेस जीतेगी और भाजपा हार जाएगी।कर्नाटक में एमएलसी की चार सीटों के लिए चुनाव हुए तो उसमें एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीत पाई।कांग्रेस के पास एक सीट जो थी,वह भी कांग्रेस हार गई है।कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और यहां कांग्रेस के हारने मतलब साफ है कि जनता,युवा,शिक्षक कोई कांग्रेस के साथ नहीं है। कोई कांग्रेस पर भरोसा नहीं करता है। 
चुनाव में हार जीत तो होती रहती है,अच्छा नेता तो वही माना जाता है तो हार को स्वीकार करता है।मान लेता है कि हमारे में कोई कमी थी इसलिए हम चुनाव हार गए। इस कसौटी पर कर्नाटक की सीएम शिवकुमार कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी से बेहतर नेता लगते हैं क्योंकि वह कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा-जेडीएस गठबंधन (NDA) ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सभी चार सीटों पर 4-0 से जीत दर्ज के बाद कहते हैं कि पार्टी जनादेश को स्वीकार करती है और अपनी कमियों की गहन समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाएगी।पार्टी को एक या दो सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन नतीजे इन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। उन्होंने कहा कि पार्टी मतदाताओं के संदेश का बारीकी से आकलन करेगी और अपनी कमियों को दूर करने के लिए काम करेगी।
NDA ने 19 जिलों में फैले दो ग्रेजुएट्स और दो टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों की सभी चार सीटें जीत लीं। इससे प्रमुख क्षेत्रीय इलाकों में सत्ताधारी कांग्रेस प्रशासन को एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका लगा है।क्योंकि  19 जिलों में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के गृह जिले भी शामिल हैं।माना जाता है कि राज्य में जिस पार्टी की सरकार होती है,वहां राज्य के कोई भी चुनाव हो तो उसमें जिस दल की सरकार होती है, वही दल जीतता है।विधानपरिषद के चुनाव में ऐसा होता तो माना जाता कि जनता कांग्रेस के साथ है।कांग्रेस जीतती तो यह भी माना जाता कि मतपत्र से चुनाव होने के कारण भी कांग्रेस चुनाव जीती।बीजेपी और जेडी(S) के गठबंधन, NDA ने कर्नाटक विधान परिषद के चुनावों में सभी चार सीटों (4-0) पर जीत हासिल की। ​​ये चुनाव दो शिक्षकों और दो स्नातकों की सीटों के लिए हुए थे। इन सीटों पर जीत से बीजेपी-जेडी(S) गठबंधन को एक मजबूत संदेश मिलता है: शिक्षित पेशेवरों, शिक्षकों और युवा स्नातकों का समर्थन, सत्ताधारी डी.के. शिवकुमार सरकार के बजाय एनडीए के साथ है।
कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में NDA की जीत के बाद भाजपा को कांग्रेस व राहुल गांधी के खिलाफ बोलने का मौका मिल गया है। भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस शून्य पर रही, जिससे EVM और वोट चोरी के आरोप गलत साबित होते हैं।क्योंकि कांग्रेस उन चुनावों में भी जनता का समर्थन हासिल करने में विफल रही, जो मतपत्रों और मतपेटियों के जरिए कराए गए थे। उन्होंने MLC चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को शून्य बताया और वोट चोरी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये कांग्रेस के खराब चुनावी प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिशें हैं।उन्होंंने कहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक झूठ को इतना बड़ा मुद्दा बना दिया, जबकि वे इसे नज़रअंदाज़ कर सकते थे। MLC चुनावों के नतीजों से उनके झूठ की पोल खुल गई है। भारत के कई राज्यों में हुई विधान परिषद (MLC) चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन शून्य रहा है। भले ही उन्हें यह अच्छा न लगे, लेकिन सच यही है कि वे शून्य पर हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन चुनावों में बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल होने से, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर कांग्रेस की शिकायतों का कोई आधार नहीं रह जाता।
त्रिवेदी ने कहा कि ये चुनाव बैलेट बॉक्स और बैलेट पेपर के ज़रिए कराए गए थे। फिर भी, कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में नाकाम रही। इससे साफ हो जाता है कि कांग्रेस और राहुल गांधी में जनता या मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की क्षमता नहीं है—चाहे चुनाव EVM से हों या बैलेट पेपर से। कड़वी सच्चाई अब.यह है कि कांग्रेस को बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग नहीं करनी चाहिए क्योंकि पिछले कुछ महीनों में कई राज्यों में अलग संस्थाओं के चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए हैं और कांग्रेस अपने दावों के मुताबिक जीती नहीं है,हारी है। इससे साफ हो जाता है कि राहुल गांधी जो वोट चोरी का आरोप भी लगाते हैं वह भी इसी तरह की बात है। राहुल गांधी व कांग्रेस नेता हार को स्वीकार करते तो जनता में अच्छा मैसेज जाता जैसे कर्नाटक के सीएम शिवकुमार ने खुले मन से स्वीकार किया है कि हार का कारण चुनाव में गडबड़ी नहीं है,हार का कारण हमारी कमजोरी है।इससे वह अपनी कमजोरी को दूर कर चुनाव जीत सकते हैं लेकिन जो मानता नहीं है कि वह अपनी कमजोरी के कारण चुनाव हारा है, वह अपनी कमजोरी को दूर नही कर सकता और हर चुनाव हारता है जैसे राहुल गांधी हार स्वीकार नहीं करते हैं और हारते जाते हैं। 



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