लोकतंत्र में सबको अधिकार मिले हुए हैं,राजनीति करने वालों को मार्च करने,रैली निकालने,धरना देने,प्रदर्शन करने और आंदोलन करने का अधिकार है तो पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है।संविधान में किसी को मार्च निकालने,रैली निकालने,प्रदर्शऩ करने के नाम पर कानून व्यवस्था भंग करने का अधिकार नहीं दिया गया है।किसी भी राजनीतिक दल को किसी क्षेत्र में मार्च निकालना है तो उसे इसके लिए पुलिस से अनुमति लेने होगी। जो भी संविधान को मानता है,वह तो वह सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने वाले किसी भी आयोजन के लिए पुलिस से अनुमति लेना जरूरी समझेगा। हमारे देश के नेता प्रतिपक्ष,सासंद जब ऐसा नहीं करते है तो इससे उनकी ही छवि ही धूमिल होती है, उनकी ही आचार विचार को लेकर सवाल उठता है कि संसद में कानून बनाने वाले ही कानून का पालन नहीं करेंगे तो जनता में अच्छा संदेश नहीं जाता है।ऐसे में जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसे में जो लोग संविधान हाथ में लेकर घूमते है,क्या वाकई में संविधान के रक्षक हैं, क्योंकि हाथ में संविधान लेकर घूमने वाले नेता ही जब मार्च निकालने से पहले पुलिस से अनुमति लेना जरूरी नहीं समझते हैं तो इससे उनकी पोल खुल जाती है कि वह भले ही संविधान हाथ में लेकर घूमते हों लेकिन मन में संविधान देश के कायदे कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है।
वह आए दिन कभी भी कुछ भी करते हैं और यह मानते भी नहीं है कि उन्होंने कुछ गलत किया है,वह तो समझते हैं कि वह जो करते हैं,वह उनका अधिकार है, वह जो कुछ करते हैं सही करते हैं।उनके लिए पीएम आवास के पास धरना देना सही काम है, उनके लिए आकाशवाणी भवन के भीतर घुसकर धरना देना सही काम है।उनको बिलकुल अफसोस नहीं होता है कि उन्होंने कुछ गलत किया है,वह कुछ गलत हो जाए तो उसके लिए माफी भी नहीं मांगते हैं।इसके बाद भी खुद को जब वह संविधान व लोकतंत्र का रक्षक कहते हैं तो देश की जनता कैसे भरोसा कर सकती है कि ऐसे लोग संविधान के रक्षक हो सकते है,ऐसे लोग लोकतंत्र के रक्षक हो सकते हैं। लेकिन पुलिस को अपना काम करना पड़ता है,वह तो वाकई में संविधान की रक्षक है,लोकतंत्र की रक्षक है,कानून का उल्लंघन करने पर उसे तो कार्रवाई करनी ही पड़ती है,वह कार्रवाई नहीं करेगी तो उसकी आलोचना होगी कि उसने अपना कर्तव्य क्यों नही निभाया।यही वजह है कि आकाशवाणी भवन में जबरन घुसने का आरोप मेंम राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक इंडिया गठबंधन ने संसद भवन से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग का मुख्यालय) तक मार्च करने की योजना बनाई थी, कायदे से तो इसके लिए पहले पुलिस से अनुमति लेनी थी लेकिन इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मांगी गई थी और न ही दी गई थी।इसके बाद भी राहुल गांधी सहित इंडिया गठबंधऩ के सांसदों ने मंगलवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर जबरन घुसने और धरना दिया। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से परिसर खाली करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को ECI अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे।दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य प्रदर्शनकारियों को परिसर से हटाया गया और हिरासत में ले लिया गया।पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान 10 सांसदों सहित लगभग 260 लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए नेताओं को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन्स ले जाया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।
खबरों के मुताबिक बुधवार को इंडिया गठबंधऩ के सांसदों की बैठक के बाद फैसला किया गया है कि अब जंतरमंतर में सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना दिया जाएगा। यह काम तो मंगलवार को भी किया जा सकता था पुलिस से अनुमति लेकर।जंतर मंतर पर धऱना देने के पहले भी इंडिया गठबंधन के सांसदों के अनुमति जरूर लेनी चाहिए।इसी तरह सीईसी ज्ञानेश कुमार को मांगपत्र सौंपना हो या मिलना हो तो भी पहले अनुमति लेनी चाहिए।इस तरीके को तो कोई भी ठीक नहीं कह सकता कि कुछ लोग कहीं भी बिना अनुमति के धरना शुरू कर दें और कहें कि हम तब तक नही उठेंगे जब तक सीईसी हमसे मिलने नहीं आते।ऐसे में सीईसी तो मिलने आएंगे हीं नहीं, उल्टे ऐसा करने वालों की फजीहत होती है कि कैसे बड़े नेता बने फिरते हैं,कोई काम खुद ठीक से नहीं करते हैं और गलती करने पर पुलिस एफआईआर करती है तो कहते हैं कि मेरे खिलाफ जब एफआईआर की जाती है तो मुझे लगता है कि एक मेडल मिला है। मैं तो चाहता हू कि मेरे खिलाफ सौ एफआईआर दर्ज की जाए। कोई भी बड़ा नेता जब ऐसा कहता है तो इसका मतलब तो यह भी निकाला जा सकता है कि उसने एक गलत काम किया है तो एक एफआईआर दर्ज की गई है, इसके बाद वह सौ गलत काम करने का इरादा रखता है।
कोई भी बड़ा नेता जब कुछ कहता है और करता है तो उसे बहुत सोचसमझ कर कहना और करना चाहिए। क्योंकि इससे उसकी छवि बनती है।वह अच्छा कहता है,अच्छा करता है तो उसकी अच्छे नेता की छवि बनती है, वह अच्छा नहीं कहता है, अच्छा नहीं करता है तो उसकी बुरे नेता की छवि बनती है।अभी देश के बड़े नेताओं में जेनजी का नेता बनने की होड़ लगी हुई है।युवाओं का नेता बनने की होड़ लगी हुई है।एक संगठन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए आंदोलन करता है और उनका इस्तीफा हो जाता है,वह सफल आंदोलन करने वाला संगठन हो जाता है। इससे दूसरे संगठनों को लगता है कि उनको भी ऐसा सफल आंदोलन करना चाहिए यानी चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा कोई भी आरोप लगाकर मांगना चाहिए।आंदोलन सफल नहीं हुआ है,सफल बनाने के लिए आंदोलन किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से क्या शिक्षा परीक्षा व्यवस्था सुधर गई है, नहीं सुधऱी है,इसी तरह सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से भी चुनाव की व्यवस्था नहीं सुधरने वाली है,यह बात देश की जनता बखूबी समझ रही है, लेकिन बड़े नेताओं को यह बात समझ नही आ रही है।यही वजह है कि जनता विपक्ष के नेताओं के साथ नहीं है।सवाल उठता है कि यदि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद भी कांग्रेस व विपक्षी दल अगले साल होने वाला चुनाव हार जाते हैं तो फिर क्या करेंगे।
देश में लोकतंत्र है, देश में संविधान है, देश संविधान से चलता है। देश में कानून का राज है तो कोई भी नेता कितने भी बड़े परिवार का क्यों न हो, उसके घर...
देश में लोकतंत्र हैं,लोकतंत्र में बहुत सारे राजनीतिक दल होते हैं, जो चुनाव लड़ते हैं और चुनाव एक दल जीतता है और वही सरकार बनाता है। चुनाव के लिए हम...
देश में लोकतंत्र है,लोकतंत्र में सबको अपनी बात,अपनी राय रखने का अधिकार होता है,सब हर मामले पर अपनी अपनी राय रखते हैं और इससे तो यह पता चलता है कि ...
जिंदगी के सफर में बहुत सारे लोगों की जिंदगी मे एक न एक बार ऐसा मौका जरूर आता है कि उनको कुछ सेकंड में ही यह फैसला करना होता है कि मैं अपनी जान बचाऊ...
..लोकतंत्र में राजनीतिक व गैरराजनीतिक संगठनों को शांति से विरोध करने करने, मांग करने का अधिकार है।यह अधिकार तब दिया जाता है जब राजनीतिक व गैरराजनीत...