दवाब के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने सही निर्णय किया

Posted On:- 2026-10-06




सुनील दास

देश में लोकतंत्र हैं,लोकतंत्र में बहुत सारे राजनीतिक दल होते हैं, जो चुनाव लड़ते हैं और चुनाव एक दल जीतता है और वही सरकार बनाता है। चुनाव के लिए हमारे देश में चुनाव आयोग है,चुनाव वही कराता है।स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग का काम है।आजादी के बाद ईवीएम व आधुनिक संचार की सुविधा के कारण आज चुनाव कम समय मे पारदर्शी ढंग के कराया जा रहा है,उतना पारदर्शी आजादी के बाद के बरसों में नहीं होता था।जब चुनाव में सबसे ज्यादा गड़बड़ी हुआ करती थी,लोगों को वोट डालने नही दिया जाता था, बूथ लूट लिए जाते थे,राजनीतिक दलों के लोग खुद ही मतपत्र पर मुहर लगाकर मतपेटी में डाल दिया करते थे।यानी जितनी ज्यादा से ज्यादा गड़बड़ी चुनाव के दौरान की जा सकती थी,सत्तारूढ़ दल के लोग,मजबूत राजनीतिक दल के लोग,दबंग नेता के लोग करते थे.तब हारने वाले राजनीतिक दल इसके लिए चुनाव आयोग को दोषी नहीं ठहराते थे कि तब माना जाता था कि चुनाव वही जीतेगा जिसके पास पैसा,पावर है,गुंड़ों की फौज है।
आज जब सबसे अच्छा चुनाव हो रहा है, ज्यादा से ज्यादा लोग बिना डरे वोट डालते हैं,बूथ में कोई गड़बड़ी नहीं होती है,मतदान कम समय में हो जाता है,रिजल्ट उसी दिन आ जाता है तो जो भी चुनाव हारते हैं,वह हार के लिए अपने को दोषी नहीं मानते हैं, वह सीधे चुनाव आयोग को दोषी ठहरा देते हैं।जबकि हार जीत में चुनाव आयोग की कोई भूमिका नहीं होती है। चुनाव के बाद विवाद होता है चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर,मामला कोर्ट में जाता है।इस बार भी चुनाव के फैसलों का मामला कोर्ट गया है,सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं।एक याचिका में मांग की गई कि चुनाव आयोग ने कई फैसले आपसी सहमति से नहीं लिए गए है,चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अकेले लिए हैं।इसलिए ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दिया जाए।एसआईआर से जुड़े फैसले सामूहिक सहमति के बिना लिए गए इसलिए उन फैसलों को रद्द किया जाए।चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले तो चाहते थे वह मांग कर रहे हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को ज्ञानेश कुमार को पद से हटा देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पर दबाव डालने की कोशिश की गई,यहां तक कहा गया कि यदि ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाया गया तो देश में आग लग जाएगी।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से अपेक्षा की गई कि जिस तरह विपक्ष सहित बहुत सारे लोग एक अखबार की खबर को गंभीरता से ले रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट के जजोँ को भी गंभीरता से लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि उसकी खबरे आंशिक सही या पूरी सही हो सकती है लेकिन हम कोई फैसला प्रमाणित जानकारी के आधार पर लेंगे।प्रमाणित जानकारी मिलने पर ही अदालत चुनाव आयोग के किसी भी फैसले को रद्द कर सकती है।।सुनवाई के दौरान कोर्ट के यह कहने पर कि उसने वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए भऱे जाने वाले किसी संशोधित फार्म को मंजूरी नहीं दी है,रिकार्ड पेश करने पर देखा जाएगा कि इसे किसने बदला है। 
इस पर राहुल गांधी ने फिर से आरोप लगाकर यह बताने का प्रयास किया वह जो कह रहे हैं, वही सही है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फार्म 6 में बदलाव कर भाजपा की मदद की है।यह पद के दुरुपयोग का प्रमाण है।राहुल गांधी देश को बता रहे है कि फार्म 6 में बदलाव चुनाव आयोग ने किया है तो चुनाव आयोग की तरफ से साफ फिर एक बार साफ कर दिया गया है कि फार्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।24 जून 2025 को बिहार में एसआईआर का आदेश चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से दिया था,इसी में फार्म 6 के साथअतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया था।आयोग के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को सहमति दी थी।चुनाव आयोग ने तो कहा ही नहीं कि सुप्रीम कोर्ट ने फार्म 6 में बदलाव को मंजूरी दी थी। वह तो विपक्ष कह रहा है कि फार्म 6 में बदलाव की मंजूरी सुप्रीम कोर्ट ने दी है तो सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उसने ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने एसआईआर को लोगों को मतदान से वंचित करने का जरिया बता दिया।एसआईआर को चुनाव आयोग की मनमानी बता दिया। यह भी एक तरह से सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट पर दवाब बनाने का प्रयास था।शुक्र है कि सुप्रीम कोर्ट किसी के दवाब में नहीं आया और फैसला जिस तरह लिया जाना चाहिए, उसी तरह लिया और याचिकाकर्ताओं को साफ कह दिया कि चुनाव आयोग के पक्ष को सुने बिना कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।बात सही भी है क्योंकि चुनाव आयोग ने प्रेस वार्ता कर साफ कर दिया है कि उसने जो भी फैसले लिए हैं वह तीनों ने मिलकर लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनको नोटिस जारी किया है तो वह कोर्ट में सबूत पेश करेंगे कि तीनों ने मिलकर फैसले लिए है, इससे दूध का दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा। तब तक कम से कम विपक्ष के राजनीतिक दलों  धीरज रखना चाहिए।



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