दंतेवाड़ा (वीएनएस)। आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया छोटा-सा कदम भी भविष्य में बड़े बदलाव की नींव बन सकता है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण नकुलनार की स्वीटी राठौर हैं, जिन्होंने महतारी वंदन योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता को अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता के साथ जोड़कर स्वरोजगार की राह चुनी। उन्होंने बचत और व्यवसायिक जरूरतों के लिए इस राशि का उपयोग करते हुए नकुलनार में ट्राइबल कैफे की शुरुआत की, जो क्षेत्र में अपनी तरह की एक अनूठी पहल के रूप में पहचान बना रहा है।
1,000 की सहायता बनी आत्मनिर्भरता की शुरुआत
महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली 1,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता स्वीटी के लिए आर्थिक संबल बनी। उन्होंने इस राशि को केवल दैनिक खर्चों तक सीमित न रखकर भविष्य के लिए बचत करने का निर्णय लिया। धीरे-धीरे की गई इस बचत को उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआती पूंजी के रूप में उपयोग किया। स्वीटी के लिए यह राशि भले ही छोटी शुरुआत थी, लेकिन उनके संकल्प और निरंतर प्रयासों ने इसे आत्मनिर्भरता के अवसर में बदल दिया। आज उनका कैफे उनके हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास की पहचान बन रहा है। स्वीटी का ट्राइबल कैफे केवल चाय-नाश्ते की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, जनजातीय पहचान और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल है। कैफे की संकल्पना में स्थानीय परिवेश और जनजातीय जीवनशैली की झलक देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्र में आने वाले आगंतुकों के लिए भी यह कैफे आकर्षण का केंद्र बन रहा है। यहां स्थानीय स्वाद और पारंपरिक पहचान को आधुनिक कैफे की अवधारणा के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वीटी राठौर की कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक सहायता के साथ यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत जुड़ जाए, तो स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उनकी पहल अन्य महिलाओं और युवाओं को भी अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देने के लिए प्रेरित कर सकती है। उनका मानना है कि महिलाओं को अवसर और आर्थिक संबल मिलने पर वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा दे सकती हैं।
नकुलनार में ट्राइबल कैफे की शुरुआत स्वीटी के लिए केवल व्यवसाय शुरू करने का कदम नहीं, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और संस्कृति को नई पहचान देने का प्रयास भी है। उन्होंने यह साबित किया है कि सरकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता का सदुपयोग कर छोटे स्तर से भी उद्यमिता की शुरुआत की जा सकती है। योजना से सहायता, सहायता से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरताकृस्वीटी राठौर की कहानी इसी सोच को साकार करती है।
“महतारी वंदन योजना से मिलने वाली 1,000 की राशि ने मुझे अपने सपने को पूरा करने का हौसला दिया। मैंने इस राशि को बचाकर अपने व्यवसाय की शुरुआत की। आज मेरा ट्राइबल कैफे मेरे लिए केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि मेरी पहचान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। मैं चाहती हूं कि क्षेत्र की दूसरी महिलाएं भी आगे आएं और अपने हुनर को व्यवसाय का रूप दें।” स्वीटी राठौर की पहल महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और स्थानीय जनजातीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके सपने को आकार देने में सहयोग किया और उन्होंने अपनी मेहनत से उस अवसर को उद्यमिता में बदलने का प्रयास किया। स्वीटी की कहानी यह संदेश देती है कि सही अवसर, सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत से आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा जा सकता है।
सेवा संकल्प अभियान के समापन दिवस के अवसर पर जिले में आंगन मिलन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। परियोजना दंतेवाड़ा के 40 आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण ...
सेवा संकल्प अभियान के तहत विकासखंड कटेकल्याण के ग्राम बढ़ेगुड़रा में आयोजित शिविर में मत्स्य पालन विभाग द्वारा मत्स्य कृषकों को विभिन्न योजनाओं का ...
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 (एसआईआर) के पूर्ण होने के पश्चात छूटे हुए एवं पहली बार युवा मतद...
सेवा संकल्प अभियान के तहत जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामों में विशेष ग्राम सभा के अवसर पर “जल अर्पण दिवस” का आयोजन किया गया।
सेवा संकल्प अभियान के तहत श्रम विभाग द्वारा श्रमिक परिवारों के कल्याण एवं उनके बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित विभिन्न योजनाएं ...