देश में नीट पेपर लीक को लेकर बवाल थम नहीं रहा है। तमाम नेताओं,परिवारों, छात्रों, राजनीतिक दलों के बयान इस मामले में आ चुके हैं।सब यही तो चाहते हैं कि इसके लिए जो दोषी लोग हैं, उनको कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि फिर कोई इस तरह का अपराध करते हुए डरे।सब यही तो चाहते हैं कि देश नीट परीक्षा ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर जो भी प्रतियोगी परीक्षा होती है, जिसमें देश भर से लाखों युवा शामिल होते हैं,उसके पेपर लीक नहीं होने चाहिए। पीएम मोदी से भी इस मामले में कुछ कहने की उम्मीद की जा रही थी। पीेएम ने एऩडीए संसदीय दल की बैठक में दो टूक कह दिया है कि यह नीट पेपर लीक घोऱ पाप है।इस घोर पाप में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं ताकि कोई भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ न कर सके।भविष्य मे ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सभी राज्य सरकारों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र के साथ मिलकर काम करना चाहिए क्योंकि यह देश हित का मामला है।
पीएम मोदी ने सच कहा है कि नीट पेपर लीक मामले में तुरंत कार्रवाई की गई है।१३ लोगों की गिरफ्तारी हुई है।दोबारा परीक्षा कराकर परिणाम घोषित कर दिया गया है।जहां तो दोषी लोगों को सजा दिलाने की बात है तो यह तो सरकार का काम नहीं है। यह तो अदालत का काम है।नीट पेपर लीक मामले में दोषी लोगों को कैसे कड़ी सजा हो सकती है, देश के वरिष्ठ वकीलों को इसके लिए सामने आना चाहिए। जहां तक परीक्षा के लिए और बेहतर व्यवस्था बनाने का सवाल है तो यह देश की समस्या है इसका समाधान सड़क पर तो नहीं हो सकता,संसद में ही हो सकता है इसलिए इस पर संसद में बहस होनी चाहिए और सभी दलों को इसमें चर्चा कर सुझाव देना चाहिए कि नीट परीक्षा की ऐसी व्यवस्था कैसे बन सकती है कि कोई पेपर लीक न कर सके। राज्यों में जब पेपर लीक हुआ करते थे तो कांग्रेस शासित राज्यों के नेता यह कहते थे कि यह राज्य की समस्या नहीं है यह को केंद्र की समस्या है।देश की समस्या है तो इसका समाधान सभी राष्ट्रीय दलों के सरकार के साथ मिलकर ढूंढना होगा।
सरकार तो चाहती है कि नीट पेपर लीक मामले में संसद में सार्थक बहस हो ताकि इस समस्या का कोई समाधान तलाशा जा सके। विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित पेपर लीक मामले में आंदोलन कर रहे संगठन व राजनीतिक दल यही नहीं चाहते हैं वह संसद में चर्चा के लिए शर्त जोड़ देते हैं, आए दिन नई नई शर्त जोड़ देते हैं कि सरकार ऐसा करेगी तब ही हम संसद में नीट पेपर लीक मामले में चर्चा करेंगे।सब इस मामले होड़ कर रहे हैं कि इस मामले को कौन कितने जोर शोर से उठा सकता है।एक संगठन जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहा है, वांगचुक अस्पताल में अनशन कर रहे हैं।जंतर मंतर वालों की पहले एक ही मांग थी अब वह एक से ज्यादा हो गई है। वांगचुक की मांगें भी बदलती रही है,राहुल गांधी की मागें भी बदलती रही है। जब उन्होंने पीएम आवास के बाहर धऱना दिया तो उनकी मांग थी कि नीट पेपर लीक मामले मे संसद मे चर्चा होनी चाहिए।सरकार इस पर राजी हो गई तो उनकी मांग बढ़ गई उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होगा,पीएम छात्रों से माफी मांगेंगे तो ही संसद में वह चर्चा करेंगे।
राहुल गांधी सहित अलग संगठनों की मांगें ऐसी हैं कि सरकार उनको पूरा नहीं कर सकती। क्योंकि सभी मांगें जायज नहीं है क्योंकि इससे युवाओं का कोई हित नहीं होता है, परीक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी,यह तो राजनीति है,यह तो सरकार को झुकाने का प्रयास है और देश के युवाओं को संदेश देने का प्रयास है कि देखो जो जंतर मंतर में बैठे हैं वह सरकार को नहीं झुका सकते, सरकार को हम झुका सकते हैं, इसलिए युवाओं को हमपर भरोसा करना चाहिए।राहुल गांधी तो कहते रहे हैं यह कमजोर सरकार है,पीएम मोदी कमजोर पीएम है, वह चीन व अमरीका के सामने सरेंडर कर देते है।ऐसे भी मोदी सरकार राहुल गांधी के न मानने योग्य मांगों को मानकर राहुल गांधी की बातों को सच तो साबित नहीं कर सकती। राहुल गांधी भी जानते हैं कि वह जो मांग कर रहे हैं,वह मोदी सरकार मानने से रही।मोदी सरकार मानेगी नहीं और संसद में नीट पेपर लीक पर बहस नहीं होगी और इस मुद्दे पर देश में संसद के भीतर व बाहर बवाल होता रहेगा।
राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उनकी जिम्मेदारी विपक्ष को एकजुट करना और मजबूत करना है लेकिन नीट पेपर लीक मामले में वह कांग्रेस के राजनीतिक हित के लिए विपक्ष को भरोसे में लेकर काम नहीं कर रहे हैं।इससे उन पर आम आदमी पार्टी को आरोप लगाने का मौका मिल रहा है कि राहुल गांधी व कांग्रेस युवाओं का आंदोलन को कमजोर कर रहे हैं।नाराज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद में कह दिया कि कांग्रेस व सरकार के बीच समझौता हो गया है क्योंकि राहुल गांधी व कांग्रेस नेताओं ने पीएम आवास के पास धरना दिया तो इस बात की जानकारी अखिलेश को पहले नहीं दी गई, बाद में दी गई और वह देर से पहुंच थे धरनास्थल पर। अखिलेश यादव का मानना है कि नीट आंदोलन का श्रेय कांग्रेस अकेले लेना चाहती है, अकेले राहुल गांधी को देना चाहती है।वह कांग्रेस व सपा के बीच आपसी तालमेल ठीक नहीं होने से नाराज हैं। संसद में उनको बोलने का मौका जल्दी नहीं दिए जाने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई है। यह कांग्रेस ने पहली बार नहीं किया है,इससे पहले कांग्रेस ने तमिलनाडु मे अपने राजनीतिक फायदे के लिए द्रमुक को धोखा दिया है।अब आप व सपा को दिया है, यह बात विपक्ष को पसंद नहीं आ रही है और इसका नुकसान विपक्ष की एकजुटता को हो रहा है।
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