मोदी सरकार किसी के दबाव में कहां आती है

Posted On:- 2026-07-19




सुनील दास

राहुल गांधी कहते रहते हैं कि मोदी सरकार कमजोर सरकार है, पीएम मोदी कमजोर पीएम हैं, वह पूरे पांच साल पीएम नहीं रहने वाले हैं।राहुल गांधी के कहने व मानने से न तो मोदी सरकार कमजोर हुई है और न ही पीएम मोदी कहीं से कमजोर हुए हैं। राहुल गांधी व कांग्रेस न माने लेकिन देश के लोग मानते हैं कि पीएम मोदी किसी के दबाव में आकर कोई काम नहीं करते हैं।वह कोई भी फैसला किसी के दवाब में आकर नहीं करते हैं, कोई सोचता है कि वह दबाव डालकर पीएम मोदी से कोई फैसला करवा सकता है तो उसकी गलतफहमी देरसबेर पीएम मोदी दूर कर देते हैं कि इस बार काकरोच जनता पार्टी को यह वहम हो गया कि वह जंतर मंतर में धरना प्रदर्शन करेंगे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नीट पेपर लीक मामले में इस्तीफा मांगेगे तो कुछ दिनों में पीएम मोदी उनका इस्तीफा लें लेंगे। सीजेपी के आंदोलन को २० दिन से ज्यादा हो गया है और पीएम मोदी ने शिक्षामंत्री को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा है।

शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग कई दिनों तक करने के बाद भी जब मोदी सरकार ने शिक्षामंत्री को नहीं हटाया और लोगों की भीड़ भी जंतरमंतर में नही जुट रही थी तो सरकार पर दवाब बढ़ाने, लोगों की भीड़ जुटाने व विपक्ष को समर्थन के लिए मजबूर करने के लिए सोनम वांगचुक मिल गए अनशन करने के लिए। इससे सीजेपी वालों को आंदोलन के संजीवनी मिल गई। उनके आंदोलनस्थल पर अब लोगों की भीड़ बढ़ने लगी लोग वांगचुक के लिए आने लगे।वांगचुक के कारण आंदोलन को मीडिया में कवरेज भी मिलने लगा। सबसे ज्यादा फायदा तो वांगचुक को हुआ है,उनका तो अभिजीत,राहुल गांधी से ज्यादा प्रचार हुआ है।।आंदोलन व वांगचुक के अऩशन का समर्थन नहीं करने के कारण विपक्ष व कांग्रेस की आलोचना होने लगी तो आखिरी के कुछ दिन विपक्ष के बड़े नेता राहुल,अखिलेश,तेजस्वी,ममता आदि तो नहीं आए लेकिन उन्होंने अपने नेताओं को भेजा ताकि कोई यह न कह सके कि विपक्ष इस आंंदोलन व अनशन का समर्थन नहीं किया। यह तो एक तरह से समर्थन नहीं मजबूरी में किया गया समर्थन था।कांग्रेस ने पवन खेड़ा को भेजा। राहुल गांधी नहीं गए,अखिलेश ने अपनी पत्नी को भेजा खुद नहीं गए। क्योंकि उनको अंदेशा था कि यह आंदोलन तो विपक्ष को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

मोदी सरकार के लिए दोबारा नीट परीक्षा करना चुनौती थी,दोबारा उसने नीट परीक्षा करा दी है, उसका रिजल्ट भी आ गया है और फिर से भर्ती शुरू हो गई है। यानी मोदी सरकार के लिए तो नीट पेपर लीक का मुद्दा अब कोई मायने नहीं रखता है। उसके लिए तो यह अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है।सीजेपी के लिए यह मुद्दा अब प्रतिष्ठा का प्रश्न जरूर बन गया है क्योंकि उनकी तो एक ही मांग थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें।यह मांग तो पूरी हुई नहीं है और न ही भविष्य मेंं पूरी होने वाली है क्योंकि पीएम मोदी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी लेनेे वाले थे तो अब नहीं लेंगे क्योंकि अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने का मतलब होगा कि पीएम मोदी ने सीजेपी और कांग्रेस के दवाब में इस्तीफा लेने के मजूबर हुए हैं। अगर शिक्षामंत्री ने अपना काम ठीक से नहीं किया है तो जिस तरह पीएम मोदी ने दूसरे मंत्रियों को पद से हटाया था, उसी तरह धर्मेद्र प्रधान को अगले मंत्रिमंडल विस्तार में हटा देते लेकिन अब सीजेपी व विपक्ष की मांग यही है इसका मतलब है कि शिक्षा मंत्री को अभी तो नहीं हटाया जाएगा। यानी वह सुरक्षित है और उनका मंत्री पद सुरक्षित है और इसका श्रेय सीजेपी व कांग्रेस को है।

दिल्ली सरकार व मोदी सरकार चाहती तो अऩशन के कुछ दिन बाद जब कोर्ट ने जब यह कर दिया था कि हर जीवन कीमती है, उसे खतरे में नहीं डाला जा सकता। वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता के बहाने दिल्ली पुलिस व मोदी सरकार के पास मौका था कि उनको अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाता। दिल्ली पुलिस व मोदी सरकार ने उनको अनशन करने का मौका दिया। अपने तौर पर सम्मानजनक ढंग से अनशन समाप्त करने का मौका दिया।केजरीवाल जंतर मंतर आए थे, कहा जा रहा था कि राहुल गांधी जंतरमंतर आते हैं तो अनशन समाप्त कर दिया जाएगा लेकिन न तो केजरीवाल ने अनशन समाप्त कराया और न राहुल गांधी जंतरमंतर आए। दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश तो १६ जुलाई को आ गया था कि वांगचुक की हालत बिगड़ने न दी जाए। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को १८ जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया दिया है तो यह काम तो दो दिन लेट हो गया है। दिल्ली पुलिस तो यह काम पहले ही कर सकती थी।

विपक्ष ने वांगचुक का दिल से समर्थन नहीं किया लेकिन दिल्ली पुलिस उसे अस्पताल ले गई तो सब को बोलने का मौका मिल गया है। मोदी सरकार की आलोचना करने का मौका मिल गया है। मोदी सरकार ने तो अपनी तरफ से कुछ नहीं किया है। उसने तो वही किया है जो दिल्ली हाईकोर्ट ने उससे करने को कहा था, उसकी जिम्मेेदारी बताया था। वांगचुक के प्राणों की रक्षा करने का काम कोर्ट ने मोदी सरकार व दिल्ली पुलिस को सौंपा था, उन्होंने तो वही किया है, वांगचुक के प्राणों की रक्षा की है।अनशन करते हुए वांगचुक को कुछ हो जाता तो उसका दोष तो मोदी सरकार पर लगता कि मोदी सरकार उनके प्राण बचाने के लिए कुछ नहीं किया।अनशन स्थल से वांगचुक को इसलिए भी हटाना था कि उनके कारण भीड़ आ रही थी,विपक्ष एकजुट हो रहा था,जब भी कही भीड़ जुटती है तो सरकार चिंतित रहती है कि कहीं कुछ बड़ा न हो जाए और विपक्ष को आलोचना करने का मौका न मिल जाए।



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