संसद के कई सत्र हो गए हैं,हर बार उम्मीद की जाती है कि इस बार संसद सत्र सामान्य रहेगा,संसद में हर विषय पर चर्चा होगी और सरकार से सवाल पूछे जाएंगे और सरकार हर सवाल का जवाब देगी।हर बार देश की जनता को विपक्ष ने निराश किया है। हर बार किसी एक मुद्दे या कुछ मुद्दों को उठाकर विपक्ष के नेता संसद हंगामा करने आते हैं और संसद को चलने नहीं देते हैं और संसद न चलने देने के लिए सरकार को दोषी ठहराते हैं।ऐसा क्यों होता है यह पीएम मोदी जानते हैं इसलिए वह संसद शुरू होने के पहले ही सीधे यह नहीं बताते हैं कि इस बार भी पिछली बार के समान ही विपक्ष संसद में हंगामा करेगा और संसद नहीं चलने देगा। वह यह बताते हैं कि विपक्ष संसद में हंगामा करता है,संसद चलने नहीं देता है, बहस नहीं करता है, सवाल नहीं पूछता है, जवाब नहीं सुनता है तो उसकी वजह है विपक्ष के पास न तर्क है न तथ्य है इसलिए तर्क व तथ्य न होने के कारण वह हंगामा करता है, संसद नहीं चलने देना चाहता है।
इस बार भी संसद सत्र के पहले पीेएम मोदी ने विपक्ष को हल्ला न करने की नसीहत देते हुए कहा है कि जब तथ्य व तर्क मजबूत होते हैं तो हंगामे के लिए कोई जगह नहीं बचती है।अगर तर्क मजबूत है,तथ्य ठोस है तो शांत चित्त से अपनी आवाज को बुलंद किया जा सकता है।तर्क व तथ्य के साथ सदन की चर्चा को समृध्द बनाया जा सकता है।हर आवाज व हर विचार को संसद में जगह मिल सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि संसद में कई अनुभवी सासंद हैं, कई दलों के पास अऩुभवी सांसद है,उनके अनुभव व उऩके ज्ञान की संसद को जरूरत है।देश को भी जरूरत है,इसके लिए संसद का चलना,संसद में सार्थक चर्चा होना,मिलजुल कर देश को आगे ले जाने का संकल्प लेना जरूरी है। मोदी तो चाहते हैं कि संसद में बहस हो,अऩुभवी सांसदों को सहयोग सरकार को मिले, लेकिन पार्टी राजनीति व पार्टी विरोध के चलते यह पिछले कई सत्रों से हो नहीं पाता है, पार्टी नेता जैसा चाहता है सासंदों को वैसा ही आचरण संसद में करना पड़ता है।इससे लोगोंं को भी लगता है कि हमने कैसे लोगों को संसद में चुनकर भेजा है।
मानसून सत्र के पहले दिन वही सब हुआ जो इससे पहले के सत्र में होता रहा है।लोकसभा में विपक्षी दलों के सांसदों ने नीट पेपर लीक, राममंदिर चढ़ावा चोरी आदि मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।इसके कारण प्रश्नकाल व शून्य काल नहीं हुआ।सदन की कार्यवाही छह बार स्थगित होने के बाद मंगलवार तक के लिए स्थगित हो गई।संसद में विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की।कुछ सदस्यों ने आसन पार जाकर भी नारेबाजी की।लोकसभा के स्पीकर बार बार सदस्यों से कहते रहे कि संदन की गरिमा व परंपरा को बनाएं रखें नारेबाजी से संसद की मर्यादा नहीं बनती है।तर्कों के साथ चर्चा करें।विपक्षी सांसद हल्ला करते रहे।स्पीकर बिरला ने सद्सयों से यह भी कहा कि कई प्रदेशो मे बाढ़ की समस्या है,उस पर चर्चा कीजिए। लेकिन विपक्षी सदस्यों को हल्ला करना,हंगामा करना ही ज्यादा ठीक लगा और वह वही करते रहे।
देश की राजधानी दिल्ली व संसद में सोमवार जो कुछ दिल्ली की सड़क व संसद में देखने को मिला है वह लोकतंत्र के लिए शुभ तो नहीं माना जा सकता है। लोकतंत्र आपसी टकराव से मजबूत नहीं होता है, लोकतंत्र तो संवाद व सार्थक चर्चा से ही मजबूत होता है, एक दूसरे के सहयोग से हर समस्या का समाधान हो सकता है।लोकतंत्र में टकराव किसी भी तरह से ठीक नहीं माना जा सकता है लेकिन चाहे सड़क हो या संसद हो वहां संवाद की जगह टकराव को चुना जा रहा है और इसी वजह छोटी छोटी बातों पर आए दिन संसद व सड़क पर सरकार व विपक्ष का टकराव देखने को मिल रहा है।देश का संविधान नागरिकों को सांसदों को शांति पूर्ण ढंग से अपनी बात रखने व सरकार का विरोध करने का अधिकार देता है। वह अपने अधिकार का उपयोग कर सकते हैं लेकिन जब भी ऐसा नहीं किया जाता है तो टकराव होता है और इससे सबको परेशानी होती है। सड़क पर अराजक आंदोलन या संसद में अराजक हंगामा हो दोनों से लोकतंत्र कमजोर होता है और संसद हो या सड़क हो सभी की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा कोई काम न करे कि लोकतंत्र कमजोर हो।
संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है तो सड़क लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का सबसे ऊंचा मंच है। यहां यह ध्यान रखने की जरूरत है कि संसद को सड़क न बनाया जाए और सड़क को संसद न समझा जाए।संसद व सड़क एक दूसरे के विकल्प नहीं है,वह एक दूसरे के पूरक हैं। सवाल सड़क पर उठाए जा सकते हैं लेकिन उस पर बहस सड़क पर नहीं हो सकती,सड़क पर बहस से कोई समाधान नहीं निकल सकता, उस पर बहस संसद मेें होगी तो कोई समाधान निकलेगा।सड़क पर उठने वाली आवाजें संसद तक पहुंचनी चाहिए।यह काम विपक्ष के सांसदों का है। विपक्ष के सांसदों को यह आवाज संसद में उठानी चाहिए, वह भी यदि सड़क के लोगों की तरह संसद में हंगामा करेंगे,संसद नहीं चलने देंगे तो न तो सड़क की आवाज संसद में उठ सकती है और समस्या का कोई समाधान निकल सकता है।संसद देश की समस्याओं के समाधान का मंच है,यहां हंगामा होगा तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
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