जनता सरकार के प्रति कैसी सोच रखती है,जनता विपक्ष के प्रति कैसी सोच रखती है।क्या जनता सरकार से नाराज है, क्या जनता विपक्ष के काम से खुश है। क्या जनता सरकार से ज्यादा पसंद विपक्ष को करती है,क्या जनता अगले चुनाव में सत्तारूढ़ दल को हटाकर विपक्ष को मौका देना चाहती है।इसका एक ही पैमाना है चुनाव में जनता ने किसको ज्यादा पसंद किया। चुनाव में उसकी पहली पसंद क्या है।चुनाव में ज्यादा प्रत्याशी किसके जीते।हाल ही में हुए निकाय चुनाव के परिणाम से साफ है कि जनता साय सरकार के कामकाज से खुश है, वह मानती है कि राज्य में साय सरकार ने सुशासन कायम है। सुशासन तिहार के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। साय सरकार पर जनता ने जो भरोसा विधानसभा चुनाव में जताया था, वह भरोसा आज भी कायम है।
राज्य की पांच नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम के अनुसार तीन में भाजपा के अध्यक्ष जीते हैं और दो मेें कांग्रेस के अध्यक्ष विजयी रहे हैं। इसी तरह ७१ पार्षद पदों के लिए चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी ३९ पदों पर,कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी ३० सीटों पर विजयी रहे हैं साथ ही दो प्रत्याशी निर्दलीय जीते हैं।पांच नगर पंचायतों में से चार तो नवगठित नगर पंचायत थे,और एक नगर पंचायत में अध्यक्ष का उपचुनाव कराया गया था।चार नवगठित नगर पंचायत बम्हनीडीह,शिवनंदनपुर में भाजपा तथा सहसपुर लोहारा उपचुनाव में भाजपा का प्रत्याशी विजयी रहा वहीं कांग्रेस घुमरा व पलारी में विजयी रही।सहसपुर लोहारा सीट भाजपा की थी और उपचुनाव में भाजपा अपनी सीट बचाने में सफल रही।चार नवगठित नगर पंचायतों में से भाजपा व कांग्रेस दो दो जीतने में सफल रहे।वार्डस्तर व अध्यक्ष स्तर पर चुनाव में जनादेश कई जगह विपरीत भी रहा है।घुमका अध्यक्ष कांग्रेस का जीता लेकिन यहां १५ में से ११ वार्ड में भाजपा के पार्षद जीते हैं।वही शिवनंदनपुर में अध्यक्ष भाजपा की जीती तो यहां १५ में आठ पार्षद कांग्रेस के विजयी रहे हैं।सहसपुरलोहारा चुनाव जीतना भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न था और वह जीत गई। बम्हनीडीह में भाजपा का दबदबा रहा।यहां अध्यक्ष पद के साथ ही १५ में ११ वार्ड में भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे।
लोकतंत्र में तो संख्या से इस बात का फैसला होता है कि जनता की नंबर वन पसंद कौन है और नंबर दो पसंद कौन है।नगर निकाय चुनाव में अध्यक्षों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो ज्यादा अध्यक्ष भाजपा के चुने गए हैं, इसलिए यह साफ कहा जा सकता है कि अध्यक्ष संख्या के हिसाब से जनता की पहली पसंद भाजपा और पार्षदों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो भाजपा के ३९ पार्षद जीते है और कांग्रेस के ३० पार्षद जीते हैं, इससे भी साफ हो नगर निकाय चुनाव में जनता की पहली पसंद भाजपा बनी हुई है और कांग्रेस उसकी दूसरी पसंद है। इस हिसाब से देखा जाए तो जनता का मन विधानसभा चुनाव के बाद ढाई साल हो गए है और बदला नहीं है। वह आज भी साय सरकार के कामकाज से संतुष्ट है, वह मानती है कि साय सरकार राज्य में अच्छा काम कर रही है। उसने चुनाव में किए वादे पूरे किए है, उसकी योजनाओं का लाभ पंचायत,नगर पंचायत स्तर तक लोगों को मिल रहा है।
नगर निकाय चुनाव के बाद सीएम साय ने कहा है कि प्रदेश के विभिन्न नगर पंचायतों के चुनाव में भाजपा को ज्यादा जनसमर्थन मिला है, इससे साफ हो जाता है कि भाजपा प्रत्याशियों की विजय सरकार के सुशासन,विकास व जनकल्याणकारी नीतियों के प्रति अटूट विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। इससे साफ हो जाता है कि जनता विकास,पारदर्शी प्रशासन व जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देेने वाली सरकार के साथ है।वहीं भाजपा अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने कहा है कि यह जीत राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के प्रति जनता के विश्वास का परिणाम है।चुनाव में जनता के सामने भाजपा व कांग्रेस में किसी एक नंबर वन चुनना था और जनता ने साफ कर दिया है कि उसके लिए आज भी नंबर वन पसंद वाली पार्टी भाजपा है क्योंकि भाजपा ने दो साल जनहित के बहुत काम किए है, वादे पूरे किए है,जहां भी सुधार की जरूरत थी वहां सुधार किए हैं और इसका लाभ उसे चुनाव में मिला है।
वही कांग्रेस के प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के सुशील आनंद शुक्ला का नगर निकाय के चुनाव परिणाम पर कहना है कि जनता ने भाजपा के कुशासन को नकार दिया है,नगर निकाय के चुनाव परिणाम से साफ है कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार के ढाई साल के कामकाज से नाराज है।विधानसभा चुनाव २८ पहले सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी सामने आ रही है।कांग्रेस विपक्ष में है वह तो वही देखेगी जो उसे देखना है।वह तो आए दिन कहती रहती है कि सरकार हर क्षेत्र में फेल है ऐसा होता तो कांग्रेस नगर निकाय की दो नहीं पांच पांच जीत जाती, जनता में सरकार के प्रति नाराजगी होती है तो वह कोई भी चुनाव है उसके माध्यम से जनता प्रकट करती है। नगर निकाय चुनाव के परिणाम से साफ है कि जनता भाजपा सरकार से नाराज नहीं है कम से कम इतनी नाराज तो नहीं है कि जिस कांग्रेस को उससे सत्ता से हटाया था उसे फिर ढाई साल में ही सत्ता के लायक समझेगी।जो विपक्ष में होता है वह सपने देखता रहता है कि सरकार से जनता नाराज है और अगले चुनाव में जनता हमको सत्ता सौपंगी । कांग्रेस विपक्ष में है, उसे सत्ता के सपने देखने का पूरा अधिकार है।
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