सरकारी पद पर है, जनप्रतिनिधि हैं,पार्षद है,विधायक हैं, सांसद है, मंत्री है किसी भी पद पर हैं तो आपसे यही अपेक्षा की जाती है कि आप विनम्र रहें। आदमी जितने बड़े पद पर हो, उसे उतना ही ज्यादा विनम्र होना चाहिए। वह जितना विनम्र होता है जनता को उतना ही अ्चछा लगता है, जनता उसे उतना ही अच्छा कहती है। जो जितना अहंकार का प्रदर्शन अपने हावभाव व भाषा के जरिए करता है उसे जनता पसंद नहीं करती है और जनता सरकार से यह अपेक्षा करती है कि ऐसे व्यक्ति को सजा दी जाए जिसका काम जनता की सेवा करना है, वह जनता से अभद्रता कर रहा है। सुशासन तिहार के शुरू होने के पहले सीएम साय ने साफ कर दिया था कि सुशासन तिहार के दौरान जनता के साथ अभद्रता सहन नहीं की जाएगी। यह राज्य के तमाम अफसरों व कर्मियों के लिए साफ संदेश था कि सुशासन तिहार जनता उसके पास जाकर सेवा करने का मौका है ऐसे मौके पर जनता को नहीं लगना चाहिए कि कोई सेवक नहीं शासक है।
सुशासन तिहार चल रहा है तो चाहे व जनप्रतिनिधि हो या शासकीय अफसर दोनों को यह याद रखने की जरूरत है कि दोनों अगर किसी पद पर हैं तो उनका मुख्य काम जनता की सेवा करना है।वह जनता से बुरा व्यवहार करेंगे तो उनको उसकी सजा मिलेगी।दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ रूपेश कुमार पांडेय भी पद पर है तो उनका काम जनता की सेवा करना है, लोगों से बदतमीजी करना नहीं है।उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान ही विधायक के सामने भाजपा नेताओं व लोगों एक तो बहस की उस पर यह तक कह दिया कि जो करना है कर लो। इस पर उनके खिलाफ कार्रवाई तो होनी ही थी।आज का दौर मोबाइल को है तो कोई न कोई हर घटना का वीडियो बना लेता है यानी सबूत तक रहता है कि अधिकारी ने कैसे बदतमीजी की है।इसके बाद भाजपा नेताओं ने उनको हटाने के लिए मुहिम शुरू कर दी,उनको नहीं हटाया जाता तो भाजपा नेताओं में नाराजगी फैलती इसलिए सीएम साय के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया है।
सुशासन के दौरान सीएम साय ने जनप्रतिनिधि व शासकीय कर्मचारियों को साफ संदेश दे दिया है कि जनता के साथ बुरा व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा। वह सीएम है इसलिए उनको तो सभी के साथ समान व्यवहार करना होता है लेकिन चाहे वह कोई शासकयी कर्मी हो या अफसर हो किसी पद पर रहने के कारण अपना अहंकार होता है कि मैं तो सीईओ हूं, मैं तो नायब तहसीलदार हूं। कोई मुझसे ऐसे कैसे पेश आ सकता है।इसी तरह जनप्रतिनिधि का अपना अहंकार होता है कि मैं तो विधायक हूं, मैं तो सांसद हूं कोई अधिकारी मेरा कहना मानने से कैसे मना कर सकता है।जब एक आदमी अहंकार दिखाता है तो दूसरे आदमी का भी अहंकार जाग जाता है और दोनों के अहंकार के कारण विवाद की स्थिति बनती है। अफसर को लगता है कि विधायक ने गलती की है तो विधायक को लगता है कि सारी गलती तो अफसर की है।
कहीं अफसर की गलती होती है तो उसकी सजा जेैसे अफसर को मिलती है, उसी तरह जब विधायक व सांसद की गलती रहती है तो उसे भी सजा मिलनी चाहिए। अगर उसने कानून गलत किया है तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरगुजा जिले के राजपुर उपतहसील के नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ मारपीट का विधायक रामकुमार टोप्पो पर लगाया गया है।छग कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने नायब तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में विधायक की गिरफ्तारी की मांग की है और आंदोलन शुरू कर दिया है। अब मामला बिगड़ने के बाद विधायक कह रहे हैं कि वह खुद गिरफ्तारी देने को तैयार है,अधिकारी काम पर लौट आएं। आप किसी भी पद पर है तो कानून हाथ में लेने का अधिकार विधायक को नहीं है। यह बात विधायक को पहले समझ आनी चाहिए। मामला बिगड़नेे के बाद समझदारी दिखाने का कोई मतलब नहीं होता है।
एक महीने का सुशासन तिहार शुरू होने के पहले ही सीएम साय ने साफ कर दिया था कि इस दौरान चाहे वह विधायक हौ, कोई भाजपा पदाधिकारी हो, कोई अफसर हो सबको जनता के साथ तमीज से पेश आना है क्योंकि इस एक माह के दौरान जनता को नहीं लगना चाहिए कि अफसर हो या विधायक हों वह जनता के सेवक नहीं है, जनता को एक माह के दौरान यही लगना चाहिए कि विधायक भी उनकी सेवा के लिए है और सासंद विधायक और तमाम मंत्री भी उनकी सेवा के लिए है।सीएम साय चाहे विधायक हो या अफसर मे यही सेवा भाव पैदा करने के लिए सुशासन तिहार एक माह चलाने का फैसला किया और इस दौरान जनता को यह एहसास दिलाने का प्रयास किया है कि सब जनता की सेवा के लिए हैं लेकिन जब भी कोई सीईओ या विधायक अपना अहंकार दिखाता है तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है। जनता के सामने हकीकत आ जाती है कि इस प्रदेश के ज्यादातर विधायक व अफसर कैसे हैं।
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