चुनाव जिता नहीं पाते हैं इसलिए सपने देखते हैं

Posted On:- 2026-06-04




सुनील दास


हर क्षेत्र में दो तरह के लोग होते हैं एक जो सपना देखते हैं और उसे पूरा करने का प्रयास करते हैं,निरंतर प्रयास में जुटे रहते हैं और एक दिन अपना सपना पूरा कर लेते हैं। एक होते हैं जो सपने तो देखते हैं लेकिन उनको यही पता नहीं रहता है कि सपने को पूरा कैसे किया जाता है।उनका एक सपना पूरा नहीं होता है तो दूसरा सपना देखते हैं, दूसरा पूरा नहीं होता है तो तीसरा सपना देखते हैं और निरंतर सपना देखते रहते हैं। कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी इसी तरह के आदमी हैं। वह सपने तो देखते रहते हैं लेकिन सपने को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, उनको यही पता नहीं है कि उनका सपना कैसे पूरा हो सकता है।किसी सपने को पूरा करने के लिए दस बारह साल बहुत होते हैं कोई भी आदमी दस बारह साल किसी सपने को पूरा करने का प्रयास करे तो वह सफल हो सकता है लेकिन राहुल गांधी दस बारह साल से अपने सपने को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

राहुल गांधी का एक ही सपना है कि पीएम मोदी को हराना और वह पीएम मोदी को तीन चुनाव हो गए हरा नहीं पा रहे हैं।खुद हरा नहीं पा रहे हैं इसलिए वह सपना देखते रहते हैं कि छह माह में मोदी सरकार गिर जाएगी, मोदी सरकार कमजोर सरकार इसलिए वह ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है। मोदी सरकार तो दो बैसाखी पर टिकी सरकार है किसी भी दिन गिर जाएगी। राहुल गांधी बारह साल हो गए कहते रहते हैं लेकिन उनके कहे अऩुसार तो कुछ नहीं होते है। देश के लोगों को आदत हो गई है,सुनने की कि राहुल गांधी तो कुछ भी कहते रहते हैं और वह जैसा कहते हैं वैसा तो बिलकुल नहीं होता है।अब राहुल गांधी ने कहा है कि चीजों को नियंत्रित करने का सिस्टम अब ध्वस्त हो रहा है और उनका अंदाजा है कि एक साल के भीतर पीएम मोदी पद पर नहीं रहेंगे।एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया है कि अब सरकार के भीतर से ही संस्थागत विद्रोह शुरू हो गया है और बहुत बड़ी आर्थिक सुनामी आने वाली है क्योंकि इस सरकार ने अर्थव्यस्था को सुरक्षित करने वाले कवच को ही नष्ट कर दिया है।राहुल गांधी कह रहे है कि अब मुझे चुनाव आयुक्त के संदेश आ रहे है,खुफिया सिस्टम के प्रमुख के संदेश आ रहे हैं,उच्च न्यायपालिका के लोगों की तरफ से विद्रोह हो रहा है।

यह भी राहुल गांधी का सपना है क्योंकि वह एक चुनाव नहीं जिता पा रहे है इसलिए हताशा व निराशा में सपने देख रहे हैं,कुछ तो ऐसा होगा जिससे मोदी को सत्ता छोड़ना पड़ेगा।कभी चंद्रबाबू नायडू से उम्मीद करते हैं कि वह सरकार गिरा देंगे कभी नीतीश कुमार से उम्मीद करते हैं कि वह सरकार गिरा देंगे।ऐसा हुआ नही तो अब वह उम्मीद कर रहे हैं कि देश में आर्थिक सुनामी आएगा तो मोदी सरकार चली जाएगी। अब तक जिन संस्थाओं को राहुल गांधी कम्प्रोमाइज्सड कहते थे, अब वह देख रहे है और देश को बता रहे हैं कि वह सारी संस्थाएं जो पिछले महीने तक कंप्रोमाइज्ड थी, वह अब विद्रोह करने जा रही है और वह सब राहुल गांधी को संदेश भेज कर यह बता रहे हैं। राहुल गांधी खुद कुछ कर नहीं पा रहे हैं, उनके पास सबसे पुरानी पार्टी और विपक्ष भी उनके साथ है कि पीएम मोदी को हराना है लेकिन यही काम राहुल गांधी कर नहीं पा रहे हैं।क्योंकि लोगों को लगता है कि राहुल गांधी देश के विकास के लिए, देश के भले के लिए कुछ सोच नहीं रहे हैं, उनको मालूम है कि आर्थिक सुनामी आने वाली है जनता को बहुत तकलीफ होगी लेकिन वह बता नहीं रहे हैं कि क्या किया जाना चाहिए जिससे जनता को तकलीफ न हो, वह तो जनता को तकलीफ होने का इंतजार कर रहे हैं। वह सोचते हैं कि जनता को तकलीफ होगी तो जनता सड़क पर आएगी और पीएम मोदी को सत्ता से हटा देगी।

वह तो कोरोना के वक्त भी ऐसा सोच रहे थे, वह किसान आंदोलन के समय भी ऐसा सोच रहे थे, वह तो बांग्लादेश, नेपाल में जेनजी के आंदोलन के समय ऐसा सोच रहे थे कि भारत में भी ऐसा आंदोलन होगा और सत्ता कांग्रेस को मिल जाएगी। कई दिनों तक जेन जी को जगाने, आंदोलन करने,सड़क पर उतरने की अपेक्षा की जाती रही लेकिन कई माह बाद भी जेनजी भारत में सड़क पर नहीं उतरा है तो अब एक नया आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है. यह आंदोलन काकरोच जनता पार्टी करने वाली है। वह भी जनता के गुस्से को भुनाने के लिए उकसाने व भड़काने वाली बातें कर रही है और राहुल गांधी सहित विपक्ष उम्मीद कर रहे हैं काकरोच जनता पार्टी जरूर देश के युवाओं को सड़क पर लाएगी और ऐसा बड़ा आंदोलन होगा कि मोदी सरकार को जाना पड़ेगा।राहुल गांधी और विपक्ष अब तक कुछ कर नहीं पाया है इसलिए उनको लगता है कि जेनजी कुछ करेगा, काकरोच जनता पार्टी कुछ करेगी। देश की जनता सब समझती है कि इस देश को नुकसान पहुंचाने के लिए विदेशी ताकते  पिछले १२ सालों में कैसा कैसा खेल खेलती आई है और राहुल गांधी सहित विपक्ष कैसे उनके हाथ का खिलाैना बन जाता है।.यही वजह है कि जनता मोदी के साथ खड़ी रहती है और उनको जब भी चुनाव में मौका आता है तो हर तरह से मजबूत करती है।

यह सच है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मजबूत विपक्ष जरूरी होता है लेकिन हमारे देश का विपक्ष तो लोकतंत्र को मजबूत करने के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर करने का काम करता रहा है, यही वजह है जब भी जनता को चुनाव में मौका मिला है तो जनता ने ज्यादातर राज्यों के चुनाव में विपक्ष को हराने काम किया है, विपक्ष को कमजोर कर पीएम मोदी को और मजबूत करने का काम किया है।विपक्ष तमिलनाडु व पं.बंगाल मे सबसे मजबूत था जनता ने दोनों जगह विपक्ष के दो मजबूत नेताओं को चुनाव में हराकर साफ कर दिया है कि देश के खिलाफ सोचने वालों के साथ वह नहीं है। जो देश के लिए बुरा सोचते रहते हैं,जनता उनके साथ नहीं है।दो राज्यों में विपक्ष की हार से विपक्ष कमजोर हुआ है तो उसके लिए राहुल गांधी सहित विपक्ष के तमाम नेता दोषी है क्योंकि वह कभी यह सोच नहीं पाते हैं, कहते नहीं है कि वह देश के लिए मोदी से बेहतर क्या करने वाले हैं। वह कहते हैं कि मोदी को गद्दी से हटा दो सब ठीक हो जाएगा, जनता इस बात पर यकीन नहीं करती है।



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