(विशाल कुमार जायसवाल
सहायक सूचना अधिकारी अम्बिकापुर)
अम्बिकापुर (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। पशुपालन और मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका के ऐसे महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहे हैं, जिनसे किसानों को कृषि कार्यों के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
पशुधन विकास विभाग की योजनाओं, राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना तथा ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियों जैसी पहलों से जिले के हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इन गतिविधियों से जुड़े किसानों की सफलता अन्य ग्रामीणों को भी पशुपालन, डेयरी व्यवसाय और मछली पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से संध्या को मिला आत्मनिर्भरता का आधार
सरगुजा जिले के लमगांव निवासी संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के सहयोग से डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। वर्ष 2024 में योजना के अंतर्गत अनुदान मिलने से उन्हें गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता मिली। वर्तमान में उनके पास प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें प्रतिदिन करीब 1,200 रुपये की आय प्राप्त होती है। चारा-पानी और अन्य खर्चों को घटाने के बाद वे प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत कर रही हैं। इस प्रकार उनकी वार्षिक बचत लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है।
संध्या ने पशुपालन को केवल वर्तमान आय तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि भविष्य में व्यवसाय के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। गायों से प्राप्त तीन बछियों को वे भविष्य में प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं, जिससे उनके पशुधन में वृद्धि और दूध उत्पादन बढ़ने की संभावनाएं हैं। उनकी सफलता दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाला सहयोग, नियमित देखभाल और मेहनत ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
सूकर पालन से अनिल ने खड़ा किया सफल व्यवसाय
सरगुजा जिले के ग्राम शिवनाथपुर निवासी अनिल कुमार खेस ने सूकर पालन को सफल व्यवसाय के रूप में विकसित कर अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2018 में पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना के अंतर्गत मिली सहायता से उन्होंने महज दो कमरों में सूकर पालन की शुरुआत की। सीमित संसाधनों से शुरू किए गए इस व्यवसाय को उन्होंने मेहनत, अनुभव और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे आगे बढ़ाया।
अनिल कुमार की सफलता यह बताती है कि पशुपालन के लिए बड़े निवेश या व्यापक संसाधनों की अनिवार्यता नहीं है। उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग, पशुओं की उचित देखभाल और व्यवसाय से प्राप्त आय का पुनर्निवेश करके इसे धीरे-धीरे विस्तारित किया जा सकता है। उनके अनुभव से ग्रामीण युवाओं और किसानों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने की प्रेरणा मिलती है। सूकर पालन जैसे व्यवसायों से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
आजीविका डबरी से सिंचाई और मछली पालन का मिला दोहरा लाभ
अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो निवासी किसान बाबूनाथ के लिए आजीविका डबरी का गहरीकरण और मरम्मत खेती-किसानी में उपयोगी साबित हुई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत डबरी की जल संग्रहण क्षमता बेहतर होने से अब उन्हें साग-सब्जियों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे वे अपने खेत में सब्जी उत्पादन कर पा रहे हैं। घर की जरूरतों के लिए सब्जियां मिलने के साथ आवश्यकता के अनुसार बाजार में बिक्री करने का अवसर भी मिल रहा है। सब्जी उत्पादन से प्राप्त आमदनी खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है।
डबरी में मछली बीज डाले जाने से बाबूनाथ को मत्स्य पालन का अवसर भी मिला है। अब एक ही जल संसाधन का उपयोग सिंचाई और मछली पालन, दोनों गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। बाबूनाथ के अनुसार, डबरी में पानी उपलब्ध होने से खेती में सुविधा मिली है और मछली पालन से भी लाभ की संभावना बनी है। यह उदाहरण बताता है कि जल संरक्षण से जुड़ी परिसंपत्तियों का समुचित उपयोग किसानों के लिए आजीविका के एक से अधिक साधन विकसित कर सकता है।
अनुपयोगी जमीन पर बनी डबरी से मिली नई राह
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत निर्मित डबरी ने सनी लाल के लिए भी आजीविका के नए अवसर तैयार किए हैं। पहले उनकी जमीन खाली पड़ी रहती थी और उसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था। डबरी बनने के बाद उसमें पानी संग्रहित होने लगा, जिससे उन्हें मछली पालन शुरू करने और साग-भाजी की खेती करने की सुविधा मिली। अब वे डबरी में मछलियां पाल रहे हैं और उन्हें तैयार होने पर बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने की उम्मीद कर रहे हैं।
सनी लाल बताते हैं कि डबरी बनने से सिंचाई की सुविधा मिली है और अब वे साग-भाजी भी उगा रहे हैं। इस प्रकार पहले अनुपयोगी रहने वाली जमीन का उपयोग बढ़ा है और उपलब्ध जल संसाधन खेती से जुड़ गया है। मछली पालन से भविष्य में अतिरिक्त आमदनी की संभावना के साथ सब्जी उत्पादन से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी सहायता मिल रही है। यह उदाहरण ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन के आपसी संबंध को दर्शाता है।
योजनाओं के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
राज्य शासन द्वारा पशुपालन और मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं और विभागीय गतिविधियों के माध्यम से हितग्राहियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के जरिए पात्र हितग्राहियों को डेयरी व्यवसाय के लिए अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। पशुधन विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से पशुपालन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत डबरी निर्माण और गहरीकरण जैसे कार्य जल संरक्षण के साथ खेती तथा मछली पालन के अवसर विकसित करने में सहायक हो रहे हैं।
इन पहलों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अपनी जरूरतों के अनुरूप आजीविका के साधन विकसित करने का अवसर मिलता है। डबरी में वर्षा जल का संग्रहण, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता, सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियों को एक साथ अपनाने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। इसी तरह डेयरी और सूकर पालन जैसे व्यवसाय कृषि पर निर्भरता के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करने में मदद कर रहे हैं।
इन हितग्राहियों के अनुभव यह संदेश देते हैं कि शासकीय योजनाओं की जानकारी, विभागीय सहयोग और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाया जा सकता है। इनकी पहल से अन्य किसानों और ग्रामीण परिवारों को भी पशुपालन, डेयरी व्यवसाय तथा मत्स्य पालन अपनाने की प्रेरणा मिल रही है। इस प्रकार योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध संसाधनों के आधार पर स्थायी आजीविका विकसित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना भी है।
आत्मनिर्भर बनने के संकल्प और शासन की योजना से मिले सहयोग ने अम्बिकापुर की ममता शर्मा को एक सफल उद्यमी के रूप में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
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