बैठक का मकसद बताना था राहुल गांधी सर्वमान्य नेता

Posted On:- 2026-09-30




सुनील दास


इंडिया गठबंधऩ की बैठक का एक ही मकसद था कि गठबंधन के तमाम नेताओं का यह संदेश देना कि राहुल गांधी ही गठबंधन के सर्वमान्य नेता हैं।वह गठबंधन की तऱफ से पीएम पद के सबसे योग्य दावेदार है।कांग्रेस की तरफ से कोशिश तो पहले भी की जाती रही है,संसद के भीतर व बाहर कांग्रेेस ऐसा करने में सफल भी रही है लेकिन संसद के बाहर कांग्रेस ऐसा करने में सफल नहीं हो पाई है, अब जब बिहार के बाद बंगाल में ममता भी चुनाव हार गई हैं कि विपक्ष में राहुल गांधी का विरोध करने वाला कोई बड़ा नेता बचा नहीं है।जब तक चुनाव नहीं हारे थे तो गठबंधन के भीतर कभी शरद पवार,कभी अरविंद केजरीवाल,कभी ममता बैनर्जी राहुल गांधी का गठबंधन का नेता मानने से इंकार कर देते थे,उनकी कमी खामी को बता दिया करते थे। दिल्ली,महाराष्ट्र,बिहार,बंगाल,तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों के चुनाव हारने से अब इंडिया गठबंधन में कोई बड़ा नेता नहीं बचा है तो राहुल गांधी का विरोध कर सके।राहुल गांधी की तरह सब पीएम मोदी या भाजपा से चुनाव हारे हुए नेता हैं।अब तक ममता ही राहुल गांधी का गठबंधन के नेता के तौर पर सबसे ज्यादा विरोध करती थी.लेकिन उनके चुनाव हार जाने व पार्टी के टूट जाने के बाद से उनका राजनीतिक कद देश की राजनीति में घट गया है और उन्होंने भी बैठक में मान लिया है कि अब राहुल गांधी ही गठबंधन के सबसे बड़े व योग्य नेता हैं। बैठक में ममता बैनर्जी के यह कहने से कि सबसे पहले राहुल गांधी व तेजस्वी ने बिहार में वोट चोरी होने की बात कही थी। इससे पहले भाजपा ने हरियाणा,महाराष्ट्र आदि जगह वोट चोरी कर सरकार बनाई, बंगाल में तो वोट की लूट की गई है. यानी अब ममता भी वही बोल रही हैं जो राहुल गांधी अब तक कहते आए है।बैठक में अखिलेश यादव,शरद पवार,हेमंत सोरेन, उध्दव ठाकरे जैसे नेता नहीं आए इससे साफ हो गया है कि ममता भले राहुल गांधी को अपना नेता मान लें कई नेता अभी भी राहुल गांधी को मन से नेता मानने को तैयार नही है।उध्दव ठाकरे ने तो वर्चुअल बैठक में शामिल होकर साफ कह दिया कि कांग्रेस की एकला चलो की नीति ठीक नहीं है। यह सच भी है बैठक के पहले गठबंधन के तमाम दल और कांग्रेस राज्यों में एसआईआर,चुनाव आयोग के मुद्दे पर अलग अलग प्रदर्शन करते रहे है। कांग्रेस ने अकेले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करके देख लिया कि वह अकेले पीएम मोदी, भाजपा व चुनाव आयोग के खिलाफ माहौल नहीं बना सकती तो उसने गठबंधन के दलों को साथ लेने का फैसला किया।गठबंधन की बैठक कांग्रेस ही बुलाती रही है,इससे पहले इसी साल जून में गठबंधन की बैठक बुलाई गई थी, उसके बाद अब बुलाई गई है जब कांग्रेस को लगा कि पीएम मोदी व भाजपा, चुनाव आयोग के खिलाफ वह अकेले कुछ नहीं कर सकती।कांग्रेस महीनों से वोट चोरी का राग अलाप रही है लेकिन चुनाव में इसका कोई असर नहीं हुआ है।कई चुनाव हो गए और जनता ने कांग्रेस के वोटचोरी के आरोप को गंभीरता से लिया ही नहीं।कांग्रेस को लगता है कि जब तक यह गठबंधन का बड़ा मुद्दा नहीं बनेगा, इसे देश की जनता गंभीरता से नहीं लेगी यही वजह है कि अब तक राहुल गांधी अकेले ही वोट चोरी वोट चोरी,झूठ की गूंज का राग अपालते रहे हैं लेकिन उससे न कांग्रेस मजबूत हुई है और न ही कांग्रेस के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है।यही वजह है कि अगले साल होने वाले चुनाव के पहले कांग्रेस गठबंधन के साथ मिलकर माहौल बनाना चाहती है। इसीलिए गठबंधन की बैठक में एकजुट होकर आने वाले दिनों में पीएम मोदी,चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला किया गया है।विपक्षी दलों की बैठक में १९ घटक दलों के नेता शामिल हुए।इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इंडिया ब्लॉक के सदस्य 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक DM ऑफिसों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे और 6 अक्टूबर को विपक्ष के सभी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे हफ़्ते में राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेंगे ताकि उन्हें यह बता सकें कि किस तरह संस्थाओं पर कब्ज़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां होंगी और इनके लिए जगह और तारीखें जल्द ही तय कर ली जाएंगी। 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी।उनका यह कहना खास गौरतलब है कि अब हर कोई मानता है कि राहुल जी और दीदी 'वोट चोरी' के बारे में जो कहते थे, वह सही था। इसके जरिए खरगे और कांग्रेस ने यह बताने की कोशिश की कि राहुल गांधी ही विपक्ष के एकमात्र ऐसे नेता हैं जो सच कह रहे थे और इस पर विपक्ष के लोग भी यकीन नहीं कर रह थे अब इस पर ममता सहित विपक्ष भी यकीन कर रहा है। इससे यह साबित होता है  कि राहुल गांधी जो कहते हैं, वह सही होता है। वह सही कहते हैं इसलिए वही गठबंधन से सबसे योग्य नेता है।इसके अलावा खरगे ने बताया कि विपक्ष की छह मांगे क्या हैं।विपक्ष की छह मांगें हैं-आगामी चुनाव मे ईवीएम के बजाय केवल मतपत्र से मतदान कराया जाए,सभी चुनाव के पहले केवल पूर्व एसआईआर मतदाता सूची का उपयोग किया जाए,मतदाता सूची के हर एक संशोधन में पूरी पारदर्शिता हो,किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे उचित  नोटिस,कारण और एक प्रभावी अपीलतंत्र उपलब्ध कराया जाए,प्रशासनिक विफलता या जागरुकता की कमी के कारण पात्र मतदाताओं को मताधिकार वंचित होने से बचाया जाए।संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जाए,चुनाव आयोग ऐसा हो जिस पर सभी राजनीतिक दलों का भरोसा हो।यह राहुल गांधी की खुशकिस्मती है कि राज्यों में क्षेत्रीय दलों की हार से तमाम बड़े क्षेत्रीय नेताओं का राजनीतिक कद उनसे कम हो गया है और वह न चाहकर भी उनके नेतृत्व को स्वीकारने को मजबूर हैं।इस बैठक से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि विपक्ष के पास अब राहुल गांधी से बेहतर कोई दूसरा नेता है्।आने वाले दिनों में पता चलेगा कि विपक्ष मन से राहुल गांधी को अपना नेता मानता है या नहीं।



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