राजनीति में परम लक्ष्य होता है चुनाव जीतना। कहने को कहा जाता है कि हम देश व जनता के लिए काम कर रहे हैं, उनके हित में काम कर रहे हैं लेकिन जो कुछ कहा जाता है,किया जाता है वह चुनाव जीतने के लिए किया जाता है। जो कुछ समय समय पर कहा जाता है,किया जाता है हर वर्ग के वोटरों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है ताकि राजनीतिक दलों को उस वर्ग का वोट ज्यादा मिले। राजनीतिक दल सभी बड़े मतदाता वर्ग को प्रभावित करने कई तरह से कोशिश करते है और कोशिश तो वही अच्छी होती है जिससे मतदाता वर्ग प्रभावित होता है।मतदाता वर्ग जिससे ज्यादा प्रभावित होता है चुनाव में उसे वोट देता है ताकि वह उनके लिए पहले की तरह अच्छा काम करता रहे। यानी चुनाव में मतदाता अच्छा काम करने वाले को चुनता है इसलिए चुनता है कि उसने अच्छा काम किया है और भविष्य में भी अच्छा काम करे।
जंतर मंतर में जेन जी के आंदोलन से सभी राजनीतिक दलों को पता चला है कि देश का जेन जी देश में शिक्षा,परीक्षा,रोजगार को लेकर नाराज है।सारे राजनीतिक दल अपने अपने ढंग से उनसे संवाद करने,उनकी नाराजगी के कारणों को जानने,उसे दूर करने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि जेनजी भी एक बड़ा वोट बैंक है, एक बड़ा वोट बैंक आने वाले समय में बन सकता है।सब जानते हैं कि जेनजी उस पीढ़ी को कहते हैं जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए। 1997में पैदा होने वाले तो वोटर हैं और 2012 में पैदा होने वाले अगले चार साल में वोटर हो जाएंगे।वोटर और होने वाला वोटर नाराज हो जाए तो सबको चिंता होना जरूरी है क्योंकि वह भी तो राजनीतिक दलों की हार-जीत में अहम भूमिका निबाह सकता है।
देश में सबसे बड़े व पुराने राजनीतिक दल तो दो ही हैं एक कांग्रेस है और एक भाजपा है।कांग्रेस आजादी के बाद बरसों सत्ता में रही है और 2014 के बाद अब केंद्र व कई राज्यों में सत्ता से बाहर है और वह फिर से सत्ता में आना चाहती है। भाजपा 2014 के बाद से केंद्र व कई राज्यों में सत्ता में है और आने वाले कई दशक तक सत्ता में रहना चाहती है। दोनो जेनजी को प्रभावित करने की कोशिश पिछले महीने से करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनो को कोशिश करने का तरीका अलग है। दोनो के तरीकों में जमीन आसमान का अंतर है। कांग्रेस और राहुल गांधी का प्रयास है कि सरकार और गृहमंत्री को जेनजीे के साथ बुरा व्यवहार करने वाले के तौर पर प्रचारित किया जाए।इसलिए उसका पूरा जोर इस बात पर है कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों को प्रताडि़त करने वाली सरकार है, गृहमंत्री है।कांग्रेस की कोशिश से जेनजी को वर्तमान में तो ऐसा लग तो सकता है कि सरकार ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया है लेकिन इसका असर ज्यादा दिन तक रहने वाला नहीं है।
वहीं मोदी सरकार भी जेनजी संवाद कर एहसास कराने में सफल रही है,उसे पता है कि जेनजी क्या चाहती है और सरकार ने कुछ कर दिया है और कुछ आने वाले समय मे करने वाली है।जहां तक आंदोलन के दौरान पुलिस से मारपीट,तोड़फोड़,पथराव का सवाल है तो सरकार के साथ ही सुप्रीमकोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐसा जेनजी के साथ नहीं किया गया है, ऐसा तो असामाजिक तत्वों के साथ किया और आगे भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राहुल गांधी पैलेट गन चलाने के बड़ा मुद्दा बना रहे थे तो सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पुलिस मौके के हिसाब से पैलेट गन भी चला सकती है। राहुल गांधी देश को बताना चाहते हैं कि जेनजी पर पैलेट गन चलाया गया है तो सरकार व सुप्रीम कोर्ट की तरफ से साफ कर दिया है कि इसका उपयोग हिंसा करने वालों कोे खिलाफ किया जाता है,किया गया है और आगे भी किया जाएगा।
राहुल गांधी संसद के बाहर व भीतर दिल्ली के प्रदर्शनकारियों पर पैलेट चलाने के मामले में सवाल करते रहे हैं कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया है।वह पूरी कोशिश करते रहे कि गृहमंत्री अमित शाह को वह संसद में बयान देने के लिए मजबूर कर दें,इसके लिए वह कई दिनों से संसद नहीं चलने दे रहे हैं,मांग कर रहे हैं कि अमित शाह संसद में आकर बताएं कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया है। अमित शाह को राहुल गांधी संसद आने को मजबूर नहीं कर सके हैं। पुराने पुलिस अधिकारियों की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि प्रदर्शन के दौरान जो आदेश दिया जाता है वह एसडीएम देता है। उसके लिए गृहमंत्री को आदेश देने की जरूरत नहीं होती है। राहुल गांधी की कोशिश तब सफल होती जब अमित शाह संसद में आकर बयान देते।अमित शाह ने कुछ कहा नहीं है इसलिए राहुल गांधी जो चाहते थे वह हो नही पाया है।कुल मिलाकर राहुल गांधी ने जो किया है उसे जेनजी आने वाले समय में भूल जाएंगे लेेकिन मोदी सरकार ने जो कानून बनाया है जो व्यवस्था करने वाली है उसे आने बरसों तक वह याद करेंगे।राहुल गांधी व मोदी में फर्क यह है कि राहुल गांधी जो कुछ करना चाहते है वर्तमान के लिए करते हैं और मोदी उसे बरसों के लिए करते हैं इसलिए राहुल गांधी की कोशिश को महीनों,बरसों बाद कोई याद नहीं करता है,मोदी की कोशिश बरसों याद की जाती है।
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