एक करे तो दूसरा पीछे कैसे रह सकता है

Posted On:- 2026-08-02




सुनील दास

जब किसी क्षेत्र में दो लोगों के बीच होड़ लगी रहती है कुछ भी कहने और कुछ भी करने की तो एक कुछ कहता है या करता है तो दूसरे लिए वैसा कहना और करना जरूरी हो जाता है। जब तक वह ऐसा नहीं करता है वह खुद को होड़ में पिछड़ा हुआ समझता है। इसलिए बराबरी में आने के लिए वह कोई चर्चित मुद्दा तलाश करता है, ऐसे मुद्दे तलाश करता है जिससे ऐसा लगे उसे देश व देश के लोगों की बड़ी परवाह है। वह देश के लोग जितने परेशान हैं,उससे ज्यादा वह परेशान है। वह देश के लिए बहुत कुछ करना चाहता है लेकिन देश के लोग उसे करने के लिए सत्ता में नहीं ला रहे हैं। इसके लिए वह सत्तारूढ़ दल की सरकार की हर तरह से आलोचना करता है। जनता की हर समस्या व हर तकलीफ के लिए उसे ही दोषी बताता है।देश में ऐसे दो नेता हैं। एक हैं अरविंद केजरीवाल और दूसरे राहुल गांधी। दोनों के बीच खुद को बड़ा नेता साबित करने की होड़ लगी रहती है। दिल्ली चुनाव हारने के बाद  केजरीवाल राजनीति के मुख्य धारा से कट गए थे अब वह फिर से मुख्य धारा में आने और खुद को राहुल गांधी से बड़ा नेता साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। राम लला के दर्शन के मामले में वह खुद को और अपनी पार्टी को सनातनी बता चुके हैं और कांग्रेस सहित विपक्ष को सनातन का विरोधी बता चुके हैं। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं के चुनाव हार जाने के बाद राहुल गांधी का राजनीतिक कद बढ़ा है और वह विपक्ष के एकमात्र नेता खुद को समझते हैं और कांग्रेस भी ऐसा समझती है और दिल्ली में संसद सत्र के दौरान विपक्ष के पास कोई दूसरा नेता नहीं होने के कारण वह मजबूरी में मानते हैं कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं। 
राहुल गांधी भी जब भी मौका मिलता है तो वह यह बताने का प्रयास जरूर करते हैं कि मोदी को टक्कर देने वाले वही एक नेता हैं।वही मोदी का विकल्प हैं, जो काम कोई नहींं कर सकता वह काम वह कर सकते हैं।सीजेपी ने युवाओं के लिए दिल्ली में अनशन व आंदोलन किया तो राहुल गांधी को ऐसा लगा कि वह युवाओ की नेतृत्व के मामले में पीछे छूट रहे हैं तो उन्होंंने अचानक फैसला किया कि वह भी शिक्षामंत्री के इस्तीफे के लिए पीएम आवास के सामने धरना देंगे और कांग्रेस नेताओं व अखिलेश यादव के साथ उन्होंने धरना भी दिया और सब नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई। इससे पूरे देश में माहौल बना कि राहुल गांधी युवाओं के सबसे बड़े नेता हैं, वह युवाओं के हित में काम कर रहे हैं। आज तक पीएमआवास के सामने किसी राजनीतिक दल ने कोई धरना नहीं दिया था क्योंकि यह पीएम की सुरक्षा का मामला होता है लेकिन राहुल गांधी तो राहुल गांधी हैं वह चर्चा व खबरों में बने रहने के लिए आए दिन संसद के बाहर व भीतर ऐसा ही कुछ कहते रहते हैं,करते रहते हैं।
अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने पीएम आवास के सामने धरना दे दिया तो आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के लिए भी ऐसा करना जरूरी हो गया है क्योंकि राहुल गांधी नेे पीएम आवास के सामने धरना देकर केजरीवाल से आगे हो गए हैं, केजरीवाल से बड़े नेता हो गए हैं। केजरीवाल युवाओं के मुद्दे पर ऐसा कर नहीं सकते क्योंकि यह मुद्दा पुराना हो गया है, इसकी चर्चा भी कम हो गई है। इसलिए उन्होंने एथेनाल के मुद्दे पर पीएम आवास तक इसी माह मार्च करने की घोषणा की है।उन्होंने दो लाख लोगों की आनलाइन हस्ताक्षर वाली याचिका सौंपने की घोषणा भी की है।इससे पहले उन्होंने यह मांग की थी कि देश के पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को शुध्द पेट्रोल और ई-२० के बीच का विकल्प दिया जाए।अगर चार अगस्त तक ऐसा नहीं किया गया तो वह पीएम आवास तक मार्च करेंगे।यानी उन्होंने पहले की यह कारण बता दिया है कि वह पीएम आवास तक मार्च करेंगे तो क्यों करेंगे।उन्होंने कहा है कि वह मंगलवार दोपहर दो बजे १०० समर्थकों के साथ पीएम से मिलने के लिए निकलेंगे।उनके साथ वही लोग जाएंगे जो जेल जाने से नहीं डरते।केजरीवाल जानते है कि इथेनाल को लेकर देश के लोगों में गुस्सा है। क्योंकि गाड़ी के कुछ पार्टस पर उसका बुरा असर पड़ता है।केजरीवाल सोचते हैं कि वह इथेनाल के मुद्दे को उठाकर लोगों का प्रभावित कर सकता हूं। राहुल गांधी को पीछे छोड़ सकता हूं।यही वजह है कि वह देश के सबसे चर्चित इथेनाल के मुद्दे को लेकर खुद को राहुल गांधी से बड़ा नेता व प्रभावी नेता दिखाना चाहते हैं। 
राहुल गांधी की सोच व केजरीवाल की सोच में ज्यादा अंतर नहीं है।वह खुद को पीएम मोदी से बेहतर नेता मानते हैं लेकिन देश की जनता ऐसा नहीं मानती हैं। इसकी वजह यह है कि इनको शासन करने का मौका मिला तो वह सब नही कर सके जाे सत्ता से बाहर हो जाने पर करने की बात करते हैं।जब भी सत्ता से बाहर हो जाते हैं तो वह खुद को मोदी से बेहतर सोचने वाला व काम करने वाला बताने का प्रयास करते हैं और जनता जो पीएम मोदी काे पिछले १२ सालों से काम करते देख रही है,वह जानती है कि पीएमम मोदी चाहे राहुल गांधी हो या केजरीवाल हो दोनों से कई गुना बेहतर नेता हैं,ईमानदार नेता है,काम करने वाले नेता हैं, जनता के हित की चिंता करने वाले नेता हैं। उनकी खासियत यह है कि वह कुछ भी करते हैं तो वह शुरू में भले विवाद हो कि सरकार यह गलत कर रही है लेकिन बाद में पीएम मोदी साबित कर देते हैं कि वह जो कुछ भी करते हैं, वह देश व जनता के भले के लिए करते हैं। चाहे वह नीट पेपर लीक का मामला है या इथेनाल का मामला हो।
इथेनाल के मामले में भी विपक्ष ने खूब हल्ला किया लेकिन अब जब यह बताया गया है कि इथेनाल को पेट्रोल में मिलाने की जरूरत क्यों पड़ी तो साफ हो जाता है कि ऐसा नहीं किया जाता तो देश के लोगों का कितनी परेशानी होती, देश को आर्थिक रूप से कितना नुकसान होता।पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अऩुसार जब पं.एशिया संकट के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत १३५ डालर प्रति बैरल पहुंच गई थी तो अऩुमान लगाया गया था कि एथेनाल के बिना पेट्रोल बेचा जाता तो वह दिल्ली में १२५ रुपए प्रति लीटर होता। लेकिन सरकार ने इथेनाल मिला पेट्राेल बेचकर कर देश में पेट्रोल की कीमत को ९४.७७ रुपए पर बनाए रखा।इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है।इथेनाल बनाने के किसानों को फायदा होता है। सरकार को विदेशी मुद्रा की बचत होती है। एक अनुमान के मुताबिक इथेनाल वाले पेट्रोल के कारण भारत को १.९७ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और ९५० लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ है।शुरू में विपक्ष के हल्ले के कारण लोगों में कुछ दिनों तक चाहे नीट पेपर लीक हो या इथेनाल हो गुस्सा रहता है लेकिन सरकार ऐसा कुछ करती है कि लोगों को लगता है कि सरकार ने जो किया ठीक किया,देश के लिए किया, जनता के लिए किया।



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