एमसीबी (वीएनएस)। मनेन्द्रगढ़ वनमंडल अंतर्गत वन परिक्षेत्र खड़गवां के ग्राम ठग्गांव स्थित वनभूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध वन विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित भूमि को शासन की अधिसूचना के माध्यम से वर्ष 2020 में वन विभाग को हस्तांतरित कर विधिवत वनभूमि घोषित किया जा चुका है तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन क्षेत्रों में व्यापक वृक्षारोपण किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में वनभूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिसूचना क्रमांक एफ-5-17/2018/10-2 (पार्ट) दिनांक 03 नवम्बर 2020 के माध्यम से ग्राम ठग्गांव के सात पैचों की भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की गई थी। इनमें पैच-ए, पैच-बी, पैच-सी, पैच-डी सहित अन्य चिन्हित पैचों में स्थित विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि शामिल है। विभाग के अनुसार इन सभी क्षेत्रों में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण कार्य किया जाना है। वहीं वन विभाग ने बताया कि भूमि हस्तांतरण एवं अधिसूचना जारी होने से पूर्व वर्ष 2019 में संबंधित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया था। सर्वेक्षण के दौरान न तो किसी प्रकार का अतिक्रमण पाया गया था और न ही कोई मकान अथवा स्थायी निर्माण दर्ज किया गया था। विभाग के अनुसार वर्तमान में जो भी अतिक्रमण मौके पर दिखाई दे रहे हैं, वे सर्वेक्षण एवं वन भूमि अधिसूचना के बाद किए गए हैं, इसलिए उन्हें पूर्णतः अवैध माना गया है।
छह अतिक्रमण प्रकरणों में दर्ज किए गए वन अपराध :
वन विभाग द्वारा विभिन्न खसरों में वन भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने पर छह अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें रामअवतार द्वारा लगभग 0.600 हेक्टेयर, देवसरन द्वारा 1.000 हेक्टेयर, भगवान सिंह द्वारा 1.200 हेक्टेयर, मंगलू द्वारा 0.400 हेक्टेयर, गोविन्द सिंह द्वारा 1.000 हेक्टेयर तथा सुमार सिंह द्वारा 0.800 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा किए जाने का मामला दर्ज किया गया है।
इन मामलों में वन परिक्षेत्र अधिकारी खड़गवां द्वारा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण (पी.ओ.आर.) दर्ज कर कार्रवाई प्रारंभ की गई। इसके बाद वनमंडलाधिकारी मनेन्द्रगढ़ द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया।
नोटिस के बावजूद नहीं दिया गया प्रतिउत्तर :
वन विभाग के अनुसार सभी अतिक्रमणकारियों को नियमानुसार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्धारित अवधि में किसी भी व्यक्ति द्वारा संतोषजनक प्रतिउत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद प्रकरणों की विधिवत समीक्षा की गई। जांच के दौरान यह भी परीक्षण किया गया कि संबंधित व्यक्ति अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 तथा नियम 2007 के तहत किसी प्रकार की पात्रता रखते हैं या नहीं। विभागीय परीक्षण में सभी आवेदक उक्त अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत अपात्र पाए गए।
धारा 80 (अ) के तहत जारी हुए बेदखली नोटिस :
वन विभाग ने बताया कि नोटिसों का जवाब प्राप्त नहीं होने और वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पात्रता सिद्ध नहीं होने के कारण सभी प्रकरणों में नियमानुसार एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए धारा 80 (अ) के तहत बेदखली नोटिस जारी किए गए हैं। अब आगामी कार्रवाई के तहत वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण को प्राथमिकता :
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में अतिक्रमण पाया गया है, वे सभी वन संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। आगामी वर्षा ऋतु में इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए भूमि को अतिक्रमण मुक्त करना आवश्यक है ताकि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौधरोपण कार्य संपादित किया जा सके।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का नया अतिक्रमण कानून अपराध है और ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही वन क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है तथा वन भूमि पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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