एमसीबी (वीएनएस)। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष मनेन्द्रगढ़ में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी संतन देवी जांगड़े की अध्यक्षता में महिला एवं बाल विकास विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम, जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा, सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी, सहायक परियोजना अधिकारी तथा पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।
बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कई क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर अधिकारियों एवं सुपरवाइजरों को कड़ी फटकार लगाई तथा कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभाग की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत लंबित हितग्राहियों की प्रविष्टि, सत्यापन एवं अद्यतन कार्य को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के शत-प्रतिशत लक्ष्यों को 30 जून तक हर हाल में पूरा किया जाए। पीएमएमवीवाई की विकासखंडवार एवं सेक्टरवार समीक्षा करते हुए भरतपुर, कठौतिया, बड़गांवकला, भगवानपुर, बहरासी, कंजिया, खमरौध, कमर्जी, माड़ीसरई, बड़ा बाजार, हल्दीबाड़ी, खड़गवां, बरदर, कोड़ा, उधनापुर, झगराखांड, कछौड़, केल्हारी, खोंगापानी, सरभोका, नागपुर एवं पाराडोल सेक्टरों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता एवं सुपरवाइजर अपने क्षेत्र में जनजागरूकता गतिविधियों को गति दें। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित बैठकें आयोजित करने तथा निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के निर्देश भी दिए।
आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध खेल सामग्री के उपयोग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पाया कि कई स्थानों पर सामग्री का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। पाराडोल एवं सरभोका क्षेत्र में विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए।
पूरक पोषण आहार, रेडी-टू-ईट वितरण एवं पोषण ट्रैकर की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जो बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र नहीं आ रहे हैं, उनके माता-पिता से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें प्रेरित किया जाए। इसके बाद भी उपस्थिति नहीं होने पर आवश्यक दस्तावेजी कार्यवाही की जाए।
बैठक में जिले में कुपोषण की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। कलेक्टर ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रमुख उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालना है। जिले में चिन्हित 667 अति कुपोषित बच्चों को जल्द से जल्द सामान्य पोषण स्तर पर लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने सुपरवाइजरों को घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की निगरानी करने तथा परिवारों को पोषण संबंधी परामर्श देने के निर्देश दिए।
ई-केवाईसी और महतारी वंदन योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि पलायन कर चुके हितग्राहियों को भी खोजकर उनकी ई-केवाईसी पूर्ण कराई जाए। इसके लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। माड़ीसरई, जनकपुर, पोंडी एवं चिरमिरी क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने को कहा गया। साथ ही एनआरसी में शत-प्रतिशत उपलब्धि तथा सभी लंबित ई-केवाईसी कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने चिरमिरी, भरतपुर, खड़गवां एवं मनेन्द्रगढ़ परियोजनाओं में भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके अलावा जर्जर आंगनबाड़ी भवनों का चिन्हांकन कर आवश्यक प्रस्ताव भेजने को कहा गया।
बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी अधिकारियों, परियोजना अधिकारियों, सुपरवाइजरों एवं मैदानी अमले को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सभी कर्मचारी पूरी ईमानदारी, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें तथा जिले की रैंकिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार लाएं। उन्होंने कहा कि आगामी समीक्षा में प्रगति नहीं मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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