अपनी सरकार होती है तो हर राजनीतिक दल के नेता व कार्यकर्ताओं को लगता है कि प्रशासन को उसका कहना मानना चाहिए,पुलिस को वही करना चाहिए जो वह चाहते हैं।यह होता तो गलत है लेकिन उनको गलत नहीं लगता है क्योंकि उऩका मानना रहता है कि हमारी सरकार है तो प्रशासन मे हमारी चलनी चाहिए। प्रशासन को हमारी बात सुननी चाहिए।कई बार निचले स्तर के नेताओं व कार्यकर्ताओं के कारण सरकार की परेशानी बढ़ जाती है, सरकार को फजीहत का सामना करना पड़ता है।सरकार का सूरजपुर जिले के कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज आर्म्स एक्ट का मामला वापस लेना पड़ा है।सीधा सा सवाल है कि ऐसा काम ही क्यों किसी भी स्तर पर करना जिसके कारण खुद की फजीहत हो,सरकार की फजीहत हो।
कई बार जिले के नेता जिसे छोटा मामला समझते हैं, वह बड़ा मामला बन जाता है या बना दिया जाता है।सूरजपुर जिले का मामला था तो छोटा मामला लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच खुद को सक्रिय नेता या कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए लड़ने वाले नेता खुद को साबित करने के लिए मामले को बड़ा बना दिया।हुआ वह था जो निचले स्तर के नेताओं के बीच होता है।किसी भी स्तर का चुनाव हो तो हार-जीत की बहस होती है।कहा जाता है कि भाजपा कार्यकर्ता मित्तल पांडे कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के प्रतिष्ठान में जाकर कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन को हार जीत को लेकर उकसाया और उनके साथ बदसलूकी की।कांग्रेस का दावा है कि विवाद बढ़ने पर मित्तल ने सत्ता का हवाला देते हुए नरेंद्र को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी।इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष मुरली सोनी ने नरेंद्र जैन के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई कि नरेंद्र जैन ने गाली गलौज करते हुए मित्तल पांडेय पर कटारा तान दी थी। पुलिस कथित कटार बरामद नहीं कर पाई।
अभी राज्य में पंचायत व नगर पंचायत चुनाव चल रहे हैं। ऐसे माहौल में कांग्रेस के पदाधिकारी के खिलाफ झूठा मामला कांग्रेस नेताओं को लगा कि यही मौका है सरकार को सवालों के घेरे मे खड़े करने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का कि कांग्रेस के बड़े नेता तुम्हारे साथ है। मौका था खुद को कांग्रेस का सक्रिय नेता साबित करने का ताे दीपक बैज विरोध,अनशन करने पहुंच गए. टीएस सिंहदेव अऩशन करने पहुंच गए। भूपेश बघेल भी अनशन में शामिल होने पहुंच गए। गलती निचले स्तर के भाजपा नेताओं की कांग्रेस नेताओं ने ऐसा माहौल बना दिया कि सरकार को आर्म्स एक्ट का मामला वापस लेना पड़ा। आर्म्स एक्ट का मामला था नहीं और बनाया गया तो वापस लेना ही था क्योंकि गलती अपनी थी, मामले में गलती न मानने का मतलब होता कि कांग्रेस को प्रदेश स्तर पर हल्ला करने का मौका देना। यही वजह है कि जिले के मामले को आर्म्स एक्ट का मामला वापस लेकर निपटाने का प्रयास किया गया है। इससे कांग्रेस नेताओं दीपक बैज, टीएस सिंहदेव व भूपेश बघेल को सरकार पर कई तरह की असफलता का आरोप लगाने का मौका मिला है।
अभी पंचायत व नगर पंचायत के चुनाव चल रहे हैं। इसका रिजल्ट जब आएगा तो कांग्रेस हारती है तो वह आरोप लगाएगी की सरकार ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनाव जीता है।अगर कांग्रेस चुनाव जीतती है तो भी आरोप लगाएगी कि सरकार से जनता का मोहभंग हो गया है, इसलिए भाजपा चुनाव में हार गई है या उसके समर्थित प्रत्याशी चुनाव हार गए हैं। छोटे से मामले को कांग्रेस नेताओं ने बड़ा मामला इसलिए बनाया है कि दीपक बैज जो अध्यक्ष है वह साबित करना चाहते हैं कि वही कांग्रेस अध्यक्ष पद के सबसे अच्छे प्रत्याशी है, वह सबको साथ लेकर चलते है,सबके लिए लड़ते हैं। टीएस सिंहदेव भी कांग्रेस अध्यक्ष पद के दावेदार है,उनको भी दिखाना था कि वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं नेतृत्व कर सकते है,उन के लिए लड़ सकते हैं।कांग्रेस अध्यक्ष पद की लड़ाई में लगता है कि भूपेश बघेल टीएस सिंहदेव के साथ आ गए हैं। यानी अगर उनके किसी समर्थक को कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो वह अंत में सिंहदेव के नाम पर सहमत हो सकते हैं।
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