जैसे तैसे ढाई साल का वादा पूरा किया

Posted On:- 2026-05-28




सुनील दास

कर्नाटक में छत्तीसगढ़ की तरह सीएम पद के विवाद को भविष्य के लिए टालने कांग्रेस आलाकमान ने सिध्दारमैया को सीएम बना दिया था। शिवकुमार भी सिध्दारमैया के बाद ढाई साल सीएम बने रहने के लिए तैयार हो गए।ढाई साल तक इस मामले में कोई विवाद तो होना नहीं था क्योंकि दोनों को आलाकमान पर भरोसा था कि उन्होंने ढाई साल कहा है तो ढाई साल बाद सिध्दारमैया इस्तीफा देंगे और शिवकुमार को सीएम बनाया जाएगा।छत्तीसगढ़ की तरह विवाद तो ढाई साल बाद शुरू होना ही था और हुआ भी ।सिध्दारमैया के ढाई  साल पूरे होने के बाद पिछले कई महीनोें से कयास लगाए जा रहे थे कि आलाकमान ढाई साल पूरे हो गए हैं तो वह सिध्दारमैया को इस्तीफा देने को कहेगा और शिवकुमार के सीएम बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।

शिवकुमार तो चाहते थे कि वादे के मुताबिक सीएम सिध्दारमैया को ढाई साल पूरे पर खुद ही इस्तीफा दे दें।ऐसा हुआ नहीं, महीनों सिध्दारमैया यही कहते रहे कि वह पूरे पांच साल के सीेएम है,साथ ही यह भी जरूर कहते थे कि आलाकमान कहेगा तो वह सीएम का पद छोड़ देंगे। यानी वह बिना कहे सबको यह संदेश देते रहते थे कि आलाकमान ने उनको सीएम पद छोड़ने को नहीं कहा है तो वह पद कैसे छोड़ दें। इस तरह ढाई साल पूरा होने के बाद भी सिध्सदारमैया कई महीनों तक सीएम बने रहे।एम की कुर्सी मिल जाती है तो सिध्दारमैया हो या भूपेश बघेल या अशोक गहलोत छोड़ने का मन नहीं करता है। जो सीएम बन जाता है उसे लगता है कि सीएम बनने योग्य तो वही है।उससे अच्छा सीएम तो काेई हो नहीं सकता।जो सीएम बन जाता है तो ज्यादातर विधायक भी उसके साथ खड़े रहते हैं क्योंकि सत्ता की मलाई तो सत्ताधारी के साथ रहने पर ही मिलती है। भूपेश बघेल व अशोक गहलोत की तरह सिध्दारमैया भी आलाकमान को यह संदेश देते रहे कि सारे विधायक मेरे साथ हैं, मुझे सीएम बनाए रखने में ही पार्टी को फायदा है,मुझे सीएम पद से हटाने पर पार्टी को नुकसान हो सकता है।सिध्दारमैया कुछ महीने ही ऐसा कर सके और आखिर में मई २८ को उनकाे सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

सिध्दारमैया के इस्तीफा देने से शिवकुमार के सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है और कर्नाटक पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां पांच साल में कांग्रेस के दो सीएम होंगे। एक सिध्दारमैया तीन साल सीएम रह चुके है और आने वाले दो साल शिवकुमार सीएम रहेंगे। ऐसा इसलिए हो सका है क्योंकि समझाने वाले ने आलाकमान को समझा दिया है कि अगर शिवकुमार को वादे के मुताबिक सीएम नहीं बनाया गया तो जिस तरह छत्तीसगढ़,राजस्थान में नुकसान हुआ उसी तरह कर्नाटक में भी नुकसान हो सकता है। आलाकमान को य बात समझ में आ गई कि पार्टी को फायदा इसमें नहीं है कि सिध्दारमैया सीएम बने रहे, पार्टी को फायदा इसमें है कि दो साल शिवकुमार सीएम बने रहें।

कांग्रेस के पास बड़े राज्य में सत्ता वैसे ही कम है। तेलंगाना व हिमाचल तो छोटे राज्य हैं,कर्नाटक बड़ा राज्य है और केरल में इस बार कांग्रेस गठबंधन चुनाव जीता है। आलाकमान चाहता है कि केरल के साथ ही कर्नाटक भी उसके पास ही रहना चाहिए। शिवकुमार को सीएम इसी मकसद से बनाया जा रहा है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि उन्होंने पिछले चुनाव में जिस तरह कांग्रेस को जिताया था,अगली बार उसी तरह जिताकर दिखाएं।आलाकमान ने शिवकुमार से किया वादा पूरा कर दिया है. अब शिवकुमार के सामने यह चुनौती होगी कि वह अगले चुनाव में कांग्रेस को दोबारा जिताकर दिखाएं।सिध्दारमैया ने इस्तीफा देते हुए यह कहा है कि उनसे आलाकमान ने इस्तीफा देने को कहा और उन्होंने दे दिया है।यानी वह आलाकमान के आज्ञाकारी हैं।अब यदि शिवकुमार अगला चुनाव नहीं जिता पाते हैं तो सिध्दारमैया पर कोई आंच नहीं आएगी। वह कह देंगे हार की जिम्मेदारी तो सीएम की होती है और मैं सीएम नहीं हूं।शिवकुमार कांग्रेस को जिताने में सफल रहते हैं तो कहेंगे कि इसका श्रेय उनके तीन साल के काम को जाता है।कहने वाले कह सकते हैं कि सिध्दारमैया भूपेश बघेल, अशोक गहलोत जैसे कुशल नेता नहीं थे इसलिए उनको पद से इस्तीफा देना पड़ा और शिवकुमार टीएस सिंहदेव, सचिन पायलट की तरह जोड़-तोड में कमजोर नेता नहीं थे इसलिए वह आलाकमान को समझा सके कि मेरा सीएम बनना ही आपके व पार्टी के लिए फायदेमंद रहेगा।



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