बिलासपुर (वीएनएस)। श्लोक ध्वनि फाउंडेशन के तत्वावधान में वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं पूर्व कुलपति आचार्य प्रो. ए. डी. एन. वाजपेयी का विदाई एवं सम्मान समारोह सोमवार शाम प्रार्थना भवन, नेहरू चौक, बिलासपुर में भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शहर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, प्राध्यापकों एवं नागरिकों ने आत्मीयता के साथ उनका सम्मान किया।
समारोह में आचार्य वाजपेयी ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ कर उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “जहाँ अध्यापन प्रारंभ हुआ, वहीं कुलपति हो जाना उपन्यासों और कहानियों में ही संभव लगता है, लेकिन मेरे जीवन में यह एक सजीव सत्य रहा। छत्तीसगढ़ की माटी से मेरा संबंध पुराना और अनूठा है, मैं इसका सदैव कृतज्ञ रहूँगा।”
उन्होंने श्लोक ध्वनि फाउंडेशन सहित शहर की विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें समाज में नई चेतना जगाने वाला प्रयास बताया। अपने पुराने दिनों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और साहित्यिक दोनों मोर्चों पर उनका प्रयास सदैव राष्ट्रहित में स्वयं को समर्पित करने का रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. ललित प्रकाश पटेरिया, कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर ने कहा कि आचार्य वाजपेयी का कार्यकाल अत्यंत प्रेरणादायी रहा है। उनका व्यक्तित्व निरंतर सभी को मार्गदर्शन देता रहा है। उन्होंने कहा कि “यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि शहर की ओर से व्यक्त कृतज्ञता है, जो बताता है कि उन्होंने अपने कार्यों से कितनी बड़ी पूंजी अर्जित की है। उनके कार्यों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है।”
विशिष्ट अतिथि डॉ. वीरेंद्र कुमार सारस्वत, कुलपति, पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय ने कहा कि वाजपेयी जी के लिए ‘विदाई’ केवल एक औपचारिक शब्द है। वे निरंतर कर्म, विचार और दायित्व से जुड़े रहने वाले व्यक्तित्व हैं। उन्होंने उन्हें अपना अग्रज और प्रेरणास्रोत बताया।
विशिष्ट अतिथि संजय दुबे, संचालक, सीएमडी कॉलेज बिलासपुर ने कहा कि आचार्य वाजपेयी के कार्यकाल में पूरे क्षेत्र में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण निर्मित हुआ। सीएमडी कॉलेज सहित विभिन्न संस्थानों को नई दिशा मिली तथा साहित्य, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में नवीन आयाम स्थापित हुए।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम ने उनके प्रशासनिक निर्णयों को “सर्जिकल स्ट्राइक” की संज्ञा देते हुए कहा कि उनके निर्णय सदैव सीधे परिणाम की ओर केंद्रित रहे। उन्होंने उनकी निडर प्रशासनिक क्षमता और कार्यकुशलता की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी, पेंड्रा डॉ. रामेश्वर शर्मा ने समारोह को अविस्मरणीय क्षण बताया।
इससे पूर्व स्वागत भाषण में श्लोक ध्वनि फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य सुमित शर्मा ने आचार्य वाजपेयी के साहित्यिक व्यक्तित्व और प्रशासनिक दक्षता के अद्भुत सामंजस्य को रेखांकित किया तथा फाउंडेशन एवं शहर से उनके आत्मीय जुड़ाव के कई प्रसंग साझा किए।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं साहित्यिक संचालन फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य एवं साहित्यकार श्रीकुमार ने किया।
समारोह में कथाकार रामकुमार तिवारी, सतीश जायसवाल, डॉ. अजय पाठक, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल, चंद्रप्रकाश वाजपेयी, राजा शर्मा, ज्योति दुबे, पूजा पाण्डेय, अनु चक्रवर्ती, शिव सिंह, प्रो. एच. एस. होता, महेश श्रीवास, अजय पाल, पूर्णिमा तिवारी, कामेश उपाध्याय, श्रुति प्रभला, राजेश दुआ, अंकुर शुक्ला, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, साहित्यकार, पत्रकार एवं शहर के नागरिक उपस्थित रहे।
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