हर गलत काम तब होता है जब मिलता है संरक्षण

Posted On:- 2026-03-08




सुनील दास

कौन नहीं जानता है कि हर तरह का गलत काम सत्ता व प्रशासन के एक हिस्से के संरक्षण के बिना नहीं हो सकता। हर गलत काम करने वाला भी कोई भी गलत काम तब ही शुरू करता है जब उसे आश्वासन मिलता है कि हम हैं न।सत्ता व प्रशासन का एक हिस्सा किसी भी राजनीतिक दल की सरकार रहे,उसका संरक्षण हर तरह के गलत काम करने वालों को मिलता है यही वजह है कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल की रहे हर तरह का गलत काम होता रहता है।चाहे सट्टा हो,अवैध शराब हो,ड्रग्स का धंधा हो,गांजा, अफीम का धंधा हो किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, यह धंधा कभी बंद नहीं होता है,कम जरूर होता है ऊपरी लेबल से दबाव पड़ता है कि कार्रवाई करो, कार्रवाई के चलते धंधा कुछ दिन बंद रहता है, बाद में शुरू हो जाता् है। ऐसे तमाम धंधे जिसमें बहुत ज्यादा कमाई है,उसे सब मिलजुलकर ही चलाते हैं क्योंकि आज लोगों को ज्यादा पैसा जल्द से जल्द चाहिए। ज्यादा से ज्यादा पैसा जल्द तो गलत तरीके से ही कमाया जा सकता है। कभी कभार कोई पकड़ा जाता है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए लेकिन लोगों को आश्चर्य होता है कि ओहो फलाने सरकार के समय ऐसा धंधा भी किया जा रहा था।

दुर्ग जिले के समाेदा गांव में अफीम की खेती का खुलासा हुआ है।सब चकित हैं कि छत्तीसगढ़ में ऐसा भी हो सकता है,सबसे ज्यादा चकित लोग इस बात से हैं कि भाजपा नेता ऐसा कर रहा था।धंधा कितना भी गलत हो, अगर उसमें बहुत पैसा मिलता है तो नेता किस पार्टी का यह मायने नहीं रखता है, वह तो किसी भी पार्टी का हो सकता है और हर उस पार्टी में ऐसे गलत काम करने वाले नेता जरूर होते हैं या ऐसे नेता होते हैं जो गलत काम करने वालों के संरक्षण देते हैं और प्रशासन से संरक्षण दिलाते भी हैं। रेत माफिया, भूमाफिया,खनिज माफिया, गांजा,शराब माफिया,सट्टा माफिया, ड्रग्स माफिया,राशन माफिया हमेशा रहते हैं तो इसलिए रहते कि राजनीतिक दल के नेता व अफसर इऩको मरने नहीं देते हैं।वह तो राजनीतिक दलों के नेताओं व अफसरों के लिए कमाऊ पूत होते हैं।यही लोग तो पार्टी फंड व बड़े अफसरों के लिए पैसा जुटाते है,पिछली सरकार में ऐसे कमाऊ पूतों ने पहली बार हजारों करोड़ रुपए कमा कर एक राजनीतिक दल के नेताओं और अफसरों को दिए थे।

समोदा गांव में अफीम की खेती बिना नेताओं के संरक्षण व अफसरों के संरक्षण तो हो नहीं सकती।ऐसा भी नहीं हो सकता कि इस खेती की बात आसपास के लोगों को मालूम न हो। उस फार्म हाउस में आने वाले नेताओं को मालूम न हो। फार्म हाउस में काम करने वालों को मालूम न हो। अफीम की खेती का काम अगर बरसों से चल रहा था यह साफ हो जाता है कि वर्तमान में जो सरकार है और पहले जो सरकार रही है,उसके समय से इस काम को करने वालों को सत्ता व प्रशासन का संरक्षण मिलता रहा है। कोई नहीं मान सकता कि इतना बड़ा काम बिना सत्ता व प्रशासन के संरक्षण हो सकता है।बरसों से इसका खुलासा नहीं हुआ तो इसकी वजह यह हो सकती है कि बाहरी लोगों का प्रवेश खेती वाले इलाके में नहीं होता था। बरसों बाद खुलासा भी ऐसे हुआ है कि वाट्स अप पर बच्चों की अफीम की खेती का फोटो डाल दी। यानी खुलासा बड़ो से नहीं हुआ है बच्चो से अऩजाने में हुआ है। बड़े अपराध का खुलासा कभी कभी इसी तरह छोटी से बात से हो जाता है। इस बार यही हुआ है।

भाजपा ने अफीम की खेती के मामले में भाजपा नेता का नाम सामने आने पर उसे निलंबित कर दिया है। वह यही कर सकती थी और उसने यह कर दिया है।इससे साफ है कि भाजपा के बड़े नेताओं को भी नहीं मालूम रहता है कि उनकी पार्टी में जितने सदस्य हैं, वह क्या करते हैं, क्या कर रहे हैं।सदस्य बनाते वक्त कोई भी राजनीतिक दल यह कहां देखता है कि जिसे सदस्य बनाया जा रहा है या किसी संगठन का पदाधिकारी  बनाया जा रहा है,वह क्या करता है। सदस्य बनाने का मतलब तो बस संख्या से रहता है। संख्या मेें सबसे बड़ी पार्टी भाजपा है तो बड़ी पार्टी में धोखे से अफीम का धंधा करने वाले नेता बन जाते हैं,पद पा जाते है तो कांग्रेस नेताओं को तो बोलने का मौका मिल जाता है कि कमल फूल वाली पार्टी के नेता अब अफीम का फूल खिला रहे हैं।वह भूल जाते हैं कि यदि अफीम की खेती दुर्ग जिले में लंबे समय से हो रही है तो यह भी हो सकता है कि कांग्रेस के समय से ही हो रही हो। तब क्या यह माना जाए कि कांग्रेस के समय से भाजपा नेता को अफीम की खेती के लिए सत्ता व प्रशासन का संरक्षण मिलता था।सरकार व जिला,पुलिस प्रशासन के लिए के लिए यह चिंता की बात होनी चाहिए कि अफीम की खेती करने वाला भाजपा नेता निकलता है, गांजा तस्करी पुलिस के आरक्षक करते हैं। गांजा जब्त किया जाता है तो वह दो आरक्षकों का निकलता है।कई घोटालों में अफसरों का नाम भी सामने आते हैं।गलत काम नेता व अफसर करते हैं और बदनामी सरकार की होती है।



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