आयोजन फूहड़ता के लिए तो किया नहीं गया था.....

Posted On:- 2026-09-21




सुनील दास

राजनीति में किसी बड़े नेता का कोई आयोजन किया जाता है तो उसका मकसद भी मुद्दे को बड़ा व गंभीर बताना होता है। बड़े नेता के बड़े आयोजन में जब बड़े व गंभीर मुद्दे उठाए जाने हैं तो पूरा फोकस उस पर ही रहना चाहिए ताकि देश की जनता को संदेश जाए कि इस पार्टी का बड़ा नेता इन मुद्दों को गंभीर व बड़ा मानता है और वह चाहता है कि इस पर देश े  खूब चर्चा होनी चाहिए और समस्या के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास भी होने चाहिए। लेकिन जब कभी भी किसी गंभीर मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रम में गंभीर मुद्दों की जगह फूहड़ता पर फोकस ज्यादा हो जाता है तो गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए आयोजन पर सवालिया निशान लग जाता है कि यह आयोजन युवाओं के गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए किया गया था या फूहड़ता के प्रदर्शन के लिए किया गया था। जब मीडिया व सोशल मीडिया मे उस कार्यक्रम की चर्चा उठाए गए गंभीर मुद्दों की जगह फूहड़ता के लिए होती है तो देश के लोगों में तो यह धारणा बनना स्वाभाविक है कि बड़े नेता के आयोजऩ का मकसद गंभीर मुद्दों पर कम चर्चा व फूहड़ता के प्रदर्शन पर ज्यादा था।
इस पर कुछ लोग कह सकते हैं कि भारतीय राजनीति फूहड़ होती जा रही है,कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि भारतीय राजनीति में कुछ नेता फूहड़ राजनीति कर रहे हैं।भारतीय राजनीति में फूहड़ता की चर्चा एक बार फिर से खूब हो रही है तो इस बार भी इसके केंद्र में राहुल गांधी का इंदौर में आयोजित गूंज कार्यक्रम है।यह कार्यक्रम छात्रों की समस्याओं को सामने लाने व उसे देश मे चर्चा का विषय बनाने के लिए किया गया था। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी व आए छात्रों ने शिक्षा, भर्ती, परीक्षा,छात्रावास,रोजगार की समस्या को उठाया गया, मोदी सरकार से सवाल भी पूछे गए लेकिन कार्यक्रम में फूहड़ता का प्रदर्शन जिस तरह किया गया उससे गंभीर कार्यक्रम की मीडिया व सोशल मीडिया में चर्चा एक फूहड़ कार्यक्रम के रूप ज्यादा की गई। माना गया कि इस कार्यक्रम का मकसद तो मोदी का मजाक उड़ाने के साथ ही महिलाओं का अपमान करना भी था।
एक कार्यक्रम जो गंभीर कार्यक्रम हो सकता था वह फूहड़ कार्यक्रम में तब बदल गया जब मंच पर मिमिक्री आर्टिस्ट पुलिकत मणि आए। राहुल गांधी को गले से लगाया और फूहड़ हंसी हंसते हुए कहते हैं कि मेरे दोस्त कैसे हैं आप,राहुल गांधी कहते हैं, मैं ठीक हूं,आप कैसे हैं,मणि जवाब देते हैं बहुत परेशान किया है दोस्त,बार बार मेरे दोस्त कहते हुए फूहड़ हंसी हंसते रहते हैं।फिर राहुल गांधी कहते हैं कि आप से मिलकर अच्छा लगा और मणि से कहते हैं कि आप बताइए,मणि फूहड़ता से हंसते हैं और दर्शकों की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि मां को कुर्सी दो, मां,मां,मां,।यह पं. बंगाल की एक रैली में बुजुर्ग महिला को खड़ी देखकर पीएम मोदी ने लोगों से कहा था कि उनको कुर्सी दो बैठने के लिए। पुलकित मणि इस बात का मजाक इंदौर में उड़ाया। यह राहुल गांधी के कार्यक्रम में कोई पहली बार पीएम का फूहड़ तरीके से नहीं उड़ाया गया था इससे पहले दिल्ली के कार्यक्रम में भी राहुल गांधी के कार्यक्रम मे इटली की पीएम का फूहड़ तरीके से मजाक उड़ाया गया था और दोनो बार राहुल गांधी इस बात नाराजगी जता सकते थे लेकिन वह दोनों पर जोरों से हंसते रहे यही बात देश के लोगों को बुरी लगी है कि राहुल गांधी गांधी परिवार का सदस्य व नेता प्रतिपक्ष होते हुए ऐसे फूहड़ मजाक पर जोरों से हंस कैसे सकते हैं।
लगता तो ऐसा है कि दिल्ली के कार्यक्रम से कोई सबक लेने की जगह यह समझा गया है कि जब कांग्रेस व राहुल गांधी के कार्यक्रम में पीएम मोदी का मजाक उड़ाया जाता है तो उसके वीडियाे खूब वायरल होते है,खूब पसंद किए जाते हैं। यही वजह है कि दिल्ली के कार्यक्रम के बाद इंदौर के कार्यक्रम में भी दिल्ली वाले कार्यक्रम की तरह फूहड़ता से पीएम मोदी की मिमिक्री कर उनका मजाक उड़ाया गया।इसके वीडियों भी खूब वायरल हुए और उसकी खूब चर्चा हुई लेकिन इससे नुकसान कांग्रेस व राहुल गांधी को क्या हुआ। इसे समझने और जानने का कांग्रेस के साथ ही राहुल गांधी भी तैयार नहीं है। सब यही मान रहे हैं,मानने का दिखावा कर रहे हैं कि राहुल गांधी का दिल्ली के बाद इंदौर का कार्यक्रम भी बहुत सफल रहा है।जेनजी के सबसे लोकप्रिय नेता राहुल गांधी है।
जब भी कोई यह समझता है कि सच को छिपाया जा सकता है तो सच सौ तरीकों से सामने आ जाता है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को जेन जी का सबसे बड़ा व लोकप्रिय नेता बताने के लिए इंदौर में गूंज कार्यक्रम का आयोजन किया।सब मानकर चल रहे थे कि दिल्ली विवि चुनाव में कांग्रेस जीत रही है और कांग्रेस इंदौर के कार्यक्रम में इस बात का दावा कर सकेगी कि देखो दिल्ली विवि में एबीविपी को हराने के बात साफ हो जाती है देश का जेनजी कांग्रेस व राहुल गांधी के साथ है।यह सच नहीं है कि जेनजी कांग्रेस व राहुल गांधी के साथ है, इसलिए दिल्ली विवि चुनाव में एनएसयूआई बुरी तरह हार गई और यह बात पूरी तरह साफ हो गई कि राहुल गांधी देश में कितने भी कार्यक्रम कर लें लेकिन वह जेनजी के सबसे लोकप्रिय नेता नहीं बन सकते। क्योंकि एक सबूत तो दिल्ली विवि चुनाव हारना है तथा दूसरा सबूत उनके कार्यक्रम में जेनजी आ नहीं रहे हैं तो जेनजी की जगह कांग्रेस के संगठनों के युवाओं को जुटाया जा रहा है।पीएम मोदी की तरह कांग्रेस को राहुल गांधी का एक कार्यक्रम बुक माय शो के जरिए आयोजित करके देखना चाहिए।सच क्या है पता चल जाएगा।



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