चुनाव में हराकर रिजीम चेंज तो १२ साल में नहीं कर पाए

Posted On:- 2026-10-18




सुनील दास


हमारे देश मे लोकतंत्र हैं,लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन तो चुनाव के जरिए ही होता है। जो भी राजनीतिक दल सत्ता में आना चाहते हैं तो उनको चुनाव लड़ना पड़ता है और चुनाव जीतना पड़ता है, चुनाव में जनता जिसे जिताती है, उसे सत्ता मिलती है,वही सरकार बनाता है, लोकतंत्र में रिजीम चेंज तो चुनाव के जरिए ही होता है, अब तक देश में जितने राजनीतिक दलों की रिजीम चेंज हुई है वह तो शांतिपूर्ण चुनाव के जरिए ही हुई है। राजनीतिक दलों के चाहने से देश में सत्ता परिवर्तन नहीं होता है। जब देश की जनता व राज्यों की जनता चाहती है कि रिजीम चेंज करना है और रिजीम किसे सौंपना है तो देश व राज्यों में रिजीम चेंज होता है यानी रिजीम चेंज करने वाली जनता हैं लेकिन कई बार नेताओं को वहम हो जाता है,कई बार राजनीतिक दलों को वहम हो जाता है कि वह चुनाव में रिजीम चेंज कर सकते हैं लेकिन जनता ऐसे कई नेताओं को बता चुकी हैं कि रिजीम चेंज तुम्हारे चाहने से नहीं होता है रिजीम चेंज तो जनता के चाहने से होता है।
लोकतंत्र में रिजीम चेंज तो वही अच्छा माना जाता है जो चुनाव के जरिए होता है लेकिन कई बार चुनाव के अलावा भी कई तरीकों से रिजीम चेंज किया जाता है जैसे विधायकों व सासंदों के पाला बदलने के जरिए। जो कमजोर सरकारें होती हैं,उनके कुछ सांसदों या विधायकों के पाला बदलने के कारण एक सरकार गिर जाती है तो दूसरी सरकार सत्ता में आती हैं यानी जिसके पास बहुमत नहीं है, वह बगैर चुनाव के बहुमत जुटा लेता है तो भी सत्ता परिवर्तन होता है। आजादी के बाद तो कई विधानसभा भंग कर सत्ता से राजनीतिक दलों को वंचित कर दिया जाता था।अब ऐसा नहीं होता है।हमारे देश में विपक्षी राजनीतिक दल कई राज्यों व केंद्र में चुनाव जीतकर सत्ता परिवर्तन नहीं कर पा रहे हैं। कई राज्यों में तो दस साल लेकर ३० साल तक सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। हाल ही में दिल्ली में १५ साल बाद,बंगाल में १५ साल बाद, ओडिशा में दो दशक बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है तो चुनाव के जरिए ही हुआ है।
कांग्रेस को भाजपा से सीखना चाहिए कि रिजीम चेंज कैसे किया जाता है, पं.बंगाल में किसी को यकीन नहीं था कि भाजपा रिजीम चेंज कर सकती है, भाजपा ने रिजीम चेंज करके दिखाया कि रिजीम चेंज ऐसे किया जाता है, ओडिशा में भी माना जाता था कि वहीं सत्ता परिवर्तन मुश्किल काम है लेकिन भाजपा ने वहां भी रिजीम चेंज करके दिखाया है। कई राज्य ऐसे हैं जहां भाजपा रिजीम चेंज नहीं कर सकी है लेकिन वह प्रयास तो कर रही है, रिजीम चेंज किसी राज्य में निरंतर प्रयास से ही होता है,कई बार से दस से बीस साल भी लगते हैं। इसके लिए योजना बनाई जाती है,काम किया जाता है, बेहतर शासन व प्रशासन कैसे दिया जाएगा, नीति,रणनीति बनाई जाती है,संगठन को मजबूत किया जाता है तब जाकर रिजीम चेंज होता है।
देश में कई दशक तक राज्यों व केंद्र में शासन करने वाली कांग्रेस राज्यों के साथ ही केंद्र से भी १२ साल से सत्ता से बाहर है तो इसलिए है कि वह चुनाव के जरिए रिजीम चेंज नहीं कर पा रही है। केंद्र के तीन चुनाव हार चुकी है, राज्यों के पता नहीं कितने चुनाव हार चुकी है।तीसरी बार केंद्र का चुनाव हारने का उसने रिकार्ड बनाया है क्योंकि इससे पहले कांग्रेस पांच साल सत्ता से बाहर रहती थी और सत्ता में वापस आ जाती थी।ऐसा वह जनता का भरोसा उस पर बने रहने के कारण करती थी या उसका कोई बेहतर विकल्प न होने के कारण करती थी।अब उसका बेहतर विकल्प भाजपा बन गई है,देश के लोगों को मोदी जैसा बेहतर काम करने वाला नेता मिल गया है तो जनता ने रिजीम चेंज करना बंद कर दिया है।२०२४ में चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी को उम्मीद थी कि मोदी सरकार कमजोर सरकार है, वह गिर जाएगी या उसे गिराने का उसे मौका मिल जाएगा लेकिन तीन साल हो गए मोदी सरकार मजबूत बनी हुई है तो कांग्रेस व दूसरे राजनीतिक दलों व संगठनों को लगा कि बांग्लादेश,नेेपाल व श्रीलंका की तरह देश में अराजकता फैलाकर मोदी सरकार को हटाया जा सकता है।
यही वजह है कि कभी दिल्ली दंगा, कभी किसान आंदोलन,कभी शाहीन बाग,कभी सीआईआर,ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग,कभी वोट चोरी को लेकर देश में अराजकता फैला कर रिजीम चेंज करने का प्रयास किया गया है। इसकी पोल नहीं खुलती यदि नेहा बाेरा व प्रशांत भूषण यह बयान नहीं देते कि वह कैसे भारत में रिजीम चेंज करना चाहते है। पोल खुल जाने के बाद कांग्रेस अब बयान दे रही है कि वह तो रिजीम चेंज चुनाव जीतकर करना चाहती है। तो उसको देश में अराजकता फैलाने की जगह २०२९ में होने वाले चुनाव का इंतजार करना चाहिए,अगले साल होने वाले राज्यों के चुनाव जीतने की तैयारी करनी चाहिए।वह ऐसा कुछ करने की जगह देश मे अराजकता फैलाने का प्रयास कर रही है,इससे कांग्रेस की ही छबि खराब हो रही है कि एक राष्ट्रवादी पार्टी ऐसा कैसे कर रही है।ऐसा कैसे कर सकती है।उसके वोट चोरी अभियान को देखते हुए तो यह सवाल भी उठता है कि वह रिजीम चेंज कैसे करेगी क्योंकि वह तो कहती है कि मोदी सरकार वोट चोरी चुनाव जीतती है।जब तक वोट चोरी हो रहा है तो कांग्रेस तो सत्ता मेंं आ नहीं सकती।कांग्रेस को स्वीकार करना चाहिए कि जनता उसपर भरोसा नही कर रही है, राहुल गांधी पर भरोसा नहीं कर रही है इसलिए वह सत्ता में नहीं आ रही है।उसे सब छोड़कर जनता का भरोसा जीतने का प्रयास करना चाहिए।



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