मुंबई(वीएनएस)। पुलिस ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने के आरोप में शिवसेना UBT नेता आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर FIR दर्ज की है। यह प्रदर्शन चुनावी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग को लेकर किया गया था।
मुंबई पुलिस ने 11 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) नेता अमित ठाकरे समेत 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन पर गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने के आरोप हैं। FIR में नामजद अन्य प्रमुख लोगों में MNS नेता संदीप देशपांडे और शिवसेना नेता वरुण सरदेसाई व महेश सावंत शामिल हैं।
अधिकारियों ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं का इस्तेमाल किया है, जिनमें गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने की सजा से जुड़ी धारा 189(2) के साथ-साथ धारा 37(1), 37(3) और 135 शामिल हैं, जो सरकारी अधिकारी के आदेशों की अवहेलना और उससे जुड़े अपराधों से संबंधित हैं। 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर एक विरोध प्रदर्शन हुआ। इसे SS (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे ने आयोजित किया था। वे मुंबई में चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग कर रहे थे।
आदित्य ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार भारत के लोगों और नागरिकों से डरी हुई है। इसीलिए आप देख रहे हैं कि वे हर उस भारतीय को गिरफ्तार कर रहे हैं जो देशभक्त है और सड़कों पर उतर रहा है। बीजेपी डरी हुई है। जो लोग हमसे अलग होकर बीजेपी में शामिल हुए, वे सभी गद्दार अब क्या कह रहे हैं? एकनाथ शिंदे कहाँ छिपे हैं? उनके साथ गए छह सांसद कहाँ छिपे हैं? उनके सभी सहयोगी कहाँ हैं?
मुंबई पुलिस ने आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की। यह FIR 4 अक्टूबर को MNS और SS (UBT) की संयुक्त अगुवाई में हुए विरोध मार्च के बाद दर्ज की गई। आरोप है कि यह मार्च बिना ज़रूरी पुलिस मंज़ूरी के निकाला गया और इसने दक्षिण मुंबई में लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। यह मार्च बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) मुख्यालय की ओर निकाला गया था। इसका मकसद चुनावी रोल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन) में कथित गड़बड़ियों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार का विरोध करना था।
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