नई दिल्ली(वीएनएस)।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न के तहत नोटिस भेजने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम हटाना नहीं है। लाल कृष्ण आडवाणी, अरविंद केजरीवाल और रेखा गुप्ता सहित कई हस्तियों को फ़ॉर्म में गड़बड़ियों के चलते नोटिस मिले थे। दिल्ली सीईओ कार्यालय ने भरोसा दिया कि बिना सुनवाई किसी का नाम नहीं हटेगा।
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कहा कि वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के दौरान कुछ वोटरों को भेजे गए नोटिस का मतलब यह नहीं है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। यह स्पष्टीकरण तब आया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनसे पहले मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख हस्तियों को उनके फ़ॉर्म में गड़बड़ियों के कारण नोटिस भेजे गए।
मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के अनुसार, जानकारी की पुष्टि के बाद मुख्यमंत्री का नाम वेरिफ़ाई किया गया। दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया और BJP विधायक कैलाश गहलोत उन लोगों में शामिल थे जिन्हें उनकी जानकारी में गड़बड़ी के कारण नोटिस जारी किए गए थे। अन्य नामों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एसएस संधू शामिल थे।
हालांकि, CEO ऑफिस ने साफ़ किया कि नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे। CEO ऑफिस ने कहा कि सभी संबंधित लोगों को सूचित किया जाता है कि नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि NCT दिल्ली की वोटर लिस्ट से उनके नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिना अपनी बात रखने का मौका दिए और उचित, तर्कपूर्ण और अपील करने योग्य आदेश के बिना किसी का नाम नहीं हटाया जा सकता। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इन नोटिसों से कोई अस्तित्व का संकट पैदा नहीं हो रहा है।
वोटर लिस्ट का ड्राफ़्ट उन जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया था जो वोटरों ने बूथ लेवल ऑफ़िसर्स (BLOs) को एन्यूमरेशन फ़ॉर्म के ज़रिए दी थीं। इसे 31 अगस्त को CEO दिल्ली की वेबसाइट पर पब्लिश किया गया था। यह लिस्ट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (AERO) के ऑफ़िस और तय किए गए पोलिंग स्टेशनों पर भी उपलब्ध है।
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