नई दिल्ली(वीएनएस)।पत्रकारों से बात करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत के लिए इतनी बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी के बावजूद, कांग्रेस पार्टी का सिर्फ़ डिनर मेन्यू पर टिप्पणी करने का फ़ैसला न सिर्फ़ हंसी के लायक और अफ़सोसनाक है, बल्कि यह उन्हें किसी शादी में नाराज़ फूफ़ा जैसा भी दिखाता है। कांग्रेस की आलोचना पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा कि पार्टी ने इंटरनेशनल मंच के डिप्लोमैटिक, रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के बजाय खाने पर टिप्पणी करना चुना।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को हाल ही में हुए ब्रिक्स समिट के डिनर मेन्यू पर कांग्रेस पार्टी की टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मंच के डिप्लोमैटिक, रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं के बजाय खाने पर ध्यान देना यह दिखाता है कि विपक्षी पार्टी के पास कोई ठोस बात कहने की क्षमता नहीं है। पत्रकारों से बात करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत के लिए इतनी बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी के बावजूद, कांग्रेस पार्टी का सिर्फ़ डिनर मेन्यू पर टिप्पणी करने का फ़ैसला न सिर्फ़ हंसी के लायक और अफ़सोसनाक है, बल्कि यह उन्हें किसी शादी में नाराज़ फूफ़ा जैसा भी दिखाता है। कांग्रेस की आलोचना पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा कि पार्टी ने इंटरनेशनल मंच के डिप्लोमैटिक, रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के बजाय खाने पर टिप्पणी करना चुना।
उन्होंने कहा कि इतने अहम इंटरनेशनल फ़ोरम के डिप्लोमैटिक, स्ट्रैटेजिक या इकोनॉमिक पहलुओं पर बात करने के बजाय, उन्होंने खाने पर टिप्पणी करना चुना। इससे साफ़ पता चलता है कि वे ब्रिक्स समिट के बारे में कोई ठोस आलोचना या टिप्पणी करने में असमर्थ हैं। उन्होंने आगे कहा इसलिए, मैं कहूंगा कि कांग्रेस की यह टिप्पणी, भले ही समिट की सफलता से उपजी निराशा का नतीजा हो, असल में उनकी अपनी अक्षमता को ही स्वीकार करती है। ब्रिक्स समिट में भारत की भूमिका पर ज़ोर देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि इस इवेंट ने दिखाया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, बदलती दुनिया में ग्लोबल मंच पर एक सकारात्मक और प्रभावशाली ताकत के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने कहा हाल ही में संपन्न ब्रिक्स समिट ने एक शानदार उदाहरण पेश किया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, बदलती दुनिया में ग्लोबल मंच पर एक सकारात्मक और प्रभावशाली ताकत के तौर पर उभर रहा है।
त्रिवेदी ने बताया कि सऊदी अरब और ईरान जैसे लंबे समय से मतभेद रखने वाले देशों ने भी इस समिट में हिस्सा लिया और आम सहमति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया गया। उन्होंने कहा कि इस घोषणापत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर साफ़ तौर पर बात की गई, इस बात पर ज़ोर दिया गया कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और खास तौर पर पहलगाम का ज़िक्र किया गया - और यह सब चीन के समर्थन और सहमति से हुआ। इसे भारत की कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण बताते हुए त्रिवेदी ने आगे कहा, "मेरा मानना है कि यह कूटनीतिक कौशल का एक शानदार उदाहरण है, एक ऐसी उपलब्धि जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
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