लोकतंत्र में पंचायत से लेकर विधानसभा,लोकसभा तक व्यवस्था इसलिए की जाती है कि निचले स्तर तक आदमी को कोई दिक्कत न हो। गांव,कस्बों,शहर की समस्या का स्थानीय स्तर पर जल्द से जल्द समाधान हो। पंचायत,नगर पालिका,नगर निगम को अधिकार दिए गए हैं,उनकी जिम्मेदारी तय की गई है,उनसे उम्मीद की गई है कि वह आम लोगों को सुरक्षित व बेहतर जीवन देंगे। विडंबना है कि आज यही संस्थाएं आम लोगों की उम्मीदों,अपेक्षा पर खरी नहीं उतर रहीं हैं, अपनी अधिकार उपयोग ठीक से नहीं कर रही है, अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निबाह रही हैं और इसका खामियाजा आए दिन आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।यानी कि आज वो संस्थाएं जिन पर आम लोगों की जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वही संस्थाएं ठीक से सुरक्षा नहीं कर पा रही है।
देश की राजधानी में एक बहुमंजिली इमारत का गिरना और कई लोगों का मारा जाना इस बात का एक ताजा उदाहरण है कि हमारी स्थानीय संस्थाओं की लापरवाही के कारण आए दिन हादसे होते हैं और हादसे के बाद सुरक्षा के उपाय किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो काम पहले किया जाना चाहिए हादसा न होने देने के लिए किया जाना चाहिए, वह काम हादसे के बाद क्यों किया जाता है।मेनहोल खुला है, हादसे के पहले उसे बंद किया जाना चाहिए नही किया जाएगा, हादसा होने के बाद उसे बंद किया जाएगा, सड़क में गड्ढे हो गए हैं, कोई हादसा होता है और कोई मर जाता है उसके बात स्थानीय संस्थाओं को याद आता है कि गडढों को पाटना उनकी जिम्मेदारी है।नालियों की सफाई न होने के कारण शहर में पानी भर जाता है तो पानी उतरने के बाद नाली की सफाई की जाती है।गली की इमारत में आग लग जाने के बाद पता चलता है कि वहां तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं जा सकती।इमारत के गिरने के बाद पता चलता है कि वह अवैध रूप से बनाई गई थी और अवैध रूप बेसमेंट में खुदाई की जा रही थी यानी उसकी अनुमति नहीं ली गई थी और उसी के कारण पांच मंजिली इमारत गिर गई और उसमे रहने वाले कुछ छात्रों की मौत हो गई।
दिल्ली में इमारत गिरने के बाद सात लोगों की मौत हो गई है,कई लोग घायल हुए हैं।इसके बाद हर तरह की जांच की कार्रवाई शुरू हो गई है, सारी संस्थाएं जाग गई हैं,पुलिस ने हास्टल मालिक को गिरफ्तार किया है,हाई कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली नगर निगम,दिल्ली विवि व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली की सभी पीजी मामलों की जांच की जाएगी और सुरक्षा की जानकारी ली जाएगी। नगर मे बनी इमारतों की पूरी जानकारी नगर निगम के पास होनी चाहिए। उसे समय समय पर जांच करनी चाहिए कि पुराने भवन आम लोगों के जीवन के लिए खतरा तो नहीं है।उसने यह काम नहीं किया। इसके लिए कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। किसी भी हादसे के बाद कुछ लोगों को जिम्मेदार मानकर कार्रवाई कर दिए जाने से तो अगला जो हादसा होना है, वह तो रुकने वाला नहीं है। कोई भी हादसा तो तब ही रुक सकता है जब हादसा होने से पहले सुरक्षा के उपाय पूरी गंभीरता से किए जाएं।
किसी भी तरह के हादसे रोकना एक सामूहिक जिम्मेदारी भी है।यह तो हर किसी की जिम्मेदारी है कि उसे कहीं भी किसी तरह के हादसे होने का अंदेशा हो तो वह उसे रोकने के लिए अकेले या सामूहिक रूप से उसके लिए प्रयास करे।सरकारी संस्थाओं से मिलकर बताए कि ऐसा न होने पर क्या हो सकता है। दिल्ली मे अच्छी युनिवर्सिटी है तो उसमें बाहर से युवा पढ़ने आते है तो यह विवि की जिम्मेदारी है कि बाहर से आने वाले बच्चों के लिए अच्छे हास्टल बनाए ताकि उनको बुरी स्थिति में रहकर पढ़ाई न करना पड़े। माता पिता की जिम्मेदारी है कि वह बच्चे के कहीं रहने की व्यवस्था कर रहे हैं तो वह हर तरह के जोखिम को जानने का प्रयास करें ताकि उनके बच्चे के साथ कोई हादसा न हो। राज्य सरकारों को अपने राज्य में अच्छी शिक्षा व्यवस्था करनी चाहिए ताकि राज्य के बच्चों को बाहर पढ़ने के लिए न जाना पड़े।
सबसे बुरी बात यह है कि हादसे होने के बाद भी उसे दूसरे राज्यों के निगम व पालिका गंभीरता से नहीं लेते हैं और यह मानकर चलते हैं दिल्ली में इमारत गिरी है हमारे क्षेत्र में नहीं गिर सकती।रायपुर नगर निगम क्षेत्र मे कई ऐसी इमारते हैं जो कभी भी गिर सकती है लेकिन उन्हें गिराया नहीं जा रहा है। कारण बताया जा रहा है कि संपत्ति विवाद के कारण उनको गिराया नहीं जा रहा है। निगम नोटिस जारी कर मान लेता है कि उसका काम खत्म हो गया है और पूछने पर यह भी कहता है कि हादसा होता है तो उसके लिए मकान मालिक जिम्मेदार होगा,उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।निगम विवाद का हवाला देकर अपनी जिम्मदारी से बच रहा है। बुरी बात यह है कि खतरनाक भवन मालिकों से भवन को न ढहाए जाने पर जुर्माना भी नहीं किया जाता है।बड़ा जुर्माना ही किया जाता तो कम से कम जुर्माने के डर से तो वह भवन को गिराते।भवन है और उसके कारण कई लोगों की जान जा सकती है लेकिन सब हादसे का इंतजार कर रहे हैं।हादसे के बाद वह सब काम होगा जो अभी नहीं हो रहा है।
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