खरगे या कांग्रेस क्यों एफआईआर दर्ज नहीं कराते

Posted On:- 2026-08-30




सुनील दास

राजनीतिक दल कई मुद्दे महज राजनीति के लिए उठाते हैं। वह मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं रहते हैं,मुद्दा मिल गया है तो उसे उठा लेते हैं,दूसरे राजनीतिक दल को बदनाम करने के लिए,खुद चर्चा में रहने के लिए।राहुल गांधी व कांग्रेस पार्टी अपनी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान का मुद्दा तो उठा रहे हैं और पीएम मोदी से मांग कर रहे हैं कि इस मामले में जो कार्रवाई होनी चाहिए वह कार्रवाई की जाए।सवाल उठता है कि जब कांग्रेस व राहुल गांधी कार्रवाई चाहते हैं तो वह खुद क्यों शुध्दीकरण मामले मेें एफआईआर दर्ज क्यों नही कराते हैं।कांग्रेस और राहुल गांधी अपने अध्यक्ष खरगे के अपमान को लेकर इतने गंभीर होते तो वह २० दिन तक इंतजार नहीं करते कि राज्य सरकार या केंद्र सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई करेगी।खरगे के अपमान को लेकर कांग्रेस व राहुल गांधी इतने ज्यादा गंभीर होते तो खरगे को कांग्रेस की बैठक में यह नहीं कहना पड़ता कि उनके अपमान के मुद्दे को कांग्रेस नेताओं ने गंभीरता से नहीं लिया। यानी कांग्रेस नेताओं को लगा ही नहीं कि हल्दवानी उनके नेता का अपमान हुआ है।
२० दिन के बाद राहुल गांधी कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कान्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि आरएसएस व भाजपा से जुड़े लोगों ने खरगे का अपमान किया है।हुआ यह था कि उत्तराखंड के हल्दवानी के रामलीला मैदान में खरगे के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।इस कार्यक्रम के बाद मैदान में बने मंच की सफाई कर वहां पर हवन पूजन किया गया तो खरगे व राहुल ने इसे शुध्दीकरण बताते हुए पूरे मामले को छुआछूत का मामला बताया।कांग्रेस उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष के शुध्दीकरण को सही ठहराने पर कहा है कि यह तो छुआछूत का स्पष्ट उदाहरण है।राहुल गांधी का कहना है कि जिन लोगों ने 'शुद्धिकरण' किया, उनके खिलाफ जल्द से जल्द FIR दर्ज की जानी चाहिए,'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी के 'शुद्धिकरण' विवाद पर भाजपा की संलिप्तता से इनकार करते हुए कांग्रेस पर मुद्दाविहीन होने का आरोप लगाया। धामी ने मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के मुद्दे को खारिज कर उत्तराखंड में जातिगत भेदभाव से इनकार किया और कहा कि शुद्धिकरण धार्मिक नारों की प्रतिक्रिया थी। धामी ने कहा है कि शुद्धिकरण करने वालों में कोई भी BJP कार्यकर्ता शामिल नहीं था, लेकिन क्या उत्तराखंड में किसी को पता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति क्या है? वहां धार्मिक उन्माद वाले नारे लगाए गए और एक खास धर्म के लोगों ने ऐसा किया। इसके जवाब में कुछ धार्मिक संगठनों ने वहां शुद्धिकरण कार्यक्रम किया।
सीएम धामी के बयान से साफ हो जाता है कि राहुल गांधी जैसा कह रहे हैं, वैसा कुछ नहीं है। रामलीला मैदान में खरगे की सभा के बाद जो कुछ हुआ उससे भाजपा या आरएसएस का काेई लेना देना नही्ं है।राहुल गांधी ने जानबूझकर इस मामले में भाजपा व आरएसएस का नाम जोड़ने का प्रयास किया।ताकि भाजपा व आरएसएस के खिलाफ दलितों के बीच यह झूठ फैलाया जा सके कि भाजपा व आरएसएस दलितों का अपमान करते हैं। भाजपा की तरफ से साफ कर दिया गया है राहुल जैसा बता रहे हैं यह मामला वैसा नहीं है। रामलीला मंच की सफाई कर हवन पूजन करने वालों में तो दलित समाज के लोग भी थे, दलित समाज के लोगों के खिलाफ दलित के अपमान का मामला कैसे बन सकता है।कहीं भी कोई आयोजन होता है तो वही कचरा, गंदगी होती है तो उसकी सफाई तो हमेशा होती है, सफाई को कोई शुध्दीकरण कैसे कह सकता है लेकिन जिन लोगों को राजनीति करनी है, वह राजनीति करने के लिए कुछ भी कहते व करते रहते हैं।
राहुल गांधी हमेशा यह साबित करने का प्रयास करते रहते हैं कि वही संविधान व दलितों,अल्पसंख्यकों,जेनजी,महिलाओं के लिए लड़ने वाले हैं और भाजपा आरएसएस इन सबकी विरोधी है, इसलिए उनकी लड़ाई भाजपा व आऱएसएस से हैं।वही आरएसएस व भाजपा से लड़ने वाले हैं।यही वजह है प्रेस कान्फ्रेस के दौरान उन्होंने संविधान व आरएसएस के बीच की लड़ाई के अपने आरोपों सही साबित करने के लिए दलितों पर अत्याचार व भेदभाव के मामलों की उल्लेख किया और यहां तक कह दिया कि देश की चाय दुकानों तक में दलितों के लिए अलग कप होता है और बाकी लोगों के लिए दूसरा कप होता है।उनके इस कथन काे देश के चायवाले तक झूठ बता रहे हैं।राहुल गांधी जब बोलते हैं तो पता नहीं रहता क्या बोल रहे है,सच बोल रहे हैं या झूठ बोल रहे हैं यही वजह एक जेन जी लड़की साबित कर देती है कि राहुल गांधी ने चार कार्यक्रम में ४० झूठ बोले,जिसमें २९ झूठ व ११ गुमराह करने वाले थे। देश का कोई चायवाला भी उनको दलितों से भेदभाव मामले में झूठा साबित कर देता है।



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