नई दिल्ली(वीएनएस)।डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत की दृष्टि केवल विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत मानव संसाधन गतिशीलता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की साझेदारियां पारस्परिक लाभ, साझा जिम्मेदारी और दीर्घकालिक स्थिरता पर आधारित होती हैं।
नई दिल्ली में आयोजित मानव संसाधन गतिशीलता मंच को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलती व्यवस्था में कौशल आधारित मानव संसाधन की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय बदलाव, तकनीकी नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, डिजिटलीकरण और हरित अर्थव्यवस्था जैसी नई प्रवृत्तियां वैश्विक श्रम बाजार को नया स्वरूप दे रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य, विनिर्माण, निर्माण और कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में भी कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे समय में देशों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह रचनात्मक सोच और सहयोग के माध्यम से भविष्य की समृद्धि सुनिश्चित करें।
विदेश मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक वैश्विक आर्थिक चर्चाएं व्यापार, निवेश और पूंजी के प्रवाह तक सीमित रही थीं, लेकिन अब मानव संसाधन आर्थिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। दुनिया के अनेक देश यह समझने लगे हैं कि सतत विकास, नवाचार और उत्पादकता बनाए रखने के लिए कुशल और अनुकूलनशील प्रतिभा तक पहुंच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन गतिशीलता केवल लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का विषय नहीं है, बल्कि यह आकांक्षाओं को अवसरों से जोड़ने, प्रतिभा को मांग से मिलाने और आर्थिक प्रगति के नए रास्ते तैयार करने की प्रक्रिया है। इसके माध्यम से आर्थिक विकास के साथ सामाजिक कल्याण को भी मजबूती मिलती है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत की दृष्टि केवल विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत मानव संसाधन गतिशीलता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की साझेदारियां पारस्परिक लाभ, साझा जिम्मेदारी और दीर्घकालिक स्थिरता पर आधारित होती हैं। यदि इन्हें प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए तो इससे स्रोत देशों, गंतव्य देशों, नियोक्ताओं, श्रमिकों और समाज सभी को लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। भारत अब तक 26 देशों के साथ 28 प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते कर चुका है, जबकि कई अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है। विदेश मंत्री ने अवैध प्रवासन, मानव तस्करी, धोखाधड़ी और शोषणकारी बिचौलियों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं और कमजोर वर्गों को जोखिम में डालती हैं।
उन्होंने बताया कि प्रवासन प्रबंधन में डिजिटल व्यवस्था ने महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। दो वर्ष पहले शुरू किए गए ई माइग्रेट संस्करण-2 मंच ने प्रवासन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी बनाया है। विदेश मंत्री के अनुसार इस मंच के माध्यम से अब तक पचास लाख से अधिक प्रवासन स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल व्यवस्था तकनीक के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वैश्विक उदाहरण बन चुकी है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन के कारण श्रम बाजार में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। कुछ पारंपरिक रोजगार बदलेंगे, जबकि नए प्रकार के रोजगार भी सामने आएंगे। हरित अर्थव्यवस्था नई क्षमताओं और कौशल की मांग पैदा करेगी। साथ ही वृद्ध होती आबादी के कारण स्वास्थ्य सेवा और देखभाल से जुडे क्षेत्रों का महत्व भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी अर्थव्यवस्था जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण वृद्धजन आधारित अर्थव्यवस्था भी है।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों और अवसरों का सामना करने के लिए सरकारों, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को पहले से अधिक समन्वित तरीके से काम करना होगा। भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं का अनुमान लगाने, निरंतर सीखने और कौशल विकास को बढ़ावा देने तथा विभिन्न देशों में योग्यता और कौशल की मान्यता सुनिश्चित करने की दिशा में संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। उनका कहना था कि श्रमिकों को केवल आज की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की मांगों के अनुरूप भी तैयार करना होगा।
विदेश मंत्री ने प्रवासी भारतीयों के कल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भारतीय समुदाय कल्याण कोष, त्वरित वाणिज्य दूतावास सेवाएं, मदद पोर्टल और ई-माइग्रेट जैसे मंच विदेशों में रह रहे भारतीयों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन माध्यमों से प्रवासी भारतीयों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि मानव संसाधन गतिशीलता मंच नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, नियोक्ताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लाने का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से अनुभवों का आदान प्रदान, नए विचारों पर चर्चा और सहयोग के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक गतिशीलता से जुड़ी चुनौतियां और अवसर सीमाओं से परे हैं, इसलिए कोई भी देश या सरकारी विभाग अकेले इनका समाधान नहीं कर सकता।विदेश मंत्री ने बताया कि इस मंच में पांच देशों के साथ हुए गतिशीलता समझौतों को और मजबूत बनाने पर विशेष चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन समझौतों और उनके क्रियान्वयन तंत्र का अधिकतम लाभ सभी साझेदार देशों को मिल सके।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर भरोसेमंद और न्यायपूर्ण गतिशीलता व्यवस्था विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि मानव संसाधन गतिशीलता मंच से उपयोगी सुझाव सामने आएंगे, साझेदारियां मजबूत होंगी और वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता के भविष्य को दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता और जिम्मेदारी पर आधारित गतिशीलता समावेशी विकास, मजबूत समाज और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई शक्ति प्रदान कर सकती है।
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