सुकमा (वीएनएस)। प्रशासन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) सुकमा के संयुक्त प्रयासों से जिला जेल सुकमा में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक सराहनीय पहल की गई है। जेल में निरुद्ध बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित श्फास्ट फूड मेकिंगश् और “मुर्गीपालन“ प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसके बाद उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को आधिकारिक प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रशासन का यह कदम न केवल बंदियों के प्रति सुधारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि जेल से छूटने के बाद उनके लिए अपराध मुक्त और सम्मानजनक आजीविका का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
इस विशेष गरिमामयी अवसर पर प्रशासन और बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में सहायक निदेशक (पशु चिकित्सा सेवाएँ) संदीप इंदुपकर, कृषि विज्ञान केंद्र प्रमुख हनुमंत तोमर, अग्रणी बैंक मैनेजर मनीष कुमार खुसरो, भूतपूर्व बैंक मैनेजर विकास कुमार और सहायक जेल अधीक्षक राजेश कुमार बिसेन मौजूद रहे। अधिकारियों ने बंदियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें पशुपालन और स्वरोजगार के आर्थिक फायदों से अवगत कराया। साथ ही, उन्हें अतीत को पीछे छोड़कर जेल से रिहा होने के बाद एक सफल उद्यमी के रूप में समाज में नई पहचान बनाने और सम्मानजनक जीवन यापन करने के लिए प्रेरित किया।
प्रशासन की इस सकारात्मक मुहिम का जमीनी असर भी देखने को मिल रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बंदी दीपक कुमार राणा ने उत्साहपूर्वक बताया कि वह जेल से बाहर आने के बाद मुर्गीपालन को अपना व्यवसाय बनाकर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। आरसेटी की इस उपयोगिता को देखते हुए सहायक जेल अधीक्षक राजेश कुमार बिसेन ने संस्थान के प्रयासों की जमकर सराहना की और प्रतिबद्धता जताई कि प्रशासन भविष्य में भी जेल के भीतर ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि अधिक से अधिक बंदियों का कौशल विकास कर उन्हें भविष्य में एक जिम्मेदार और स्वावलंबी नागरिक बनाया जा सके।
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