कब क्या बोलना है, कैसे बोलना है, और कितना बोलना है

Posted On:- 2026-06-15




सुनील दास

राजनीति में दो पक्ष होते हैं, एक सत्ता पक्ष होता है और विरोधी पक्ष होता है। दोनों बोलते हैं और एक दूसरे के बोलने पर खूब बोलते हैं। राजनीति में बोलना जरूरी होता है,हर जगह बोलना पड़ता है,न चाहकर भी कोई सवाल पूछता है तो कुछ तो बोलना पड़ता है।सत्ता पक्ष के लोगों को बोलना जरूरी होता है,वह नहींं बोलेंगे तो आलोचना होगी और बोलने में चूक जाएंगे तो आलोचना होगी। नहीं बोलेंगे तो मीडिया आलोचना करेगा कि  मीडिया के सवालों का जवाब नही दिया जाता है। पद मिल गया है तो मीडिया का सम्मान नहीं करते हैं, सत्ता मिल गई है मीडिया का सम्मान करना बंद कर दिया है। मीडिया के सवालों का जवाब देने में चूके तो विपक्ष ताक में बैठा रहता है कि कोई मंत्री बोलने में चूक तो करे तो सरकार को घेरने का मौका मिले। किसी न किसी विधायक,सासंद, मंत्री से चूक हो ही जाती है और शुरू हो जाता है राजनीतिक बवाल का दौर।

भाजपा में नेताओं,कार्यकर्ताओं को आए दिन प्रशिक्षित किया जाता रहता है,उन्हें संगठन को मजबूत करने,जनता के सामने कैसा व्यवहार करने, जनता के बीच उनकी भाषा क्या होनी चाहिए आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।बड़े पद पर लोगों को अलग से  चतुराई से जवाब देने के प्रशिक्षण देने की जरूरत है क्योंकि उनको कई बार किसी सवाल का जवाब देते हैं तो यही पता नहीं रहता है कि उनको जवाब में क्या कहना है और वह क्या कहेंगे तो विवाद शुरू हो सकता है और सरकार और उसकी योजना पर सवाल उठाया जा सकता है।वह कहने से पहले सोचते नहीं है कि उनके किसी जवाब का विपक्ष क्या उपयोग कर सकता है।आबकारी मंत्री ने शनिवार को मीडिया से चर्चा करते हुए कहा था कि आबकारी व खनिज विभाग का राजस्व बढ़ रहा है,जिससे जनकल्याणकारी योजनाएं चल रहीं हैं।इस दौरान उन्होंने महतारी वंदन योजना और कृषक उन्नति योजना में किसानों को मिलने वाली राशि का उल्लेख किया था।आबकारी मंत्री ने सही कहा है कि आबकारी व खनिज विभाग का राजस्व बढ़ रहा है और इससे जनकल्याणकारी योजनाओं चल रही है।

उनसे चूक यह हुई है कि उनको यह नहीं कहना था कि आबकारी व खनिज विभाग का विभाग का राजस्व बढ़ रहा है,उनको तो इतना ही कहना था कि सरकार का राजस्व बढ़ रहा है या जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पैसाें का इंतजाम करने के लिए सरकार ने अपनी आय बढ़ाई है और आय बढ़ने के कारण जनकल्याणकारी योजनाओं को तहत लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उनको आबकारी राजस्व का नाम नहीं लेना था और महतारी वंदन योजना का जिक्र नहीं करना था। उनसे चूक यह हुई कि उन्होंने आबकारी राजस्व की नाम लिया और महतारी वंदन योजना का नाम लिया और विपक्ष को राजनीति करने का,सरकार को घेरने का, एक योजना को लेकर सवालिया निशान खड़ा करने और महिलाओं को भड़काने का मौका मिल गया। जब एक कलेक्टर के बयान को लेकर महिलाओं मे पहले से गुस्सा था कि शराब के राजस्व से ही महिलाओं को महतारी वंदन का पैसा दिया जाता है।ऐसे में मंत्री के बयान से कांग्रेस को राजनीति करने और महिलाओं काे भड़काने का मौका मिल गया और मौका मिलने पर कांग्रेस चूकती भी नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने सवाल उठाया है कि क्या छत्तीसगढ़ की माताओं,बहनों को मिलने वाली सम्मान राशि शराबियों की जेबों से आ रही है। महिलाओं काे आर्थिक रूप से सशक्त करने के ढोंग के बीच शराब की बिक्री तो बढ़ावा देकर उनके घरों को उजाड़ा जा रहा है।इससे महिलाओं में नाराजगी तो फैल सकती है क्योंकि राज्य की महिलाएं घर के लोगों के शराब पीने और घर में अशांति होने से परेशान हैं।अगर उनके बीच प्रचार किया जाए कि शराब की कमाई से नारी वंदन योजना का पैसा दिया जा रहा है तो कौन महिला ऐसा पैसा लेना पसंद करेंगी। कांग्रेस ने वादा किया था कि शराबबंदी का तो महिलाओं ने कांग्रेस को खूब सारा वोट दिया था। कांग्रेस ने शराबबंदी नहीं की तो महिलाओं ने कांग्रेस को वादाखिलाफी की सजा चुनाव में हराकर दी थी। कांग्रेस ने महिलाओं से वादाखिलाफी कर महिलाओं को नाराज किया था इसलिए सरकार के किसी मंत्री को ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए जिससे कांग्रेस को महिलाओं को भड़काने का मौका मिले और महिलाएं नाराज होकर सरकार के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा उन्होंने कांग्रेस सरकार के साथ किया है।

कोई भी सरकार हो उनको महिलाओं के किसी भी मामले में जरा सी भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। महिलाएं बहुत संवेदनशील होती हैं।उनसे जु़ड़े मामलों में सरकार को सबसे ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए। महिलाएं गुस्सा होती हैं तो वह माफ नहीं करती है। इसलिए उनको गुस्सा होने का कोई मौका नहीं देना चाहिए।साय सरकार से दूसरी यह चूक हुई है कि वह विभाग के अधिकारियों पर भरोसा करती है और वही अधिकारी सरकार की छवि को अपनी लापरवाही से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। महिला व बाल विकास विभाग को सामूहिक विवाह में महिलाओं को नकली चांदी के मंगलसूत्र देने की कोई जरूरत नहीं थी,उन्होंने मान लिया था कि वह जो कर रहे हैं,उसका किसी को पता नहीं चलेगा लेकिन वह भूल गए कि जब महिलाओं का पता चलेगा कि सरकार ने नकली चांदी का मंगलसूत्र दिया था तो यह तो हमेशा के लिए सरकार के दामन पर दाग लग जाएगा। अब कह रहे हैं कि चांदी महंगी हो गई थी इसलिए ऐसा किया. लापरवाही स्वीकार कर लेने से हमेशा कहा तो जाएगा कि सामूहिक विवाह में भाजपा सरकार के समय नकली चांदी का मंगलसूत्र दिया गया था। इससे तो विपक्ष को भी भाजपा सरकार की हंसी उड़ाने का मौका हमेशा के लिए मिल गया है।



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