चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में शुरू किया एसएसआर दलों को मिलेगी वोटर लिस्ट की आसान पीडीएफ

Posted On:- 2026-10-16





नई दिल्ली(वीएनएस)।विपक्ष के भारी विरोध के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए मतदाताओं के लिए स्पेशल समरी रिवीजन शुरू करने की घोषणा की है। साथ ही ECI ने राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की आसानी से पढ़ी जा सकने वाली PDF कॉपी देने का वादा किया है, जिससे Gen Z वोटर्स को राहत मिलेगी।
अपनी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया को लेकर हो रहे भारी विरोध के बीच, चुनाव आयोग ने दो ऐसे मुद्दों पर अपना रुख बदल लिया है, जिन पर लंबे समय से विपक्ष के साथ उसका टकराव चल रहा था। पिछले 24 घंटों में, दबाव का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) की घोषणा की है। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने पहली बार राजनीतिक दलों को अंतिम मतदाता सूची की ऐसी PDF कॉपी देने का वादा किया है जिसे आसानी से पढ़ा जा सके - जो कि उसके अपने ही पुराने रुख से एक बड़ा बदलाव है। वोटरगाइड देखें
हाल के वर्षों में विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने इन दोनों मुद्दों को बार-बार उठाया है। दूसरे ऐलान ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, क्योंकि 2018 में जब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, तब खुद चुनाव आयोग (ECI) ने निजता (प्राइवेसी) से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची जारी करने का विरोध किया था। यह समय काफी अहम है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग, खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। आरोप है कि मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) में गड़बड़ियां की गई हैं। पूरे देश में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के चलते 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं, जिससे भारी अफरा-तफरी मच गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR के कारण, चुनाव आयोग ने विशेष SSR प्रक्रिया को रोक दिया था, जिसके जरिए नए पात्र मतदाताओं (जिनमें 18 वर्ष के होने वाले लोग भी शामिल हैं) का पंजीकरण किया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि 'जेन Z' (Gen Z) मतदाता 2024-25 की SSR प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण नहीं करा सके, जिससे काफी नाराजगी पैदा हुई। आगे बढ़ने से पहले, मैं संक्षेप में बता दूँ कि SSR, SIR से किस तरह अलग है।
SIR एक अधिक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसमें नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज़ देने पड़ते हैं या पिछली मतदाता सूचियों से मिलान (मैपिंग) करना पड़ता है। SSR मतदाता सूचियों को अपडेट करने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की एक नियमित, वार्षिक प्रक्रिया है। इसलिए, मतदाताओं को खुद को पिछली विस्तृत पुनरीक्षण प्रक्रिया (intensive revision) से "मैप" करने की ज़रूरत नहीं होती। SIR के विपरीत, इसमें BLOs द्वारा घर-घर जाकर जाँच करने की प्रक्रिया शामिल नहीं होती है।



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