दुर्ग (वीएनएस)। जिले में श्रम विभाग अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का निरंतर लाभ प्राप्त करने के लिए श्रम कार्ड का ई-केवाईसी (e-KYC) एवं अद्यतन / संशोधन कराया जाना अनिवार्य किया गया है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभागीय डेटाबेस को आधार के अनुरूप सत्यापित एवं संधारित करना है ताकि वास्तविक व पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की राशि व सुविधाएं सीधे पहुंच सकें।
वर्तमान में श्रमिकों के डेटाबेस को आधार विवरण के अनुरूप अद्यतन करने हेतु कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) को अधिकृत किया गया है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में श्रम विभाग से संबंधित सी.एस.सी. संचालकों द्वारा जिले की ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। पंजीकृत श्रमिक इन शिविरों अथवा निकटतम सी. एस.सी. केंद्र में स्वयं उपस्थित होकर अपने आधार कार्ड के अनुसार श्रम कार्ड का संशोधन / ई-केवाईसी करा सकते हैं।
विभागीय नियमानुसार, ई-केवाईसी के माध्यम से प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक का विवरण आधार से लिंक किया जा रहा है। केवल ई. केवाईसी पूर्ण एवं अद्यतन श्रम कार्डधारी पात्र श्रमिक ही आगामी विभागीय योजनाओं के लाभ हेतु पात्र होंगे।
सहायक श्रमायुक्त ने जिले के समस्त पंजीकृत निर्माण श्रमिकों से अपील है कि वे समय रहते अपने निकटतम शिविर अथवा सी.एस.सी. केंद्र में जाकर अपने श्रम कार्ड का ई-केवाईसी एवं अद्यतन कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण कराएं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के मुड़पार गांव में कथित अवैध खैर लकड़ी परिवहन और फर्जी NOC के मामले में महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।
भारत रत्न एवं प्रख्यात संगीतकार, गायक, गीतकार और फिल्मकार डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी वर्ष पर मंगलवार को लोक भवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में सांस...
शिक्षक सप्ताह सेलिब्रेशन एवं अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पूर्व संध्या पर इनर व्हील क्लब ऑफ इंडिया, रायपुर कैपिटल ने शिक्षकों के सम्मान में अभिन...
विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के अंतर्गत 8 सितंबर से पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की शुरुआत हुई।
रायपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं वरिष्ठ जननेता बृजमोहन अग्रवाल को केंद्र सरकार द्वारा एक और महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।
धमतरी की प्राकृतिक खूबसूरती, जलाशयों और पहाड़ियों से लेकर मंदिरों, गांधीवादी इतिहास और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत तक—पर्यटन की बेशुमार संभावनाओं को...