पी चिदंबरम के 'मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व' बयान से बस्तर के पीड़ित आहत, पूछा-ये कैसा मज़ाक?

Posted On:- 2026-08-18




नई दिल्ली(वीएनएस)।छत्तीसगढ़ के बस्तर से आए माओवादी हिंसा के शिकार लोगों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व वाले बयान पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने इस बयान को बेतुका बताते हुए कहा कि यह हजारों पीड़ितों के दर्द का मज़ाक है, और ऐसे बयान एजेंडा बढ़ाने के बजाय शांति व विकास की राह में बाधा बनते हैं।
मंगलवार को माओवादी हिंसा के कई पीड़ितों ने कांग्रेस के सीनियर नेता पी चिदंबरम के दिमागी नक्सल होने पर गर्व है वाले बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ फ़ॉलोअर्स बढ़ाने या किसी तरह का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए। बस्तर शांति समिति की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में माओवादी हिंसा के शिकार रुद्रेश सिंह ने पत्रकारों से कहा कि सालों से नक्सली हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान गई है। नक्सली हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने शरीर के अंग गंवा दिए हैं और किसी तरह अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं। यह कोई मज़ाक नहीं है।
CRPF जवान सिंह उन सुरक्षाकर्मियों में से एक थे जो छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में नक्सल-विरोधी ऑपरेशन के दौरान माओवादियों के IED धमाके और गोलीबारी में घायल हो गए थे। उन्होंने कहा कि और इसी वजह से, आख़िरकार मुझे अपना एक पैर घुटने के नीचे से कटवाना पड़ा। सिंह ने आगे कहा कि दिल्ली में AC कमरे में बैठकर यह कहना कि 'मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है', पूरी तरह से बेकार की बात है। सिर्फ़ फ़ॉलोअर्स बढ़ाने या किसी तरह का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए।
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाक़े से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए नक्सल हिंसा के कई अन्य पीड़ितों ने भी चिदंबरम के बयान की कड़ी आलोचना की और कहा कि हम उनकी टिप्पणी से बहुत आहत हैं। रविवार को चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा था, "मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।" चिदंबरम का प्रधानमंत्री पर यह तंज मोदी की उस चेतावनी के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने देश को 'दिमागी नक्सलियों' के बारे में आगाह किया था। मोदी ने कहा था कि ये लोग सिस्टम में घुस गए हैं और नीतियों में हेर-फेर करके समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। मोदी ने नागरिकों से उन्हें पहचानने और अलग-थलग करने की अपील की थी।
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में नक्सली हिंसा के एक और पीड़ित सियाराम रामटेके ने चिदंबरम की टिप्पणी की आलोचना की और उनके इरादे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा? हम यहां इसलिए आए हैं क्योंकि हम उनकी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं कर सके। जब पूर्व गृह मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता होते हुए वे ऐसा बयान दे रहे हैं, तो हमारे साथ कौन खड़ा होगा? रामटेके ने कहा कि हम बच गए हैं और किसी तरह जी रहे हैं। हम 'दिमागी नक्सलियों' से कहना चाहते हैं कि हमें उसी दिशा में वापस नहीं जाना चाहिए। हमें शांति के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। बस्तर विकास चाहता है। सभी को इसका समर्थन करना चाहिए।



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