असम में बाढ़ से 105 की मौत, विस्थापित हुए हजारों लोग

Posted On:- 2026-08-18




गुवाहाटी(वीएनएस)।ASDMA की ताज़ा बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, 3,198.77 हेक्टेयर फसल क्षेत्र अभी भी पानी में डूबा हुआ है। कृषि भूमि के लगातार जलमग्न रहने से फसल के नुकसान और प्रभावित क्षेत्रों में किसान समुदायों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। लगभग 3,000 लोग अभी राहत शिविरों और राहत वितरण केंद्रों में रह रहे हैं, जबकि अधिकारी राहत कार्य जारी रखे हुए हैं और बाढ़ प्रभावित निवासियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (DRIMS) के अनुसार, इस साल अब तक असम में बाढ़ से 105 लोगों की मौत हो चुकी है और पांच जिलों में लगभग 32,000 लोग अभी भी प्रभावित हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में मरने वाले 105 लोगों में से 64 पुरुष, 24 महिलाएं और 17 बच्चे हैं। राज्य में बाढ़ से जुड़ी मौतों की सबसे अधिक संख्या शिवसागर में दर्ज की गई है, जहां 53 लोगों की मौत हुई है। चराइदेव में 22 मौतें हुई हैं, जबकि जोरहाट में नौ, गोलाघाट में आठ, कार्बी आंगलोंग में चार और धेमाजी में तीन लोगों की मौत हुई है। ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि बाढ़ की स्थिति राज्य भर में हज़ारों लोगों को प्रभावित कर रही है। पाँच ज़िलों में लगभग 32,000 लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
ASDMA की ताज़ा बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, 3,198.77 हेक्टेयर फसल क्षेत्र अभी भी पानी में डूबा हुआ है। कृषि भूमि के लगातार जलमग्न रहने से फसल के नुकसान और प्रभावित क्षेत्रों में किसान समुदायों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। लगभग 3,000 लोग अभी राहत शिविरों और राहत वितरण केंद्रों में रह रहे हैं, जबकि अधिकारी राहत कार्य जारी रखे हुए हैं और बाढ़ प्रभावित निवासियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं।
इस साल बाढ़ का दायरा काफी बड़ा रहा है। साल के दौरान अलग-अलग समय पर 25 ज़िलों और 2,734 गाँवों में 12 लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। असम अपने व्यापक नदी नेटवर्क के कारण मानसून के दौरान हर साल आने वाली बाढ़ के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है; भारी बारिश के बाद ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ अक्सर उफान पर आ जाती हैं। बाढ़ नियमित रूप से राज्य भर के गाँवों, खेतों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढाँचों को प्रभावित करती है। बार-बार आने वाली बाढ़ हज़ारों निवासियों, खासकर निचले और नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और राहत शिविरों व सरकारी सहायता पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करती है।
हज़ारों लोगों के प्रभावित होने और 3,000 हेक्टेयर से ज़्यादा कृषि भूमि के पानी में डूबे होने के कारण, अधिकारी प्रभावित ज़िलों में स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। बाढ़ से विस्थापित या प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास के उपाय किए जा रहे हैं।
इस साल दर्ज की गई मौतों की अधिक संख्या ने एक बार फिर वार्षिक मानसून सीज़न के दौरान असम के समुदायों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और नदियों व अन्य जल निकायों में जल स्तर की निगरानी कर रहे हैं।



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