नितिन गड़करी का मास्टर प्लान: भारत में चलेंगी फ्लाइंग बसें, ₹22 लाख करोड़ के फ्यूल इम्पोर्ट को कम करने की तैयारी

Posted On:- 2026-07-15




लखनऊ(वीएनएस)।समारोह में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि जल्द ही, मैं फ्लाइंग बसें (उड़ने वाली बसें) शुरू करने जा रहा हूँ।एक तरफ जहां केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के केंद्र में हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने देश की मोबिलिटी को बदलने के लिए अपने अगले बड़े आइडिया पर काम शुरू कर दिया है। यह नया विचार है भारतीय शहरों के लिए 'फ्लाइंग बसें' (उड़ने वाली बसें)। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गडकरी ने देश के तेजी से बढ़ते शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए एक इलेक्ट्रिक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के हिस्से के रूप में "फ्लाइंग बसें" शुरू करने की योजना का एलान किया। समारोह में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि जल्द ही, मैं फ्लाइंग बसें (उड़ने वाली बसें) शुरू करने जा रहा हूँ। मैं पहले ही ऐसे सीप्लेन (Seaplanes) ला चुका हूँ जो पानी पर उतर सकते हैं। मैंने खुद भी एक सीप्लेन को समुद्र में लैंड कराया था। अब मेरे मंत्रालय के तहत, मैं बिजली से चलने वाला एक मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करूँगा। यह तकनीक लोगों को एक कोने से दूसरे कोने तक इतनी तेजी से पहुँचाएगी कि उन्हें खुद अहसास नहीं होगा कि वे कितनी जल्दी अपनी मंजिल पर पहुँच गए। 

E20 पेट्रोल विवाद पर गडकरी

E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित ईंधन) को लागू करने को लेकर हो रही आलोचना और इस शिकायत के बीच कि इससे गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी (ईंधन दक्षता) कम हो जाती है, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले हफ्ते आलोचकों को चुनौती दी कि वे ऐसी एक भी गाड़ी का नाम बताएं जिसमें इस ईंधन की वजह से कोई समस्या आई हो। विकसित भारत कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता आर्थिक बोझ और पर्यावरणीय चुनौती, दोनों है। उन्होंने बताया कि देश हर साल ईंधन आयात पर लगभग ₹22 लाख करोड़ खर्च करता है। उन्होंने कहा E20 पेट्रोल की वजह से किसी कार में कोई समस्या आने का मामला सामने नहीं आया है। क्या देश में कोई ऐसी कार है जिसमें E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कोई दिक्कत आई हो? बस एक का नाम बताइए। भौगोलिकसंदर्भ

कच्चे तेल के आयात और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए, भारत ने गन्ने, मक्के और चावल जैसे बायोमास से बने इथेनॉल का इस्तेमाल करके पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है। न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक, क्लीन मोबिलिटी के क्षेत्र में हाइड्रोजन को भविष्य की अहम तकनीक बताते हुए गडकरी ने कहा कि वे खुद कई वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं और उन्होंने लोगों से इस तकनीक का खुद अनुभव करने का आग्रह किया। 




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