मांग एक है पर कांग्रेस सीजेपी का साथ नहीं दे रही

Posted On:- 2026-07-15




सुनील दास

राजनीति में एक सत्ता पक्ष होता है और एक विपक्ष होता है। जो सत्ता पक्ष के साथ नहीं होता है, वह विपक्ष के साथ होता है। जब भी सरकार के खिलाफ कोई बड़ा व देशव्यापी मुद्दा सामने आता है तो विपक्ष के सारे दल, सारे राजनीतिक व गैरराजनीतिक संगठन एक हो जाते है और बड़ा प्रभावी आंदोलन करते है,ऐसे बड़े व व्यापक आंदोलन का असर भी होता है,ऐसे आंदोलनों के कारण कई बार देश में सत्ता भी बदलती है,सरकार को झुकना पड़ता है,विपक्षी दलों व गैरराजनीतिक संगठनों की मांग को मानना पड़ता है। काकरोच जनता पार्टी एक ऐसा ही संगठन है जो नीट पेपर लीक के मामले में सरकार से मांग कर रहा है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए।कांग्रेस भी नीट पेपर लीक को लेकर मांग कर रही है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। सीजेपी ने जंतर मंतर में इस मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है, इसे दो तीन सप्ताह हो गए हैं, सीजेपी की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक १८ दिन से भूख ह़ड़ताल कर रहे हैं। विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार के बात न करने को लेकर वांगचुक से अपील की है वह अपना अनशन समाप्त कर दें। लेकिन कांग्रेस ने अब तक सीजेपी के आंदोलन को लेकर एक शब्द समर्थन मे नहीं कहा है जबकि दोनों की मांग एक है कि शिक्षा मंत्री प्रधान इस्तीफा दें।

सीजेपी एक जज की टिप्पणी के विरोध में बना संगठन है, इसके नेता को सोशल मीडिया में मिल रहे समर्थन से वहम हो गया था कि वह किसी ऐतिहासिक आंदोलन का नेेतृत्व कर रहे हैं।लाखों लोगों ने संगठन का समर्थन किया तो लगा कि उनका आंदोलन सफल हो गया है।उन्होंने मान लिया कि वह जंतर मंतर में धऱना देंगे तो देश भर से लाखों युवा उनके धरना प्रदर्शन में शामिल होंगे, विपक्ष उनका समर्थन करने को मजबूर होगा और सरकार को उनकी मांग माननी पड़ेगी।सीजेपी का जंतर मंतर पर धऱना प्रदर्शन को १८ दिन से ज्यादा हो गए हैं, एक भी विपक्ष का बड़ा नेता ने जैसे राहुल गांधी जंतर मंतर पर जाकर उनके साथ खड़ा नहीं हुआ है। हां सोशल मीडिया के जरिए समर्थन जरूर कुछ नेता कर रहे हैं।सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके वांगचुक की जगह भूख हड़ताल करते तो युवाओं पर उसका ज्यादा असर होता उनके सामने नहीं आने का फायदा वांगचुक ने उठाया है और वह पहले भी भूख हड़ताल करते रहे हैं और जानते हैं कि भूख हड़ताल करने पर उनका खूब प्रचार होगा। यही हो रहा है अभी अभिजीत दीपके की चर्चा कम वागंचुक की चर्चा ज्यादा हो रही है। नेता अभिजीत हैं लेकिन नेता के रूप में प्रचारित तो वांगचुक हो रहे हैं, विपक्ष अऩशन करने पर उनकी चिंता कर रहा है।अभिजीत को मजबूरी मे वांगचुक का साथ लेना पड़ रहा है क्योंकि सीजेपी का धरना प्रदर्शन में तो लोगों की भीड़ जुट नहीं रही है लेकिन वांगचुक के अनशन के कारण सीजेपी चर्चा में तो है।

सवाल उठता है कांग्रेस नेता राहुल गांधी सीजेपी व वांगचुक के अनशन को लेकर चुप क्यों है क्योंकि वह तो नेता प्रतिपक्ष है, उनको तो विपक्ष के हर नेता के आंदोलन का समर्थन मौके पर जाकर करना चाहिए।विपक्ष के कई नेता कह भी रहे हैं कि राहुल गांधी को जंतर मंतर जाकर सीजेपी और वांगचुक के अनशन का समर्थन करना चाहिए। राहुल गांधी खुद भी गूंज के जरिए इसी मुद्दे पर छात्रों के बीच जाकर नीट पेपर लीक व प्रधान के इस्तीफे पर जोर दे रहे हैं यानी राहुल गांधी खुद को जेन जी  के नेता के रूप में स्थापित करना  चाहते है और बांग्लादेश,नेपाल,श्रीलंका जैसा जेन जी आंदोलन नीट पेपर लीक व प्रधान के इस्तीफे को लेकर करना चाहते हैं। राहुल गांधी तो कई महीनो से सपना देख रहे हैं कि भारत का जेन भी किसी मुद्दे पर तो आंदोलन करे और उनकाे भाजपा व मोदी को सत्ता से हटाने का मौका मिले। लेकिन महीनों बाद भी भारत के जेन जी ने ऐसा कुछ नहीं किया है।

नीट पेपर लीक हुआ तो राहुल गांधी को लगा अब मौका आया है जेन जी जरूर देश में ऐसा आंदोलन करेगा कि मोदी सरकार मुश्किल में पड़ जाएगी।वह छात्रों के बीच जाकर मोदी सरकार के खिलाफ माहौल भी बना रहे थे लेकिन अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक को लेकर सीजेपी का गठन कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। अभिजीत दीपके युवाओं का नेता बन गया,उसे सोशल मीडिया में लाखों लोगों का समर्थन मिलने लगा।इससे राहुल गांधी के जेन जी का अकेला नेता बनने के रास्ता बंद हो गया क्योंकि अभिजीत भी तो जेन जी का ही नेता है। एक आंदोलन का एक नेता हो सकता है, यही वजह है  राहुल गांधी अभिजीत दीपके व सीजेपी का समर्थन नहीं कर रहे है।वह अलग से अपना आंदोलन चला रहे हैं। राहुल गांधी व कांग्रेस को डर है कि यदि कांग्रेस व राहुल गांधी अभिजित दीपके के आंदोलन का समर्थन करते हैं तो वह बड़ा नेता बनकर राहुल गांधी व कांग्रेस को ही भविष्य में नुकसान पहुंचा सकता है जैसा अन्ना आंदोलन से निकले आमआदमी पार्टी ने नुकसान पहुंचाया था।

सब जानते हैं कि अन्ना आंदोलन इसलिए सफल हुआ था,अन्ना एक बड़े साफसुथरी छबि के ईमानदार नेता थे,कई आंदोलन कर चुके थे और सरकार का उनकी बात माननी पड़ती थी।उनका आंदोलन भ्रष्टाचार जैसे बड़े मुद्दे को लेकर था और देश विदेश से उनको इसके लिए समर्थन मिला था।उन्होंने भी अनशन किया था,उनके अनशन का असर हुआ था,तब के विपक्ष भाजपा ने यूपीेए सरकार के खिलाफ अन्नाआंदोलन का पूरा समर्थन किया था और इसी आंदोलन के असर के कारण यूपीए की चुनाव में हार हुई थी और २०१४ का चुनाव भाजपा जीती थी, पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी।वांगचुक अन्ना हजारे नहीं है,उनको पूरे देश में कोई जानता नहीं है।अभिजीत दीपके भी कोई जमीन से जुड़े नेता नहीं है, वर्तमान की प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस उसके साथ खड़ी नहीं हो रही है इसलिए सीजेपी के आंदोलन व वांगचुक के अनशन असर देश पर कोई खास नहीं पड़ा है।दिल्ली में कोई आंदोलन तब ही सफल होता है जब दिल्ली सहित आसपास के राज्यों से लोगों की भीड़ जुटती है। सीजेपी के आंदोलन में दिल्ली के लोग ही नहीं आ रहे हैं। इससे भी आंदोलन बडा आंदोलन बन नहीं रहा है और माना भी नहीं जा रहा।



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