स्कूलों में जारी रहेगी सरस्वती वंदना,मंत्रोच्चार भी होगा

Posted On:- 2026-07-03




सुनील दास

किसी भी प्रदेश में कई राजनीतिक दल होते हैं,सबकी अपनी अपनी विचारधारा होती है।अलग-अलग धर्म,संप्रदाय,जाति,भाषा के नेता होते हैं, उनकी अपनी मान्यता होती है,अपनी सोच होती है।सरकार कुछ भी करती है तो उसे लेकर दो तरह की ही प्रतिक्रिया सामने आती है।एक प्रतिक्रिया होती है,विरोध की यानी सरकार अच्छा करे तो भी विरोध करना है और बुरा करना है तो भी विरोध करना है। यानी ऐसे लोगों की मानसिकता होती है कि सरकार कुछ भी अच्छा नहीं कर सकती है, वह गलत करती है और उसके हर काम को गलत कहना हमारा कर्तव्य है। एक पक्ष होता है जो सरकार के काम को अच्छा कहता है, उसकी तारीफ करता है और बताने की कोशिश करता है कि सरकार के इस काम से राज्य व राज्य के लोगों को क्या फायदा होगा।राज्य सरकार ने शिक्षा के नए सत्र से स्कूलों में सरस्वती वंदना व कई तरह के मंत्र पढ़ने की शुरुआत की है। इसका मकसद बच्चों को अच्छा संस्कार देना है,उनकी मानसिक एकाग्रता को बढ़ाना है ताकि वह स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई करें।

भाजपा कुछ करती है तो कांग्रेस का परम धर्म है कि वह उसे गलत साबित करे,सरकार ने नए सत्र में सरस्वती वंदना और मंत्रोच्चार शुरू करने का सबसे पहले कांग्रेस ने विरोध किया कि भाजपा सरकार संघ का एजेंडा स्कूलों में लागू कर रही है।राज्य के सरकारी स्कूलों को सरस्वती शिशु मंदिर बनाया जा रहा है।कांग्रेस को वहम रहा है कि उसकी धर्मनिरपेक्षता की नीति ही सबसे अच्छी नीति है लेकिन जनता ने भाजपा को ज्यादातर चुनावों में जिताकर कांग्रेस की यह गलतफहमी दूर कर दी है कि धर्मनिरपेक्षता की नीति से ही देश व जनता का भला हो सकता है।साथ ही यह भी बता दिया है कि भाजपा सरकार भी जो कुछ करती है उससे भी देश व देश,राज्यों व जनता का भला हुआ है और आगे भी हो सकता है।कांग्रेस स्कूलों में सरस्वती वंदना व मंत्रोच्चार का विरोध बयानों तक सीमित रही। यानी विपक्ष का धर्म उसने बयान देकर पूरा कर दिया। 

कांग्रेस से दो कदम आगे कुछ लोग निकल गए और स्कूलों में सरस्वती वंदना व मंत्रोच्चार को असंवैधानिक मानते हुए हाईकोर्ट चले गए।उनको उम्मीद थी कि सरकार के इस कदम को हाईकोर्ट जरूर गलत मानेगा लेकिन उनको हाईकोर्ट के फैसले से निश्चित निराशा हुई होगी क्योंकि इस मामले में होईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है और साफ कर दिया है कि राज्य की साय सरकार स्कूलों में सरस्वती वंदना व मंत्रोच्चार की शुरूआत करके कोई गलत काम नहीं किया है।राज्य सरकार ने प्रदेश के स्कूलों में सरस्वती वंदना व मंत्रोच्चार शुरू करने के लिए पत्र जारी किया था।इसे चुनौती देते हुए छग राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलीम रिजवी व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। याचिका में कहा गया था कि स्कूल शिक्षा विभाग का यह आदेश भारत के संविधान का उल्लंघन करता है। मुस्लिम,ईसाई धर्म में भी अच्छी बातें लिखी हैं लेकिन सिर्फ हिंदू धर्म के मंत्रों का उच्चार स्कूलों में कराया जा रहा है।

वित्तपोषित संस्थानों में धार्मिक शिक्षा का अनुष्ठान नहीं कराए जा सकते।यह संविधान के अनुच्छेद २८ की भावना के विपरीत है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि स्कूल वैज्ञानिक दृष्टिकोण के केंद्र होने चाहिए,न कि किसी विशेष धर्म परंपरा के प्रचार का माध्यम होने चाहिए।मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया गया कि अभी किसी स्कूल में मंत्रोच्चार नहीं कराया जा रहा है, बाद में स्कूलों में सरस्वती वंदना और मंत्रोच्चार कराया भी जाएगा तो वह सभी के लिए बाध्यकारी नहीं होगा। यानी जिसको करना है करे जिसको नहीं करना है नहीं करे।शासन के इस जवाब के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ.आमिर खान से कहा कि स्कूलों मेें मंत्रोच्चार के लिए किसी का बाध्य नहीं किया जाएगा। अगर इसके बाद भी कहीं मंत्रोच्चार के लिए दबाव डाला जाता है तो आप सबूत के साथ फिर याचिका पेश कर सकते हैं और याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।

सरस्वती वंदना यानी ज्ञान की देवी से प्रार्थना की जाती है कि हमे ऐसा ज्ञान दो कि हम अच्छे रास्ते पर चलें।यह कोई बुरी बात तो नहीं है,सब धर्म में आदमी यही प्रार्थना तो करता है कि मुझे अच्छे बुरे का ज्ञान रहे और मै अच्छे कर्म करूं।स्कूल में गायत्री मंत्र का पाठ करने को कहा जाता है तो माना जाता है कि गायत्री मंत्र का पाठ करने से मानसिक शांति,एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।इसे पढ़ने से स्मरण शक्ति,बुध्दि और निर्णय करने की क्षमता बेहतर होती है।यानी छात्र किसी भी जाति धर्म का हो उसे यह फायदा होगा तो यह बुरा कैसे हो सकता है।इसी तरह भोजन का मंत्र है, इससे भोजन के प्रति सम्मान का भाव पैदा होता है तो इसमें बुरा क्या है।सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नया प्रयोग कर रही है और बता रही है कि इससे फायदा होगा तो इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए कि इससे फायदा होता है और कितना होता है।किसी को नुकसान तो होगा नहीं फिर विरोध की क्या जरूरत है।



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