किसी भी अच्छी सरकार के लिए जो पैमाना होता है, उसमें कई बातों के अलावा इस बात पर खास जोर दिया जाता है कि उसने रोजगार व स्वरोजगार के लिए क्या किया। बेरोजगारी किसी राज्य व देश में आजादी के बाद से गंभीर समस्या रही है कि क्योंकि हमारे यहां जनसंख्या बहुत ज्यादा है और सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उससे कम रहते है, इससे देश हो या कोई राज्य हो,वहां रोजगार की समस्या तो रहती ही है। इसलिए हर राज्य की सरकार को अच्छी सरकार की कसौटी पर कसने के लिए यह जरूर देखा जाता है कि सरकार ने रोजगार व स्वरोजगार के लिए क्या कुछ किया है।रोजगार व स्वरोजगार ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ते हैं तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत होना जरूरी होता है।यही वजह है साय सरकार ने भी अन्य सरकारों की तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए रोजगार व स्वरोजगार को बढ़ावा देने का फैसला किया है ताकि यहां के लोगों की आय बढ़े,उनका जीवनस्तर ऊंचा हो,राज्य विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में केंद्र सरकार का पूरा सहयोग कर सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए साय सरकार ने तीन फैसले किए हैं।कैबिनेट की बैठक में फैसला किया गया है कि ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को हर साल १२५ दिन काम वीजी जीरामजी योजना के तहत निश्चित रूप से दिया जाएगा,इसके अलावा गांवों में अटल आजीविका समृध्दि हाट स्थापित किए जाएंगे।नई कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) नीति-२०२६ को मंजूरी दी गई है।कोई भी योजना जब केंद्र व राज्य के सहयोग चलाई जाती है तो और दोनों जगह एक ही दल की सरकार को हो योजना के सफल होने के ज्यादा मौके रहते है क्योंकि इससे दोनों एक दूसरे का सहयोग करते हैं इससे दोनों को लाभ होता है और जनता को भी इसका फायदा होता है।विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीजी जीरामजी योजना में राज्य के पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में १२५ दिन अकुशल श्रम आधारित रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
इसमें राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है इससे फायदा यह होगा कि राज्य सरकार इस योजना के सफल क्रियान्वयन की और पहले से ज्यादा ध्यान देगी। पहले पूरा पैसा केंद्र को होने के कारण राज्य सरकारे इस योजना का लाभ लोगों तक पहुंचान ज्यादा ध्यान नहीं देती थी। अब राज्य का खुद का पैसा लगेगा तो राज्य इस पर गंभीरता से अमल हो इस ओर पूरा ध्यान देगा तो लोगों को ज्यादा लाभ मिलेगा। पहले पैसे के केंद्र से आने का इंतजार किया जाता था, अब पैसे का प्रावधान राज्य के बजट में होने से पैसे का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।पैसे से संबंधित जो दिक्कतें पहले होती थी अब नहीं होंगी।राज्य सरकार ने बजट में इसके लिए ४हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। यानी जीरामजी योजना के तहत चार हजार करोड़ के रुपए के काम कराए जाएंगे,इसमें जल सरंक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन,ग्रामीण आधारभूत ढांचे का निर्माण और आजीविका परिसंपत्तियाें के जुड़े विकास कार्य कराए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इसका कई तरह से लाभ मिलेगा।
किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए कई तरह के कारोबार की जरूरत होती है और काराेबार की सफलता के लिए एक बाजार का होना भी जरूरी होता है किसी क्षेत्र में कई तरह के काराेबार रहने से कारोबार नहीं बढ़ता है,कारोबार को बढ़ावा देने के लिए बाजार भी जरूरी होता है।बाजार होने से कारोबार बढ़ता है, खरीदार खरीदारी के लिए आते हैं। साय सरकार की अटल हाट से क्षेत्र का कारोबार बढ़ेगा।ग्रामीण क्षेत्र में उत्पादन,प्रसंस्करण,विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अटल आजीविका समृद्दि योजना शुरू करेगी.इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में हथकरघा,बुनाई,सिलाई,हस्तशिल्प,जैसे सृजन केंद्र,दलहन-तिलहन प्रसंस्करण इकइयां,कोल्ड स्टोरेज व अटल डिजिटल केंद्र स्थापित किए जाएँगे। वहीं नई कंप्रेस्ट बायोगैस नीति-२६ से कृषि अवशेष,नगरीय ठोस अपशिष्ट,पशुधन अपशिष्ट व अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन का उत्पादन किया जाएगा।इससे अपशिष्ट प्रबंधन सुधरेगा व ग्रीम हाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे कई तरह की समस्याओं का समाधान हो सकेगा।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से तीन समस्याएं ऐसी रही हैं जिनके समाधान की जरूरत थी और कई राज्य सरकारों के प्रयास के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था।.यह तीन पुरानी समस्याएं हैं गांवों से लोगों का रोजगार के लिए पलायन,उत्पादों की कम कीमत मिलना,कृषि अवशेष के निस्तारण नहीं होना।साय सरकार की नई नीति से लोगों को रोजगार मिलेगा,इससे आय बढ़ेगी, लोगों का पलायन नहीं होगा।ग्रामीण क्षेत्र में उत्पादकों के सामने अपने उत्पादन के भंडारण की समस्या होती थी, इससे उनको कम दाम पर अपना सामान बेचना पड़ता था, भंडारण व कोल्डस्टोरेज की व्यवस्था होने लोगों को उत्पादों का ज्यादा दाम मिलेगा। जहां तक बायो गैस उत्पादन का सवाल है तो ईरान अमरीका युध्द के दौरान ऊर्जा के दूसरे विकल्पों की जरूरत महसूस हुई और बायोगैस बनने गांवों में कम से कम ऊर्जा संकट के समय ऊर्जा की कमी तो नहीं होगी। इससे एलपीजी खपत में कमी आएगी।फिर कभी ऊर्जा संकट आया तो राज्य उसके लिए तैयार रहेगा और राज्य पर उस संकट का असर कम होगा।साय सरकार के प्रयासों राज्य को विकसित राज्य बनाने में सफलता मिलेगी और राज्य सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने मे मोदी सरकार का पूरा सहयोग कर सकेगी।
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