बिहान की मदद से बदली जिंदगी, सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं अनीता

Posted On:- 2026-06-09




कोरिया (वीएनएस)। कोरिया जिले की एक साधारण गृहिणी अनीता ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' की सहायता से उन्होंने सेंट्रिंग प्लेट किराये पर देने का व्यवसाय शुरू किया और आज वे अपने क्षेत्र में सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम आमापारा की रहने वाली अनीता अब आसपास के गांवों में 'सेंट्रिंग' प्लेट वाली 'अनीता दीदी' के नाम से जानी जाती हैं।

आर्थिक चुनौतियों से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर : 

विवाह के बाद अनीता का पारिवारिक जीवन आर्थिक कठिनाइयों से घिरा हुआ था। कृषक परिवार की सीमित आय में परिवार की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में उन्होंने लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।

बिहान योजना के ऋण ने खोले रोजगार के नए द्वार : 

स्व.सहायता समूह से जुड़ने के बाद अनीता को बिहान योजना के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने सेंट्रिंग प्लेट खरीदी और उसे किराये पर देने का कार्य शुरू किया। शुरुआती दौर में ग्राहकों तक पहुंच बनाना आसान नहीं था, लेकिन लगातार प्रयास और धैर्य के बल पर उन्होंने अपने व्यवसाय को स्थापित कर लिया।

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला व्यवसाय को विस्तार : 

गांव में बड़ी संख्या में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण कार्य ने अनीता के व्यवसाय को नई गति दी। छत ढलाई जैसे निर्माण कार्यों में सेंट्रिंग प्लेट की मांग बढ़ने से उन्हें लगातार काम मिलने लगा। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और व्यवसाय स्थिरता की ओर बढ़ा।

निरंतर आय से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति : 

अनीता बताती हैं कि शुरुआत में ऋण लेकर खरीदी गई सेंट्रिंग प्लेटों से मिलने वाली आय को उन्होंने दोबारा व्यवसाय में निवेश किया। धीरे.धीरे प्लेटों की संख्या बढ़ाई और आज उनका व्यवसाय अच्छी तरह संचालित हो रहा है। वर्तमान में वे हर माह सभी खर्चों के बाद लगभग 10 से 15 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा : 

अनीता नियमित रूप से खराब हो चुकी प्लेटों को बदलती रहती हैंए ताकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनी रहे और प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को मजबूत एवं सुंदर पक्के मकान मिल सकें। उनकी सफलता की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है, जो यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और अवसर मिलने पर महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त होकर परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।



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