नई दिल्ली (वीएनएस)। देश में बढ़ती बिजली मांग और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतों के बीच रूफटॉप सोलर (छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र) तेजी से लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की नई रिपोर्ट के अनुसार, रूफटॉप सोलर अपनाने के इच्छुक 81 प्रतिशत परिवारों ने बिजली बिल में कमी को इसका सबसे बड़ा लाभ बताया है। वहीं, जिन परिवारों ने सोलर सिस्टम स्थापित किया है, उनके बिजली बिल में औसतन 71 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PMSGY) के शुरू होने के बाद देश में आवासीय रूफटॉप सोलर की विकास दर में उल्लेखनीय तेजी आई है। वर्ष 2017 से 2023 के बीच जहां यह वृद्धि दर 45 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) थी, वहीं 2024 से 2026 के दौरान यह बढ़कर 85 प्रतिशत CAGR तक पहुंच गई है।
17 हजार से अधिक परिवारों पर आधारित अध्ययन
CEEW का यह अध्ययन प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं की सोच और अनुभवों को समझने के लिए किया गया पहला राष्ट्रीय सर्वेक्षण है। इसमें देश के 22 राज्यों के 308 जिलों में 17 हजार से अधिक परिवारों से बातचीत की गई। अध्ययन में यह जानने की कोशिश की गई कि लोग रूफटॉप सोलर को कैसे देखते हैं, इसे अपनाने का निर्णय कैसे लेते हैं और किन चुनौतियों का सामना करते हैं।
बढ़ रही जागरूकता, लेकिन अपनाने की प्रक्रिया में बाधाएं
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के 57 प्रतिशत परिवारों को रूफटॉप सोलर के लाभ और इसकी उपयोगिता की जानकारी है। हालांकि, जागरूकता बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग आवेदन, वित्तीय सहायता, वेंडर चयन और स्थापना जैसी प्रक्रियाओं को लेकर असमंजस में रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों की रुचि को वास्तविक स्थापना में बदलने की है। इसके लिए सरल प्रक्रियाएं, भरोसेमंद जानकारी और वित्तीय विकल्पों की स्पष्ट समझ जरूरी होगी।
पांच राज्य सबसे आगे
देश में रूफटॉप सोलर स्थापना के मामले में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केरल सबसे आगे हैं। इन पांच राज्यों का राष्ट्रीय स्थापित क्षमता में 70 प्रतिशत से अधिक योगदान है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि अन्य राज्यों में भी इसी तरह जागरूकता और सहायता तंत्र विकसित किया जाए तो सौर ऊर्जा विस्तार को नई गति मिल सकती है।
वित्तीय जानकारी की कमी बड़ी चुनौती
अध्ययन में सामने आया कि जिन परिवारों ने रूफटॉप सोलर को महंगा बताया, उनमें से लगभग 75 प्रतिशत उपलब्ध ऋण और फाइनेंसिंग विकल्पों की जानकारी से अनजान थे। वहीं, जागरूक होने के बावजूद सोलर नहीं अपनाने वाले 26 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि यदि उन्हें कम ब्याज दर, लंबी पुनर्भुगतान अवधि और बिना गारंटी वाले ऋण उपलब्ध हों तो वे इस विकल्प पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावी जनजागरूकता और भरोसेमंद संवाद के जरिए करीब 66 गीगावाट अतिरिक्त संभावित मांग को वास्तविक स्थापना में बदला जा सकता है।
उपभोक्ता अनुभव बने सबसे बड़े प्रचारक
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि रूफटॉप सोलर लगाने वाले अधिकांश उपभोक्ता इसके लाभों से बेहद संतुष्ट हैं। सर्वेक्षण में शामिल 93 प्रतिशत से अधिक लोगों ने बिजली बिल में हुई बचत पर संतोष जताया, जबकि 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे दूसरों को भी अपने सोलर वेंडर की सिफारिश करने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुष्ट उपभोक्ता स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा के सबसे प्रभावी प्रचारक बन सकते हैं और नए परिवारों को इस दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।
क्या हैं प्रमुख सुझाव?
रिपोर्ट में रूफटॉप सोलर को और गति देने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से भरोसेमंद संवाद, आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना, वेंडर चयन में सहायता, कम ब्याज वाले ऋण विकल्पों की जानकारी, ईएमआई और निवेश वापसी अवधि की स्पष्ट जानकारी तथा आरडब्ल्यूए, ग्राम सभाओं और सामुदायिक बैठकों के जरिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
बढ़ती बिजली मांग के बीच अहम भूमिका
देश में इस वर्ष बिजली की अधिकतम मांग करीब 270 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि रूफटॉप सोलर जैसे विकेंद्रीकृत ऊर्जा स्रोत न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल कम करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय बिजली तंत्र पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पीएम सूर्य घर योजना के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश के ऊर्जा परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
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