रायपुर (वीएनएस)। खैरागढ़ की मनोहर गौशाला जैव विविधता संरक्षण का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है। यहां पिछले 12 वर्षों से तालाब निर्माण, हरित क्षेत्र विकास और प्राकृतिक खेती के जरिए धरती को बचाने का काम हो रहा है। गौशाला में तैयार जैविक उत्पाद खेती को रसायनमुक्त बना रहे हैं। संस्था का मानना है कि जैव विविधता बचाना केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि लगातार निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है, जिसका असर अब आसपास के गांवों में दिखने लगा है।
मनोहर गौशाला ने पर्यावरण संरक्षण को अपने रोजमर्रा के काम में शामिल किया है। यहां एक दशक से ज्यादा समय में तालाब बनाए गए और हरित क्षेत्र विकसित किए गए, जिससे पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं के लिए बेहतर वातावरण तैयार हुआ। “फसल अमृत” और “मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड” जैसे उत्पाद किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर ला रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो रही है। गौशाला किसानों को प्रशिक्षण भी देती है, जिससे गांवों में जैव विविधता को बचाने की सोच मजबूत हो रही है।
जैव विविधता का सीधा असर
जैव विविधता सिर्फ पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है। इसमें मिट्टी, पानी और जीव-जंतु सभी शामिल हैं। मनोहर गौशाला के मॉडल से आसपास के क्षेत्रों में जल स्तर सुधरा है और खेती की गुणवत्ता बेहतर हुई है। किसान अब कम लागत में ज्यादा उत्पादन ले रहे हैं। इससे पर्यावरण और आर्थिक दोनों फायदे मिल रहे हैं।
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