सरकार के कामकाज से ही जनता को पता चल जाता है कि सरकार कैसी है। सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ है तो जनता को इस बात का पता पड़ने वालों छापों से चल जाता है। छापों से ही पता चल जाता है कि सरकार छापे मारने में कोई भेदभाव नहीं कर रही है। किसी को छोड़ा या बचाया नहीं जा रहा है। आम तौर पर माना जाता है जिस राजनीतिक दल की सरकार होती है उसके बड़े नेताओं का नेताओं के यहां भ्रष्टाचार के मामले में छापा नहीं मारा जाता है, उनको बचाने के सरकार के पास कई तरह के उपाय होते हैं। उन उपायों से राजनीतिक दल अपने बड़े नेताओं को सरकार के रहते बचा लेते हैं यानी सरकार ही खुद अपने नेताओं की रक्षा करनेवाली होती है। ऐसे नेताओं पर जब कोई कार्रवाई नहीं होती है तो जनता समझ जाती है कि यह सरकार अपने भ्रष्ट नेताओं व समर्थकों को बचाने वाली है।
राज्य में कांग्रेस की सरकार ऐसी ही सरकार मानी जाती है जो अपने नेताओं व समर्थकों को खुल कर बहती गंगा में हाथ धोने का मौका देती थी.जब सरकार खुद ही अपने नेताओं व समर्थकों को मौका देती है बहती गंगा में हाथ धोने को तो वह उनके खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकती है। कांग्रेस के शासन का यह सूत्र तो जग जाहिर है कि हम खुद भी खाते हैं और अपने लोगों को खाने का मौका भी देते हैं। सब जानते हैं कांग्रेस के शासन में सब मिलजुलकर प्रेम से खाने में यकीन रखते हैं. यही वजह है कि जिस किसी राज्य में कांग्रेस का शासन जाता है तो पता चलता है कि पांच साल में सबने मिलजुलकर खूब खाया है। जिस तरह से भी खाने का मौका मिला है,खाने से कोई परहेज नहीं किया गया है।कोयला हो, सट्टा हो, शराब हो, कस्टम मिलिंग हो,डीएमएफ हो,भारतमाला परियोजना हो अब सामने आ रहा है कि लोगों ने कैसे मिलजुल कर प्रेम से खाया है।
साय सरकार ने तो सत्ता संभालते ही यह साफ कर दिया है कि सरकार किसी भी तरह का भ्रष्टाचार सहन नहीं करेगी । जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और जिनके बारे में जांच में पता चलेगा कि किसी तरह का भ्रष्टाचार किया गया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। लोग समझ रहे थे कि हर सरकार जैसा करती है, साय सरकार भी वैसा करेगी।भ्रष्टाचार के मामले में अपने लोगों का नाम सामने कभी सामने आएगा तो वह बचाने का प्रयास करेंगी लेकिन साय सरकार ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामले में यदि किसी बड़े भाजपा नेता का नाम भी सामने आता है तो उसके खिलाफ एजेंसी वैसी ही कार्रवाई करेगी जैसे दूसरे दलों के नेताओं व समर्थकों के खिलाफ किया जाता है।
भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला प्रकरण में कांग्रेस नेताओं समर्थकों के साथ ही भाजपा नेताओं व समर्थकों का नाम आने पर ईडी ने कोई भेदभाव नहीं किया कि भाजपा नेताओं के छापा न मारा जाए और कांग्रेस नेताओं के यहां ही छापा मारा जाए।कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के करीबी रिश्तेदार भूपेंद्र चंद्राकर और दुर्ग के भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर छापेमारी की है।कांग्रेस के समय तो ऐसा कभी सुना नहीं गया कि कांग्रेस नेताओं के यहां किसी भ्रष्टाचार के मामले में छापा मारा गया है लेकिन साय से समय लोग देख सुन व पढ़ रहे हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा नेताओं या उनके करीबियों के छापा मारा जा रहा है। इससे जनता में यह संदेश तो जाता है कि साय सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ है और जो भी करेगा उसके खिलाफ बिना भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी।
साय सरकार को जनता ने चुनाव में जिताकर सत्ता सौंपी तो उनके सामने यही सबसे बड़ी चुनौती थी उनकी सरकार पिछली सरकार से कैसे अलग हो सकती है। जनता को कैसे बताया जाए कि साय सरकार पिछली सरकार से कैसे अच्छी सरकार है। पिछली सरकार में जो कुछ हुआ उसे न होने देकर ही साय सरकार खुद की अलग ईमानदार सरकार की छबि बना सकती थी, पहचान बना सकती थी और दो साल में साय सरकार ऐसी छबि व पहचान बनाने में सफल रही है। भाजपा नेताओं का यहां ईडी का छापा पड़़ने से यह साफ हो गया है कि साय सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ है चाहे वह कांग्रेस नेता करे या भाजपा नेता करें, उनके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होगी।
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