मास्को/नई दिल्ली (वीएनएस)। रूस ने कहा है कि ब्रिटेन और फ्रांस अपनी परमाणु क्षमता में वृद्धि करके परमाणु हथियारों की होड़ को जन्म दे रहे हैं। यह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है।
यह बात रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुशको ने कही। उन्होंने कहा कि फ्रांस के नये सैद्धांतिक दृष्टिकोण कई मायनों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की विस्तारित परमाणु निवारण नीति की याद दिलाते हैं और वे खुले तौर पर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के संयुक्त परमाणु मिशनों में सहायक बनने की योजनाओं को भी उजागर करते हैं।
ग्रुशको ने कहा, "ऐसे कदम नाटो के सदस्य देशों की उकसाने वाली सैन्य-परमाणु गतिविधियों के सामान्य पैटर्न के अनुरूप हैं, जो हमारे देश के खिलाफ हैं। ब्रिटेन ने पहले भी अपनी परमाणु क्षमताओं में वृद्धि की घोषणा की थी और वह भी रूस-विरोधी नारों के तहत। यह अपने आप में हथियारों की होड़ को बढ़ाने का काम करता है, जो न केवल एनपीटी के लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है, बल्कि संधि के प्रत्यक्ष दायित्वों के भी सीधे तौर पर विपरीत है।"
उन्होंने आगे कहा कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने स्थिति को इस तरह प्रस्तुत किया जैसे कि उनका अद्यतन "उन्नत परमाणु निवारण" सिद्धांत फ्रांस और उसके सहयोगियों की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस सिद्धांत में परमाणु हथियारों की संख्या के संबंध में पारदर्शिता को त्यागना और अन्य यूरोपीय संघ एवं नाटो देशों के क्षेत्रों में परमाणु हथियारों को तैनात करने की संभावना शामिल थी।
ग्रुशको ने कहा, "वास्तव में, वे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को एक और झटका दे रहे हैं, जिससे अतिरिक्त रणनीतिक जोखिम और एक नयी परमाणु हथियारों की होड़ के लिए प्रोत्साहन पैदा हो रहे हैं।"
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