करांची।इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को समाप्त करने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता प्रारंभ हुई। इससे पहले, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। व्हाइट हाउस ने इस बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की। वार्ता से पहले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जिसमें एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा ईरान की लगभग छह अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति को मुक्त करने पर सहमति जताई है। इस कदम को ईरान ने सद्भावना और गंभीरता का संकेत बताया है। साथ ही इसे होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने से भी जोड़ा गया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि अमेरिकी पक्ष ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है और एक अधिकारी ने इसे खारिज भी किया है।
हम आपको बता दें कि इस्लामाबाद में हो रही वार्ता में दोनों देशों ने अपने शीर्ष प्रतिनिधियों को भेजा है। अमेरिकी दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रमुख भूमिका में हैं। जेडी वेंस, जो पहले अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के आलोचक रहे हैं, अब ट्रंप प्रशासन के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में शामिल हो चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, जेडी वेंस ने वार्ता से पहले इस्लामाबाद में मध्यस्थों के साथ बातचीत कर यह स्पष्ट किया था कि यदि ईरान समझौते में देरी करता है तो अमेरिका दबाव बढ़ा सकता है। इसके बावजूद ईरान उन्हें अन्य अमेरिकी दूतों की तुलना में अधिक विश्वसनीय मानता है। इसके अलावा, अमेरिकी दल में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी हैं, हालांकि ईरान ने इन दोनों पर अविश्वास जताया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि पूर्व वार्ताओं में इनकी भूमिका रचनात्मक नहीं रही और इन्हें वार्ता प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए।
वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल में अब्बास अराघची के अलावा संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और सुरक्षा प्रमुख अली अकबर अहमदियान जैसे प्रभावशाली नेता शामिल हैं। अराघची को कठिन वार्ताओं का विशेषज्ञ माना जाता है और वह पहले भी परमाणु समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वहीं गालिबाफ का प्रभाव सैन्य और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में गहरा है, जिससे वह वार्ता में एक सख्त लेकिन रणनीतिक रुख प्रस्तुत कर सकते हैं।इस बीच, ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने स्पष्ट किया है कि यदि वार्ता अमेरिका के हितों के साथ साथ संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित होगी तो समझौता संभव है, लेकिन यदि इसमें केवल इजराइल के हितों को प्राथमिकता दी गई तो कोई समझौता नहीं होगा।
उधर, क्षेत्रीय स्थिति भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। लेबनान में हिजबुल्ला और इजराइल के बीच तनाव बढ़ रहा है, जिसने इस युद्धविराम को खतरे में डाल दिया है। इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हिजबुल्ला के साथ किसी भी युद्धविराम पर चर्चा नहीं करेगा।हम आपको यह भी बता दें कि इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे शहर को एक विशेष सुरक्षा क्षेत्र में बदल दिया गया है। देखा जाये तो इस्लामाबाद वार्ता न केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों का भविष्य तय करेगी, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक शांति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
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