केजरीवाल पहले से ही जमीन तैयार कर रहे

Posted On:- 2026-03-12




सुनील दास

राजनीति में जो नेता बहुत होशियार होते हैं तो वह भविष्य में अपने बचाव के लिए बहुत पहले से जमीन तैयार करते हैं ताकि वह भविष्य में वह कह सकें कि वह तो पहले से यही कह रहे थे कि उनके साथ ऐसा ही किया जाएगा।उनके साथ गलत होने की आशंका थी और देखिए उऩकी आशंका अब सच साबित हुई है। जनता की अदालत ने तो केजरीवाल के मामले में अपना फैसला सुना दिया है। अब वह जनता की अदालत में पांच साल बाद ही जाएंगे इसलिए वह इस दौरान मिले समय का उपयोग करते हुए अपने आपको कट्टर ईमानदार नेता अदालत में साबित करना चाहते हैं। आगे की राजनीति के लिए उनके लिए निचली अदालत में ईमानदार साबित होना जरूरी था और निचली अदालत ने उनकी यह इच्छा पूरी कर दी।वह जैसा चाहते थे, निचली अदालत ने दिल्ली शराब घोटाले में जो फैसला सुनाया वह वैसा ही था यानी केजरीवाल जनता के बीच जाकर यह कह सकते थे देखो निचली अदालत के जज ने मुझको आरोपमुक्त कर दिया है यानी मैं कट्टर ईमानदार था, कट्टर ईमानदार हूं, तभी तो जज ने मुझको और बाकी लोगों को आरोपमुक्त किया है।

केजरीवाल को अंदेशा था कि यह मामला हाईकोर्ट जाएगा और निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी जाएगी।ऐसा ही हुआ है,केजरीवाल को ज्यादा बुरा यह लगा कि हाईकोर्ट ने जल्दी ही निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी इससे केजरीवाल को नुकसान यह हुआ है कि वह कुछ समय जो यह प्रचार करना चाहते थे, वह प्रचार अब नहीं कर सकते कि देखो निचली अदालत ने तो मुझे आरोपमुक्त कर दिया है, मैं तो पहले कहता था कि मैं ईमानदार हूं और काेर्ट ने ऐसा ही माना है तब ही तो मुझे आरोपमुक्त कर दिया है। हाईकोर्ट के जज के त्वरित फैसले के कारण वह ऐसा नहीं कर सके हैं यानी उनकी खुद को ईमानदार प्रचारित करने की योजना शुरु होती इससे पहले हाईकोर्ट के फैसले से उनकी योजना पर पानी फिर गया  है।

केजरीवाल जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बारे में पहले से जानते हैं कि वह जो फैसला करेंगी वह सही फैसला लेकिन उनके खिलाफ होगा इसलिए वह हाईकोर्ट की जज के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि उनके मामले की निष्पक्ष सुनवाई इस जज के कोर्ट में नहीं हो सकती इसलिए मामले को दूसरी अदालत में भेज दिया जाए, इसके लिए उन्होंने  दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय को पत्र लिखा है कि उऩके मामले को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत से दूसरी अदालत में भेज दिया जाए। उन्होंने कारण बताया है कि ९ मार्च को जस्टिस शर्मा ने बिना उनका पक्ष सुने ही आदेश पारित कर दिया है और ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तपेक्ष करने की कोई वजह भी नहीं बताई गई है। निचली अदालत के आदेश पर रोक असाधारण परिस्थिति में ही लगाया जाता है।९ मार्च के आदेश में बताया नहीं गया है कि असाधारण परिस्थिति क्या थी।

पत्र में यह भी बताया गया है कि सीबीआई की ओर से दायर याचिका में ईडी के मामले में भी आदेश पारित कर दिया गया है जबकि ईडी उसमे पक्षकार नहीं थी।पत्र में कहा गया है कि इस तरह की याचिकाओं में जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम चार से पांच सप्ताह का समय दिया जाता है।इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है। इससे साफ है कि केजरीवाल सोच रहे थे कि निचली अदालत के फैसले के बाद उनको चार पांच सप्ताह का समय मिलेगा और वह अपने को ईमानदार बताने का खूब प्रचार करेंगे लेकिन हाईकोर्ट के फैसले से सबकुछ टांय टांय फिस्स हो गया है। केजरीवाल को फिर से अदालत व वकीलों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। केजरीवाल को पहले से अऩुभव है कि हाईकोर्ट में उनके लिए पहले भी कुछ भी आसान नहीं था और आगे भी आसान नहीं रहने वाला है।

हाईकोर्ट के जज के फैसले से केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ने वाली है यानी वह निचली अदालत के फैसले के आधार पर जो राजनीति करना चाह रहे थे अब नहीं कर पाएंगे। हाईकोर्ट में उनके अऩुकूल कोई फैसला आने वाला नहीं है क्योंकि यहां वह कुछ ऐसा नहीं कर सकते कि कोई फैसला उनके पक्ष में आए। यहां उनके खिलाफ ही फैसला आया है इसलिए वह उम्मीद नहीं कर सकते कि यहां उनके पक्ष में कोई फैसला आएगा।वह नेता हैं,उनको राजनीति करना आता है तो उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले पर राजनीति शुरू कर दी है यानी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर जज की निष्पक्षता पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।चीफ जस्टिस क्या फैसला करते हैं यह आनेवाले दिनों में पता चलेगा लेकिन केजरीवाल ने अपने आने वाले बुरे दिनों की आशंका में अभी से बचाव की जमीन तैयार शुरू कर दी है यदि हाईकोर्ट मे फैसला उनके खिलाफ आता है तो वह यह कहकर राजनीति करेंगे कि हम तो पहले से कह रहे थे कि हमको निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है और देखो ऐसा हुआ है, एक कट्टर ईमानदार नेता को भ्रष्ट बताने के लिए अदालत का दुरुपयोग किया गया है। राहुलगांधी कह ही रहे हैं कि सब बड़ी संस्थाएं क्रम्प्रोमाइ्ज्ड है, केजरीवाल भी कहना शुरू कर देंगे।



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